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रिश्तों की नई इबारत लिख गई मोदी की अमेरिका यात्रा

पहली बार अमेरिका में किसी दूसरे देश के नेता का इतना जोरदार स्वागत हुआ

रिश्तों की नई इबारत लिख गई मोदी की अमेरिका यात्रा
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नई दिल्ली. भारत जहां दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है तो वहीं अमेरिका विश्व का सबसे पुराना लोकतंत्र है। ऐसे में इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि दोनों देशों के आपसी संबंध विश्व जगत को नई दिशा देने की ताकत रखते हैं। यही वजह थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अमेरिका दौरे पर सभी की नजरें टिकी थीं। उनका पांच दिवसीय अमेरिका दौरा कई मायनों में खास रहा। संयुक्त राष्ट्र महासभा में पहली बार भाषण देने के अलावा भारत में निवेश, कारोबार, रक्षा समझौते, आतंकवाद और दूसरे तमाम मुद्दों पर उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और ग्यारह बड़ी कंपनियों के सीईओ से बात की। जिस तरह वहां उनका स्वागत किया गया, वह एक देश के प्रधानमंत्री कम और सेलिब्रेटी ज्यादा मालूम पड़े।

पहली बार अमेरिका में किसी दूसरे देश के नेता का इतना जोरदार स्वागत हुआ। वह भी उस शख्स का जिसे अमेरिका ने नौ साल पहले वीजा देने से इनकार कर दिया था। न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में 18 हजार भारतीय-अमेरिकी लोगों को उनका संबोधन मंत्रमुग्ध कर देने वाला था। अमेरिकी इतिहास में इस तरह का कार्यक्रम पहली बार हुआ था। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उनसे दो दिन मुलाकात की। ऐसा शायद ही पहले कभी देखने को मिला हो जब ओबामा ने किसी नेता के लिए इतना वक्त निकाला हो। नरेंद्र मोदी और बराक ओबामा के बीच पहली शिखर बैठक भी काफी फलदायी रही। दोनों देश कारोबार बढ़ाने पर राजी हुए हैं।

हालांकि कभी अमेरिका भारतीय कारोबार जगत में सबसे बड़ा हिस्सेदार था, परंतु बीते पांच वर्षों के दौरान उसकी हिस्सेदारी सात प्रतिशत के करीब रह गई है। मोदी ने अमेरिकी रक्षा व गैर रक्षा कंपनियों को भारत में निवेश करने का न्यौता दिया है, लेकिन यह तभी होगा जब अमेरिकी निवेशकों के अनुकूल माहौल बनेगा। हालांकि प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि उनकी सरकार भारत में कारोबार करना सरल बनाएगी, परंतु इसके साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, जमीन अधिग्रहण की दिक्कत, कर विवाद, श्रम कानूनों की अड़चनों और ऊर्जा की दिक्कतों को भी दूर करना होगा। इसके साथ ही भारत-अमेरिकी रक्षा समझौते की अवधि दस वर्ष बढ़ाई गई है। दोनों देश असैन्य परमाणु सहयोग करार को आगे बढ़ाने पर राजी हुए हैं और परमाणु ऊर्जा के मुद्दे को सुलझाने पर सहमति बनी है।

अमेरिका ने कहा है कि वह डब्ल्यूटीओ में भारत की खाद्य चिंताओं का ख्याल रखेगा। आतंकवाद की चुनौतियों से निपटने के लिए भी दोनों देश आपसी सहयोग बढ़ाएंगे। इसके अलावा अमेरिका इलाहाबाद, अजमेर और विशाखापट्टनम को स्मार्ट सिटी बनाने में सहयोग करेगा। दोनों नेताओं का साझा संपादकीय लिखना भी रिश्तों में आई गर्माहट की बानगी पेश कर गया। जिसमें कहा गया कि भारत-अमेरिका की साझेदारी दुनिया को वर्षों तक शांति देती रहेगी। इसमें हिंदी में ‘चलें साथ-साथ’ का जिक्र बदलते हालात को रेखांकित करता है। इसे डिजिटल डिप्लोमेसी कहा जा रहा है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि दोनों देशों के संबंधों पर जो बर्फ जम गई थी नरेंद्र मोदी की इस यात्रा के बाद वह काफी हद तक पिघल गई है।

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