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नक्सलियों की कायराना हरकत चरम सीमा पर, हजारों बेगुनाहों को गवानी पड़ रही जान

नक्सलियों ने एक बार फिर कायराना हरकत की है। छत्तीसगढ़ में पुलिस को निशाना बनाया है। यह पहली बार नहीं है कि नक्सलियों ने सुरक्षा बलों पर हमला किया है। इससे पहले भी कई बार सुरक्षा बलों पर नक्सली हमले हुए हैं, जिसमें सैकड़ों जवान शहीद हुए हैं।

नक्सलियों की कायराना हरकत चरम सीमा पर, हजारों बेगुनाहों को गवानी पड़ रही जान

नक्सलियों ने एक बार फिर कायराना हरकत की है। छत्तीसगढ़ में पुलिस को निशाना बनाया है। यह पहली बार नहीं है कि नक्सलियों ने सुरक्षा बलों पर हमला किया है। इससे पहले भी कई बार सुरक्षा बलों पर नक्सली हमले हुए हैं, जिसमें सैकड़ों जवान शहीद हुए हैं। नक्सलियों ने सड़क निर्माण की सुरक्षा में लगे जवानों पर हमला कर जता दिया है कि वे विकास विरोधी हैं।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डा़ रमन सिंह का कहना सही है कि नक्सली बस्तर क्षेत्र में विकास नहीं होने देना चाहते हैं। नक्सली हमले निंदनीय है। अब तक देखा गया है कि नक्सली विकास के सभी आयामों-सड़क, बिजली, पानी, उद्योग आदि निर्माण को हमला कर रोकते रहे हैं, ताकि पिछड़े क्षेत्रों का विकास नहीं हो। जबकि 1967 में जब पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी से नक्सली आंदोलन शुरू हुआ था तो विकास की उपेक्षा और किसानों के हक केंद्र में थे,

लेकिन आज नक्सली विकास विरोधी बने हुए हैं। यूं तो 80 के दशक से ही नक्सलियों ने खूनखराबे को अपना ध्येय बना लिया था, तबसे लगातार निहत्थे और बेकसूरों की हत्या कर रहे हैं। हत्या के साथ लूट-खसोट भी कर रहे हैं। खास बात है कि नक्सली खुद को गरीबों का मसीहा दिखाने की कोशिश करते हैं, लेकिन पुलिस जवान की हत्या करते हैं, जो अधिकांश गरीब परिवार से आते हैं।

अब जबकि नक्सलियों का देश के अधिकांश हिस्से से सफाया हो चुका है और वे सीमित हिस्से में ही बचे हैं, सरकार को व्यापक दृष्टिकोण के साथ सोचना चाहिए। अभी तक के अध्ययनों से साबित हो चुका है कि नक्सल समस्या केवल कानून-व्यवस्था का ही प्रश्न नहीं है। जैसा कि पहले माना जाता था। यह आर्थिक और सामाजिक समस्या भी है। इसे राजनीतिक प्रश्न भी माना जाना चाहिए। और इसी हिसाब से इसका हल ढूंढ़ना चाहिए।

गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में कहा था कि सरकार जल्द ही नक्सल समस्या का अंत कर देगी। चूंकि नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षा बलों को उम्मीद से अधिक सफलता मिली है और इसके चलते अनेक हथियारबंद नक्सलियों को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर होना पड़ा है, इसलिए यह उम्मीद भी बढ़ी है कि निश्चित ही सरकार इस समस्या को खत्म करने में सफल होगी।

पूर्वात्तर से उग्रवाद का करीब-करीब सफाया हो चुका है, कश्मीर में आतंकवाद की भी कमर टूटी है और नक्सली भी अंतिम सांसें गिन रहे हैं। कोई भी आंदोलन जब हिंसा और लूटखसोट का रुख अख्तियार कर लेता है तो उसका हश्र बहुत ही खराब होता है। भारत के लिए आतंकवाद, उग्रवाद और नक्सलवाद लंबे समय से समस्या रहे हैं और इनमें हजारों बेकसूरों को जवान गंवानी पड़ी है।

सरकार को चाहिए कि केवल हथियार बंद सुरक्षा बलों के सहारे ही नक्सली समस्या का अंत नहीं हो सकता है, बल्कि भटके और वैचारिक रूप से विपथगामी लोगों को मुख्यधारा में लाने का भी प्रयास होना चाहिए। इसके साथ ही नक्सल प्रभावित क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक प्रश्नों का भी हल किया जाना चाहिए। जिन राज्यों में वर्षों से नक्सल समस्या है,

वहां की सरकारों को इस ओर ध्यान देना चाहिए। कई सरकारें वर्षों से सत्तासीन हैं, लेकिन नक्सल समस्या भी जस की तस है। केंद्र और राज्य सरकारों को व्यापक दृष्टिकोण के साथ सभी कारणों का विवेचना करते हुए नक्सल समस्या के हल का प्रयास करना चाहिए। उम्मीद है सरकार जल्द नक्सली समस्या को खत्म करने में सफल होगी।

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