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अपनी कथनी पर खरा उतरें पाक सेना प्रमुख

पड़ोसी देश पाकिस्तान के नये सेना प्रमुख के रूप में शुक्रवार को जब लेफ्टिनेंट जनरल राहील शरीफ अपना कार्यभार संभाल रहे होंगे तब उनके जेहन में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौजूदा चुनौतियों से निपटने का खाका स्पष्ट हो गया होगा

अपनी कथनी पर खरा उतरें पाक सेना प्रमुख
आशा है कि पड़ोसी देश पाकिस्तान के नये सेना प्रमुख के रूप में शुक्रवार को जब लेफ्टिनेंट जनरल राहील शरीफ अपना कार्यभार संभाल रहे होंगे तब उनके जेहन में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौजूदा चुनौतियों से निपटने का खाका स्पष्ट हो गया होगा, साथ ही साथ पाकिस्तान की नीतियों को बड़े पैमाने पर प्रभावित करने वाली वहां की कट्टरपंथी जमातों के साथ संतुलन बनाते हुए भारत के आपसी रिश्तों को भी, कड़वाहट और तनाव के दौर से निकाल, शांति और सौहार्दपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाने के प्रति सकारात्मक नजरिया अख्तियार कर लिए होंगे।
हालांकि राहील शरीफ ने यह कहा हैकि भारत-पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध विराम सामझौते का पालन होना चाहिए, इसे एक सकारात्मक कदम माना जा सकता है, परंतु अतीत को देखते हुए भारत वहां की सेना और आईएसआई पर पूरी तरह से भरोसा भी नहीं कर सकता। क्योंकि दुनिया को दिखाने के लिए पाक के हुक्मरान बड़े-बड़े दावे करते हैं पर जब उन दावों को हकीकत में बदलने की बारी आती है तो वही करते हैं जो वहां की कट्टरपंथी जमातें चाहती हैं। उनकी कथनी और करनी में अंतर हाल के दिनों में भी देखने को मिला जब चुनावों के दौरान और प्रधानमंत्री पद ग्रहण करने तक नवाज शरीफ सीमा पर शांति बहाल करने और भारत से रिश्ते सामान्य करने की बात करते रहे, परंतु उसके बाद से ही नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी हो रही है और पाक की ओर से कूटनीतिक स्तर पर भी भारत को उकसाने के प्रयास हो रहे हैं। इन्हीं सब कारणों से शांति के प्रयासों पर बार-बार ग्रहण लगते रहे हैं। स्थापना के बाद से ही पाक की नीति निर्धारण में वहां की सेना की अहम भूमिका रही है।
वहां की विदेश नीति पर सेना का वीटो है। भारत के साथ तो पाकिस्तान के रिश्ते वहां के सेना प्रमुख के हाथ में ही होते हैं। पूर्व जनरल जिया उल हक को छोड़ दें तो वहां के अधिकांश जनरल्स ने पाक में जेहादी विचारधारा को पोषित करने में दिलचस्पी दिखाई, इस जेहादी मानसिकता का आतंकवाद के रूप में भारत लंबे समय से भुक्तभोगी है।
पूर्व जनरल अशफाक परवेज कियानी के दौरान भी यह देखा गया कि उन्होंने कट्टरपंथियों का भरोसा जितने के लिए कई भारत विरोध कदम उठा जेहादियों को छूट दी। परवेज मुशर्रफ ने करगिल युद्ध की साजिश रची, हालांकि राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने रिश्ते बेहतर करने के लिए कुछ कदम उठाए परंतु सफल नहीं हो सके। इन्हीं कारणों से वहां के हर नये सेनाध्यक्ष पर भारत की नजरें टिकी रहती हैं। आज पाक के आर्थिक हालात खराब हैं, पाकिस्तान तालिबान जेहादी जमात से भी उसे समस्या पेश आ रही है और अगले साल अफगानिस्तान से अमेरिका की वापसी हो रही है ऐसे में पाक के नए सेना प्रमुख के सामने आर्थिक, आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय मोचरें पर भी चुनौतियों का सामना करना होगा।
वहीं हाल के दिनों में जिस तरह से नियंत्रण रेखा पर पाक सेना की ओर से संघर्ष विराम का उल्लंघन कर घुसपैठ कराई गई है, वैसे माहौल में भारत पाकिस्तान में एक ऐसा सेना प्रमुख चाहेगा जो कट्टर सोच न रखता हो, बल्कि तथ्यात्मक बातों पर अमल करने के साथ-साथ व्यवहारिक नजरिया रखता हो।

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