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IPL 2018 Final : आईपीएल मतलब इंडियन पैसा लीग

रविवार 27 मई को आईपीएल फाइनल के साथ निपट जाएगा। आईपीएल फाइनल की पूर्व संध्या पर आईपीएल विषय पर एक निबंध प्रतियोगिता आयोजित की गई। आईपीएल का ऐसे तो नाम है इंडियन प्रीमियर लीग। पर इसे इंडियन पैसा लीग भी कहा जाता है क्योंकि इसका ताल्लुक क्रिकेट से कम पैसे से ज्यादा है। खिलाड़ी पैसे के लिए इधर से उधर और उधर से न जाने किधर निकल लेता है।

IPL 2018 Final : आईपीएल मतलब इंडियन पैसा लीग

रविवार 27 मई को आईपीएल फाइनल के साथ निपट जाएगा। आईपीएल फाइनल की पूर्व संध्या पर आईपीएल विषय पर एक निबंध प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें प्रथम पुरस्कार प्राप्त निबंध इस प्रकार है। आईपीएल का ऐसे तो नाम है इंडियन प्रीमियर लीग। पर इसे इंडियन पैसा लीग भी कहा जाता है क्योंकि इसका ताल्लुक क्रिकेट से कम पैसे से ज्यादा है। खिलाड़ी पैसे के लिए इधर से उधर और उधर से न जाने किधर निकल लेता है।

दिल्ली के शिखर धवन हैदराबाद की टीम में होते हैं। पैसा ज्यादा वहां से मिला। दिल्ली के विराट कोहली बंगलूर की तरफ से खेलते हैं, पैसा ज्यादा वहां से मिला। अगर कल को पाकिस्तान से बहुत पैसा आ जाए और आईपीएल टाइप की नीलामी चलने लगे तो कई भारतीय खिलाड़ी पाकिस्तान की तरफ से भी खेलते दिख सकते हैं।

खेल भावना से बड़ी नोट भावना होती है, इस बात का पक्का अहसास आईपीएल को देखकर होता है। आईपीएल में चीन ही छाया रहा। आईपीएल का मुख्य स्पॉन्सर जो फोन ब्रांड है वह चाइनीज ही है। इस फोन की मॉडलिंग प्रख्यात फिल्म स्टार आमिर खान करते हैं जो सरफरोश नामक फिल्म में बहुत बड़े देशभक्त बने थे।

आमिर खान किसी भारतीय फोन को बेहतरीन क्यों न बताते, जबकि वह बहुत बड़े देशभक्त रह चुके हैं। इस सवाल का जवाब यह है कि जब देशभक्त दिखने के पैसे मिले तो आमिर देशभक्त दिख गए। अब चाइनीज भक्त दिखने के पैसे मिल रहे हैं तो वह चाइनीज भक्त दिख रहे हैं। बंदे को फ्लेक्सिबल होना चाहिए।

जिस चीज का रेट ज्यादा हो वह कर लेना चाहिए। वह बन जाना ही चाहिए। दिल्ली वाला खिलाड़ी हैदराबादी हो लेता है और इंडिया का स्टार चाइनीज हो जाता है, पैसा मिलना चाहिए। इस तरह के सीन आईपीएल में देखकर नई पीढ़ी का मानसिक विकास अलग तरीके से होता है। नयी पीढ़ी का चिंतन ग्लोबल हो जाता है।

वह देश नहीं कैश पर ध्यान लगाती है और ग्लोबल हो जाती है। बाप भले ही नानुपुर इंडिया में मरा पड़ा हो पर न्यूयॉर्क में अगर ज्यादा सैलरी का पैकेज मिला हो तो बिना बाप के अंतिम संस्कार के भी भाग लेना चाहिए। ऐसे संस्कार मजबूत होते हैं।

रकम मिलते ही बंदे को हैदराबादी से लेकर चाइनीज से लेकर अमेरिकन तक सब हो ही जाना चाहिए। आईपीएल से हमें दर्शनशास्त्र के सबक भी मिलते हैं। आईपीएल ऐसा क्रिकेट टूर्नामेंट है जिसे आधिकारिक क्रिकेट में कोई जगह नहीं है। यानी इस टूर्नामेंट में बने रिकार्डों का कोई आधिकारिक मतलब नहीं है।

ये तो बस केवल और केवल खेल है। मतलब इतनी नीलाम बोली हो, इतनी उछलकूद हो, इतने चीयर डांस हों फिर भी कहीं रिकार्ड में एंट्री नहीं, यानी सब व्यर्थ, सारी मेहनत पैसे के लिए बस। जीवन व्यर्थ है, इससे ज्यादा उम्मीद न करनी चाहिए। आईपीएल से यह दार्शनिक सबक कोई भी ले सकता।

जीवन क्या है, चीयर लीडर के डांस सा क्षण भंगुर। मान सम्मान की चिंता नहीं करनी चाहिए। सब बराबर है। आईपीएल में टीम के मालिक और मालकिन अपने लिए काम कर रहे बड़े से बड़े क्रिकेटर को डांट डपट सकते हैं। आईपीएल से हमें घणे राजनीतिक सबक भी मिलते हैं।

खिलाड़ी कैश के लिए अपनी ओरिजनल टीम छोड़ सकता है, नेता सत्ता के लिए अपना ओरिजनल विचार छोड़ सकता है। कर्नाटक में कांग्रेस और देवेगौड़ा एक दूसरे को निपटाने के लिए लड़े थे, पर सत्ता सामने दिखी तो एक दूसरे को पटाने के लिए लड़ने लगे। यही फ्लैक्सिबिलटी आईपीएल में पायी जाती है।

जो आईपीएल को लगातार फालो करते हैं, उन्हे कर्नाटक के सीन अप्रत्याशित नहीं लगे। जो कर्नाटक के सीन लगातार देखते रहते हैं, उन्हे आईपीएल की नीलाम बोली में कुछ भी नया नहीं लगेगा। इस तरह से हम देख सकते हैं कि आईपीएल का अर्थशास्त्र, दर्शनशास्त्र और राजनीतिक चिंतन के विस्तारीकरण में गहन योगदान है। इसीलिए आईपीएल बहुत जरूरी है।

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