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संपादकीय लेख ... देश की अर्थव्यवस्था को संभालना जरूरी

वित्त वर्ष 2020-21 में 4 तिमाहियों में पहली दो तिमाही में जीडीपी में गिरावट रही, जबकि आखिरी दो तिमाही में इसमें बढ़त देखी गई। यह लगातार दूसरी तिमाही है, जिसमें कोरोना के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था बढ़ती नजर आई है। जीवीए में पूरे साल के दौरान 6.2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।

संपादकीय लेख ... देश की अर्थव्यवस्था को संभालना जरूरी
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संपादकीय लेख

Haribhoomi Editorial : भारतीय अर्थव्यवस्था में 40 साल की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। ित्त वर्ष 2020-21 में जीडीपी ग्रोथ दर -7.3 फीसदी रही। वित्त वर्ष 2019-20 में यह 4.2% थी। 2016-17 से लगातार अर्थव्यवस्था गिर रही है। 2018-19 में यह 6.12%, 2017-18 में 7.04% और 2016-17 में 8.26% रही थी। इससे पहले वित्त वर्ष 1979-80 में जीडीपी वृद्धि दर -5.2 फीसदी दर्ज की गई थी। इसकी वजह तब पड़ा सूखा था। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतें भी दोगुना बढ़ गई थीं। उस समय जनता पार्टी की सरकार केंद्र में थी, जो 33 महीने बाद गिर गई थी। अभी देश मार्च 2020 से कोरोना महामारी से जूझ रहा है। इसके चलते सरकार को देशव्यापी लॉकडाउन लगाना पड़ा, जिससे अर्थव्यवस्था का पहिया थम सा गया। बहुत सारे उद्योग-धंधे कुछ समय के लिए ठप हो गए, कारोबारी गतिविधियां थम गईं। जनवरी से मार्च के दौरान यानी चौथी तिमाही में जीडीपी की विकास दर 1.6 फीसदी रही है।

वित्त वर्ष 2020-21 में 4 तिमाहियों में पहली दो तिमाही में जीडीपी में गिरावट रही, जबकि आखिरी दो तिमाही में इसमें बढ़त देखी गई। यह लगातार दूसरी तिमाही है, जिसमें कोरोना के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था बढ़ती नजर आई है। जीवीए में पूरे साल के दौरान 6.2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) किसी एक साल में देश में पैदा होने वाले सभी सामानों और सेवाओं की कुल वैल्यू को कहते हैं। ग्रॉस वैल्यू एडेड (जीवीए) किसी अर्थव्यवस्था में होने वाले कुल आउटपुट और इनकम का पता चलता है। यह बताता है कि एक तय अवधि में इनपुट कॉस्ट और कच्चे माल का दाम निकालने के बाद कितने रुपये की वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन हुआ। इससे यह भी पता चलता है कि किस खास क्षेत्र, उद्योग या सेक्टर में कितना उत्पादन हुआ है।

जीवीए में गिरावट अर्थव्यवस्था में सुस्ती के संकेत है। चौथी तिमाही में अर्थव्यवस्था के आकार का अनुमान 38.96 लाख करोड़ रुपये रहा है। एक साल पहले इसी समय में यह 38.33 लाख करोड़ रुपये था। सालाना आधार पर इसका अनुमान 135.13 लाख करोड़ रुपये लगाया गया है, जबकि एक साल पहले यह 145.6 लाख करोड़ रुपये था। फरवरी में दूसरी बार एडवांस अनुमान जो सरकार ने जारी किया था उसमें यह कहा था कि अर्थव्यवस्था में 8% की सालाना गिरावट आ सकती है। उस अनुमान की तुलना में अर्थव्यवस्था में कम गिरावट आई है। दूसरी ओर वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान राजकोषीय घाटा सरकार के अनुमान से कम रहा।

वित्त मंत्रालय ने सोमवार को फिस्कल डेफिसिट का डाटा जारी किया। इसके तहत राजकोषीय घाटा 18,21,461 करोड़ रुपये है। यह देश की जीडीपी का 9.3% है, जो वित्त मंत्रालय के अनुमानित 9.5% से कम है। 2020-21 के लिए राजस्व घाटा (रेवेन्यू डेफिसिट) जीडीपी का 7.42 फीसदी रहा, जो 2019-20 के दौरान जीडीपी का 4.6% रहा था। वित्त वर्ष 2020-21 की तीसरी तिमाही में विकास दर्ज करने के साथ ही देश की अर्थव्यवस्था तकनीकी मंदी से बाहर आ गई थी। इससे पहले लगातार दो तिमाही अप्रैल-जून तिमाही में जीडीपी में 23.9% व जुलाई-सितंबर तिमाही में भी 7.5% गिरावट दर्ज की गई थी। बेरोजगारी दर भी देश में 9 फीसदी दर्ज की गई है। कोरोना की दूसरी लहर का असर इस चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल से जून के बीच) दिखेगा, क्योंकि दोबारा लॉकडाउन मार्च के आखिर और अप्रैल में राज्यों ने लगाया है। इसलिए अभी जरूरत देश की अर्थव्यवस्था को संभालने की है। इसके लिए केंद्र को सार्वजनिक खर्च बढ़ाना होगा और आर्थिक गतिविधियां तेज करनी होंगी।

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