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इंटरनेट की निरपेक्षता को बचाना जरूरी

क्या अलग-अलग एप्लीकेशन और वेबसाइट के इस्तेमाल के लिए अलग-अलग शुल्क वसूलने की आजादी इंटरनेट सेवा देने वाली कंपनियों को मिलनी चाहिए?

इंटरनेट की निरपेक्षता को बचाना जरूरी
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क्या अलग-अलग एप्लीकेशन और वेबसाइट के इस्तेमाल के लिए अलग-अलग शुल्क वसूलने की आजादी इंटरनेट सेवा देने वाली कंपनियों को मिलनी चाहिए? यह सवाल उपभोक्ताओं और सरकार को परेशान करने लगा है। पिछले कुछ दिनों से नेट न्यूट्रैलिटी (इंटरनेट निरपेक्षता) यानी बगैर भेदभाव के इंटरनेट आधारित सेवा देने का मुद्दा चर्चा में है। एक तरफ टेलीकॉम कंपनियां, जो इंटरनेट सेवा देती हैं, नेट न्यूट्रैलिटी खत्म करने को लेकर लामबंद हैं, वहीं दूसरी तरह इसे संरक्षित करने के लिए इंटरनेट उपभोक्ता विरोध में मुखर हो रहे हैं। इनकी ओर से सरकार और कंपनियों पर दबाव बनाने के लिए तमाम ऑनलाइन मंचों पर अभियान चलाए जा रहे हैं।
केंद्र सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है। और इसकी पड़ताल के लिए विशेषज्ञों की एक कमेटी का गठन किया गया है, जो अगले एक माह में अपनी रिपोर्टदेगी। अब केंद्र सरकार से अपेक्षा है कि वह इस मामले में स्पष्ट रुख अपनाए। दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने फैसला आम लोगों के हित में करने का संकेत दिया है। उनका यह बयान आस जगाता है कि इंटरनेट इंसान के दिमाग की बेहतरीन खोज है। दरअसल, टेलीकॉम कंपनिया नेट न्यूट्रैलिटी को समाप्त करना चाहती हैं, ताकि उनकी कमाई बढ़ सके। अभी नेट सेवा लेने के बाद उपभोक्ता किसी भी साइट पर जा सकता है, लेकिन टेलीकॉम कंपनियां इसके पक्ष में नहीं हैं। इन दिनों लोग मैसेजिंग व कॉलिंग एप्लीकेशन का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन पर शुल्क लगाकर इंटरनेट आय में वे भी हिस्सेदारी चाहती हैं। टेलीकॉम कंपनियों के इस कदम के विरोध में लाखों इंटरनेट उपभोक्ता भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) को लिख चुके हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि टेलीकॉम कंपनियों की बात मानी गई तो इंटरनेट जगत में गैरबराबरी पैदा होगी। एक तो पैसा देने वाले खास एप्लीकेशन और वेबसाइट का तेजी से प्रयोग कर सकेंगे।
वहीं यदि एक इंटरनेट सेवा देने वाली कंपनी किसी कंपनी से उसकी वेबसाइट या एप्लीकेशन के इस्तेमाल के लिए समझौता कर लेगी तो दूसरी कंपनी के उपभोक्ता उसे एक्सेस नहीं कर पाएंगे। साथ ही अलग-अलग वेबसाइट व एप की अलग-अलग स्पीड मिलेगी। इंटरनेट को आम और खास में नहीं बांटा जाना चाहिए। इंटरनेट पर हर एप्लीकेशन और वेबसाइट तक लोगों की पहुंच होनी चाहिए। जिस प्रकार टेलीफोन के जरिए उपभोक्ता कहीं भी, किसी भी नंबर पर बेरोकटोक बात कर सकते हैं। आॅपरेटर के पास किसी नंबर को ब्लॉक करने का अधिकार नहीं होता है।
उसी प्रकार नेट न्यूट्रैलिटी का आशय यह है कि उपभोक्ता बिना रोकटोक उन सभी वेबसाइट व एप्लीकेशन का इस्तेमाल करें जो गैरकानूनी नहीं हैं। इंटरनेट सेवा प्रदाता इनके इस्तेमाल को किसी प्रकार बाधित नहीं कर सकते। अमेरिका में भी नेट न्यूट्रैलिटी को संरक्षित करने के लिए नियम बने हैं। आज के दौर में इंटरनेट भी बिजली और पानी जैसी सेवा है और इसमें भेदभाव की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। आशा है कि ट्राई और केंद्र सरकार जन भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इंटरनेट सेवाओं को समान रूप से सबके लिए सुलभ बनाए रखने के उद्देश्य से समझौता नहीं करेंगे।
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