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संपादकीय लेख .. कोविड-19 की उत्पत्ति का सच सामने आना जरूरी

कोविड-19 का सबसे अधिक असर अमेरिका, यूरोप व भारत पर पड़ा है, और इनसे चीन की अदावत सब जानते हैं, दूसरी तरफ चीन के वुहान को छोड़ कर वहां और किसी राज्य में कोरोना नहीं फैला। इतना ही नहीं चीन की अर्थव्यवस्था लगातार चलती रही। चीन से निकले कोविड वायरस ने गर्म देश व शीत देश दोनों में तबाही मचाई है।

संपादकीय लेख .. कोविड-19 की उत्पत्ति का सच सामने आना जरूरी
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संपादकीय लेख

Haribhoomi Editorial : कोरोना चीन के वुहान से समूचे विश्व में फैला। यह सब जानते हैं, लेकिन वुहान में यह वायरस कहां से आया, इसका पता अभी तक नहीं लगाया जा सका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की टीम वुहान गई भी लेकिन वह कुछ खास पता नहीं लगा सकी, चीन ने उतनी ही जानकारी दी, जिससे कि उसकी थ्योरी ही साबित हो। अभी भी पूरे विश्व में चिकित्सा वैज्ञानिकों के लिए रहस्य ही है कोविड-19 वायरस वुहान में कहां से आया। इसको लेकर जिज्ञासा इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि यह लोगों पर कहर बन कर टूटा है, लाखों लोगों की जान चली गई, करोड़ों लोग संक्रमित हुए। वैश्विक अर्थव्यस्था को गहरा धक्का लगा, विकासशील देशों पर दोहरी मार पड़ी। स्वास्थ्य पर अधिक खर्च करना पड़ा और अर्थव्यवस्था की रफ्तार ठप हो गई।

कोविड-19 का सबसे अधिक असर अमेरिका, यूरोप व भारत पर पड़ा है, और इनसे चीन की अदावत सब जानते हैं, दूसरी तरफ चीन के वुहान को छोड़ कर वहां और किसी राज्य में कोरोना नहीं फैला। इतना ही नहीं चीन की अर्थव्यवस्था लगातार चलती रही। चीन से निकले कोविड वायरस ने गर्म देश व शीत देश दोनों में तबाही मचाई है। चिकित्सा विज्ञान के मुताबिक ज्ञात तथ्यों के आधार पर कोई भी वायरस या तो शीत क्षेत्र में काम करता है या गर्म क्षेत्र में, दोनों में एक साथ प्राकृतिक वायरस काम नहीं कर सकता है। इसलिए आशंका जताई जा रही है कि कोविड-19 वायरस हो ना हो वुहान लैब में मैन मेड हो। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शुरू से ही कोरोना को चीनी वायरस कहते रहे हैं। अब वैश्वक स्तर पर चिकित्सा वैज्ञानिक भी दावा करने लगे हैं कि कोरोना वुहान लैब से बनाए मैन मेड (तैयार किया गया) वायरस हो सकता है। अब अमेरिकी मीडिया ने अपनी रिपोर्ट में वायरस को लेकर खुलासा किया है कि कोविड लैब से लीक हुआ वायरस है।

अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने दुनिया और विश्व स्वास्थ्य संगठन से बहुत जरूरी जानकारी छिपाई है। चीन ने डब्ल्यूएचओ को बताया था कि वुहान में कोरोना का पहला केस 8 दिसंबर 2019 को मिला था, जबकि वायरस से संक्रमण का मामला इसके एक महीने पहले ही सामने आ गया था। चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के 3 रिसर्चर्स को नवंबर 2019 में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बीमारी के दौरान तीनों डॉक्टरों में कोरोना के लक्षण देखे गए थे। इसके बाद वुहान की लैब से वायरस के लीक होने का शक बढ़ गया है। रिपोर्ट में बीमार पड़े रिसर्चर्स की संख्या, समय और उनके लक्षण भी बताए गए हैं।

एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि ये रिपोर्ट उनके एक अंतरराष्ट्रीय पार्टनर ने उपलब्ध कराई है। इसकी जांच होनी चाहिए। हो सकता है कि वुहान लैब के डॉक्टर रिसर्च करते समय बीमार हुए हों। हमें इस बारे में सटीक जानकारी मिली थी। इससे पहले ऑस्ट्रेलियाई मीडिया ने चीन में 2015 में कोरोना पर रिसर्च होने का दावा किया था। कुछ समय पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के टॉप मेडिकल एडवाइजर एंथनी फॉसी ने कहा था कि वे नहीं मानते कि ये वायरस अपने आप पैदा हो सकता है। इसकी जांच की जानी चाहिए। वुहान लैब में काम कर चुके जापानी चिकित्सक ने भी चीन पर शंका व्यक्त की थी। कई देश डब्ल्यूएचओ से कोरोना वायरस का चीनी लैब से संबंध होने की स्वतंत्र जांच कराने की मांग कर रहे हैं। अमेरिकी मीडिया की इस रिपोर्ट को खारिज नहीं किया जा सकता। अमेरिका व ऑस्ट्रेलिया के मीडिया की बात मानें या नहीं, लेकिन कोरोना वायरस की उत्पत्ति का पता तो लगाया ही जाना चाहिए। आखिर विश्व को सच जानने का हक है और इस पर लीपापोती नहीं की जानी चाहिए। चीन को सच बताना ही चाहिए।

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