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Editorial : भूटान के क्षेत्र में चीन को घुसपैठ से रोकना जरूरी

अंतरराष्ट्रीय मंच पर चीन की किरकिरी हुई थी व उसे डोकलाम से कदम वापस लेना पड़ा था। अरुणाचल, सिक्किम, उत्तराखंड, लद्दाख में सीमा पर चीन भारत के साथ उलझता रहा है। दक्षिण चीन सागर में चीन की मनमानी किसी से छिपी नहीं है। भारत समेत 13 देशों के साथ सीमा को लेकर चीन के विवाद हैं।

Editorial : भूटान के क्षेत्र में चीन को घुसपैठ से रोकना जरूरी
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संपादकीय लेख

Haribhoomi Editorial : चीन अपनी आदतों से बाज आने को तैयार नहीं है। दुनिया जब कोरोना से प्रभावित है, उसके असर से जूझ रही है, चीन अपनी विस्तारवादी अभियान में जुटा हुआ है। वैश्विक मंचों से लगातार हिदायत, विरोध के बावजूद चीन सुधरने को तैयार नहीं है। वैश्विक महाशक्ति बनने की चाह में इस कदर अंधा बन बैठा है कि छोटे-छोटे सीमाई मुल्कों की सीमा के अंदर घुसपैठ करने में चीन जैसे विशाल देश को गुरेज नहीं है। ताजा मामला भूटान का है। ऑस्ट्रेलियाई मीडिया ने दावा किया है कि चीन ने भूटान के 8 किलोमीटर अंदर ग्यालाफुग नाम से गांव बसा लिया है। यहां चीन ने सड़कें, इमारतें और पुलिस स्टेशन और आर्मी बेस तक बना लिया है। इस गांव में पावर प्लांट, गोदाम और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना का ऑफिस भी है।

एक रिसर्च जनरल में छपी रिपोर्ट का हवाला देते हुए ऑस्ट्रेलियाई मीडिया ने यह रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन के कब्जे वाले ग्यालाफुग गांव में 100 से ज्यादा लोग और इतनी ही संख्या में याक मौजूद हैं। कंस्ट्रक्शन वर्कर्स का आना-जाना भी यहां लगा रहता है। दरअसल, ये इलाका भारत के अरुणाचल प्रदेश से लगा हुआ है और चीन अरुणाचल पर भी दावा करता आया है, इसलिए माना जा रहा है कि भूटान की जमीन कब्जाने के पीछे असली निशाना भारत है। चूंकि चीन ये बात समझ चुका है कि तिब्बत 1 अरब 40 करोड़ की आबादी वाले चीन का ज्यादा विरोध नहीं कर पाएगा। चीनी सैनिकों ने यहां एक बड़ा बैनर टांग दिया है। इस पर लिखा है, 'शी चिनफिंग पर विश्वास बनाए रखें।' हाल ही में सीमा विवाद को लेकर चीन व भूटान के बीच कुनमिंग शहर में 25 बैठकें हुई हैं। दोनों देश 470 किलोमीटर लंबा बॉर्डर साझा करते हैं। बॉर्डर के बंटवारे को लेकर भूटान और चीन के तर्क अलग-अलग हैं। इस जमीन पर कब्जा करके चीन 1998 के एग्रीमेंट का उल्लंघन कर रहा है। चीन के इस जमीन के कब्जाने से भूटान के लोगों में निराशा बढ़ रही है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक,1980 में चीन का जो नक्शा था, उसमें ग्यालाफुग को भूटान के अंदर ही दिखाया गया था। भूटान भी मानता है कि चीन जिस जमीन पर अपना दावा ठोक रहा है, वो उनके लिए भी नया है। इससे पहले चीन ने इस जमीन पर कभी दावा नहीं किया था। चीनी मामलों के विशेषज्ञ रॉबर्ट बर्नेट के मुताबिक, चीन ये सब एक खास रणनीति के तहत कर रहा है। वह चाहता है कि इन गतिविधियों के कारण भूटान उसका विरोध करना शुरू करे और वह कब्जाई जमीन पर अपना दावा ठोक दे। बुद्धिस्ट आबादी वाले भूटान और चीन के कब्जे वाले तिब्बत में बहुत सी चीजें कॉमन हैं। भूटान के चीन के मुकाबले भारत से अच्छे संबंध हैं। भूटान सबसे ज्यादा व्यापार भी भारत के साथ ही करता है। चीन की भूटान में एंबेसी तक नहीं है। चीन, भूटान के कुल क्षेत्रफल के 12 फीसदी हिस्से पर अपना दावा जताता है। भूटान की रक्षा का दायित्व भी भारत ही निभा रहा है। भूटान के डोकलाम में चीनी घुसपैठ का भारत ने पुरजोर विरोध किया था।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर चीन की किरकिरी हुई थी व उसे डोकलाम से कदम वापस लेना पड़ा था। अरुणाचल, सिक्किम, उत्तराखंड, लद्दाख में सीमा पर चीन भारत के साथ उलझता रहा है। दक्षिण चीन सागर में चीन की मनमानी किसी से छिपी नहीं है। भारत समेत 13 देशों के साथ सीमा को लेकर चीन के विवाद हैं। चीन को अपनी यह छोटी हरकत बंद करनी चाहिए। पड़ोसी देशों की संप्रभुता का आदर चीन को करना चाहिए। भूटान में चीन को रोना जरूरी है, भारत सरकार को चाहिए कि संज्ञान में लेकर सच का पता लगाए और सत्य पाए जाने पर भूटान की रक्षा करे व चीन को कूटनीतिक व सामरिक तरीके से रोके। नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, म्यांमार, श्रीलंका, थाईलैंड आदि सीमाई पड़ोसी देशों में चीनी बढ़त भारत के सामरिक हित में नहीं है।

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