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Editorial : पेट्रोलियम व खाद्य महंगाई पर अंकुश लगाना जरूरी

दूसरी तरफ दूसरी लहर को रोकने के लिए राज्यों में किए गए लॉकडाउन से एक बार फिर लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट गहराने लगा है। इन दोनों ही कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे लोगों के सामने सुरसा की तरह नित उच्च स्तर की ओर अग्रसर महंगाई जीवनयापन को दूभर बना रही है। लगातार चौथे दिन पेट्रोल-डीजल के दाम में बढ़ोतरी देखने को मिली है।

Editorial :  पेट्रोलियम व खाद्य महंगाई  पर अंकुश लगाना जरूरी
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संपादकीय लेख

Haribhoomi Editorial : एक तरफ देश कोरोना की दूसरी लहर से परेशान है, रोज नए केस सामने आ रहे हैं, रिकार्ड मौतें हो रही हैं, ऑक्सीजन के लिए अफरा-तफरी मची हुई है, दूसरी तरफ दूसरी लहर को रोकने के लिए राज्यों में किए गए लॉकडाउन से एक बार फिर लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट गहराने लगा है। इन दोनों ही कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे लोगों के सामने सुरसा की तरह नित उच्च स्तर की ओर अग्रसर महंगाई जीवनयापन को दूभर बना रही है। लगातार चौथे दिन पेट्रोल-डीजल के दाम में बढ़ोतरी देखने को मिली है।

शुक्रवार को दिल्ली के बाजार में पेट्रोल की कीमतों में 28 पैसे की बढ़ोतरी हुई है। दाम बढ़ने के बाद पेट्रोल 91.27 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है। डीजल भी 31 पैसे ऊपर उठकर 81.73 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है। मुंबई में पेट्रोल का भाव 27 पैसे और डीज़ल की कीमतों में 33 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी देखने को मिला है। मुंबई में पेट्रोल का भाव 97.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल का भाव 88.82 रुपये प्रति लीटर तक पर पहुंच गया है। पिछले दो महीने से देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के दौरान पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई थी। पेट्रोल 77 पैसे प्रति लीटर सस्ता हुआ था। अब पिछले चार दिन से जारी बढ़ोतरी के कारण पेट्रोल 90 पैसे प्रति लीटर महंगा हो गया है। डीजल 74 पैसे प्रति लीटर सस्ता हुआ था, अब चार दिनों से बढ़ोतरी के कारण डीजल एक रुपया प्रति लीटर महंगा हो गया है। इस महीने से पहले तेल कंपनियों ने अंतिम बार गत 27 फरवरी को डीजल के दाम में 17 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। देश में पेट्रोल-डीजल की महंगाई खाने-पीने की चीजों की कीमतों को प्रभावित करती है।

पेट्रोल के महंगा होने से लोगों की व्यक्तिगत आवाजाही पर बोझ पड़ रही है तो डीजल की महंगाई से यात्रा, अस्पताल पहुंचने का खर्च, सब्जी-फल-अनाज की ढुलाई की लागत आदि बढ़ जाती है। अभी फरवरी, मार्च और अप्रैल माह के दौरान खाद्य-पदार्थ की कीमतों में 15 से 65 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। अभी अप्रैल में देश के अधिकांश राज्यों में लॉकडाउन लगा है, और खाने-पीने की चीजों के दाम में आग लगी है। कोरोना से बचाव के लिए लोग सब्जी, फल, दाल, मछली, अंडे, दुग्ध उत्पाद आदि का पर्याप्त सेवन कर रहे हैं और जंक फूड से बच रहे हैं। इन दिनों में खाद्य तेल, घी, मछली, मांस, अंडे, आलू, प्याज, टमाटर, हर सब्जियां, फल, चावल, गेहूं, अरहर दाल, चना दाल, सोया तेल, दूध और चाय के भाव बढ़ गए हैं। 40 रुपये का नारियल पानी 100 रुपये तक में बिक रहा है। कोरोना मरीजों के उपयोग में आने वाली चीजें विटामिन सी, ग्लूकोज, ऑक्सीमीटर, इनहेलर, स्टीम मशीन आदि की कीमतें भी बढ़ गई हैं।

कोरोना मरीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाने के लिए किराया दोगुना-तिगुना तक बढ़ गया है। ऑक्सीजन व वेंटिलेटर के लिए अफरा-तफरी है ही। फरवरी में खुदरा महंगाई दर 5 फीसदी व मार्च में 5.52 फीसदी थी। अप्रैल में यह दर और बढ़ेगी। सरकार व रिजर्व बैंक का अनुमान खुदरा महंगाई दर को 4 फीसदी के नीचे रखने का लक्ष्य है, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है। केंद्र व राज्य सरकार को चाहिए कि वे खाने-पीने की चीजों की आपूर्ति सुनिश्चित करे, कालाबाजारी व जमाखोरी के खिलाफ कदम उठाए, पेट्रोल व डीजल के दामों पर अंकुश लगाए। समय रहते महंगाई पर अंकुश नहीं लगाया गया तोआम लोगों का जीवन-यापन कठिन हो जाएगा। खाने-पीने, लाइफ सेविंग दवा आदि की महंगाई पर सरकार को तुरंत लगाम लगाना चाहिए।

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