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रूसी क्रांति शताब्दी समारोह की तैयारी समिति की बैठक

नवम्बर क्रांति के सौ वर्ष के पूरा होने के अवसर पर देशव्यापी आयोजन की गई।

रूसी क्रांति शताब्दी समारोह की तैयारी समिति की बैठक
नवम्बर क्रांति के सौ वर्ष के पूरा होने के अवसर पर रविवार को देशव्यापी आयोजन किया गया। तैयारी के लिए हिन्दी भवन में एक बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता शिवमंगल सिद्धांतकर ने की। इस अवसर पर एक प्रपत्र भी विचार हेतू प्रस्तूत किया गया।
डॉ. बाइन ने कहा कि संकट में फंसा हुआ पूंजीवाद लगातार आक्रामक होता जा रहा है और श्रमिक वर्ग एवं आम जनता के बढ़ते हुए संकट से एक सामाजिक क्रांति की जमीन तैयार हो रही है। हमें उन पूंजीवाद, साम्राज्यवाद की कमजोर कड़ियों और श्रमिक वर्ग एवं संघर्षरत जनता के ताकतवर विन्दूओं पर फोकस करते हुए इस व्यवस्था को पलटने के संघर्ष को आगे बढ़ाना है। ओ.पी. सिन्हा ने इस पहलकदमी का स्वागत करते हुए साझा कार्यक्रम पर जोर दिया एवं वैचारिक प्रश्नों को केन्द्र में रखते हुए सेमिनार एवं पुस्तिकाओं के प्रकाशन की बात रखी। एन.पी.साहु ने इस शताब्दी समारोह का स्वागत करते हुए कहा कि वे झारखण्ड में राज्य समिति बनाकर कार्यक्रम लेंगे।
राहुल ने कहा कि इस पतनशील पूंजीवाद के खिलाफ जमीनी स्तर पर आमजन के बीच में क्रांतिकारी विचारों को ले जाना चाहिए। साथी समुद्र दत्त ने कहा कि हम लोगां ने बंगाल में पहलकदमी ली है और नवम्बर माह में एक बड़ा आयोजन करेंगे। हमें नवम्बर क्रांति के सबक और पूंजीवाद की कमजोर कड़ियों और श्रमिक वर्ग की वास्तविक शक्ति के बारे में आमजन के बीच में बात ले जाना है। प्रभात कुमार ने पहलकदमी का स्वागत करते हुए इसे अधिकतम व्यापक बनाने की बात कही और आमजन तक इसके संदेश को ले जाने की बात कही।
आनन्द स्वरूप वर्मा ने कहा कि इस आयोजन का दो पक्ष है, अकादमिक एवं जन कारवाई का। इस आयोजन से साहित्यकारों और बुद्धिजिवियों को जोड़ना है। उनका कहना था कि फासीवाद का मुकाबला कम्युनिज्म के बल पर ही संभव है। डा. कर्ण सिंह चौहान ने कहा कि रूसी क्रांति ने पूरी दूनिया के एवं समाज के हर हिस्से को प्रभावित किया। हमें इस क्रांति की उपलब्धियों को आमजन के बीच में इस तरह से ले जाना होगा ताकि लोगां के अन्दर बदलाव के प्रति उम्मिद पैदा हो।
कॉ. मुर्ती ने कहा कि यद्यपि वे अभी तैयारी समिति में नहीं रहेंगे लेकिन इस कार्यक्रम को करवाने में हर स्तर पर सहयोग करेंगे। प्रणव एन. ने कहा कि हमें इन बातों को लेकर आमजन के बीच में जाना होगा और उनके प्रश्नों का उचित उतर देने के लिए तैयार होना होगा। दामोदर ने इस आयोजन के साथ अपनी एकजूटता व्यक्त की। हरभजन सिंह ने इस ऐतिहासिक अवसर का पूरा लाभ उठाने के लिए व्यापक कार्यक्रम करने की बात कही।
अंजनी कुमार ने वैचारिक पहलूओं को सामने लाने एवं बड़े पैमाने पर पुस्तकों के प्रकाशन की बात कही। पी.के.साही ने आयोजन का स्वागत करते हुए सहयोग की बात कही किन्तु समिति में शामिल होने के सवाल पर बाद में फैसला बताने की बात कही। आर.पी.सिंह ने आपसी संवाद बढ़ाने एवं एक वैचारिक तालमेल करने पर बल दिया। विनित तिवारी ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों एवं फिल्मों के मार्फत आमजन तक बातें ले जाने की बात कही।
शिवमंगल सिद्धांतकर ने कहा कि साथियों की राय और साथी संतोष राणा के लेख की रौशनी में प्रस्तुत प्रपत्र को और विकसीत किया जाएगा। उन्होंने राष्ट्रीय तैयारी समिति एवं राज्य स्तरीय समितियों के गठन की बात कही। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, बिहार, झारखण्ड, महाराष्ट्र में नवम्बर माह तक कमेटियां गठित कर ली जाएंगी।
अखिल भारतीय तैयारी समिति : शिवमंगल सिद्धांतकर, संतोष राणा, डॉ. बाइन, समुद्र दत्त, हलधर महतो, सपन मुखर्जी, सुखेन्दु भट्टाचार्य, प्रो. जगमोहन सिंह, डॉ. लालबहादूर वर्मा, आनन्द स्वरूप वर्मा, डॉ. कर्ण सिंह चौहान, विनीत तिवारी, जी.पी.मिश्रा, ओ.पी.सिन्हा, के.एन.शुक्ला, प्रभात कुमार, अंजनी कुमार, सुनिल, बालगोविन्द सिंह, हरभजन सिंह, विजय चावला, विलास सोणवाने, अरुण कुमार, नरेन्द्र, शशि सोणवाने, पार्थसारथी सरकार, डॉ. रामकविन्द्र।
पर्यवेक्षक : डॉ. के.एस.शर्मा, सी.एच.एस.एन.मूर्ती। सांस्कृतिक समिति : जगमोहन सिंह, डॉ. लाल बहादूर वर्मा, आनन्द स्वरूप वर्मा, डॉ0 कर्ण सिंह चौहान, विनित तिवारी।
समन्वयक : आनन्द स्वरूप वर्मा । इस तरह रूसी क्रांति शताब्दि तैयारी के लिए 27 सदस्यीय समिति का गठन हुआ।
शशि सोणवने।
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