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अब अविजित नहीं रहेगी आधी आबादी : चित्रा मुद्ग्ल

भारतीय संस्कृति में स्त्री को आदिशक्ति माना गया है

अब अविजित नहीं रहेगी आधी आबादी : चित्रा मुद्ग्ल
आवरण कथा
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस
बीतते जा रहे हैं साल-दर-साल। लेकिन आधी आबादी की आंखों में समाज में बराबरी का अस्तित्व पाने का सपना, अभी भी साकार होने की बाट जोह रहा है। विरोधाभासी सोच, रूढ़िग्रस्त-पुरुषवादी मानसिकता और बाजार-आधारित भोगवादी दृष्टि जैसे कई मोरचों पर एक साथ संघर्ष करती आधी आबादी की सशक्त तस्वीर कैसे उभरेगी? स्त्री सशक्तिकरण का सच क्या है? इन्हीं सवालों पर प्रख्यात साहित्यकार चित्रा मुद्गल के विचार।
भारतीय संस्कृति में स्त्री को आदिशक्ति माना गया है। हमारे यहां धन की अधिष्ठात्री देवी लक्ष्मी, ज्ञान की देवी सरस्वती और शक्ति की देवी दुर्गा हैं। पौराणिक मान्यताएं और कथाएं बताती हैं कि देवता और मनुष्य, दोनों ने बार-बार अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आदिशक्ति का आह्वान किया है। हिंदू धर्म इस भरोसे के सहारे जीवित रहा है कि आदिशक्ति की असीम शक्ति से हर अराजक स्थिति तथा दुष्ट शक्ति से पार पाया जा सकता है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस मान्यता का अनुसरण होता चला आ रहा है, लेकिन सिर्फ एक अनुष्ठान के रूप में।
समाज की विरोधाभासी मानसिकता
वास्तव में भारतीय समाज में सकारात्मक परंपरा और विश्वास के साथ कुछ रूढ़ियां भी चली आ रही हैं। स्त्री के प्रति व्यवहार में एक विरोधाभास समांतर रूप से चल रहा है। स्त्री एक तरफ देवी है, तो दूसरी तरफ भोग्या भी है। उसे आदर के आसन पर बिठाया जाता है और तिरस्कार और वंचना भी उसके हिस्से में आती है। अतीत में पति के न रहने पर सती होने की अमानवीय प्रथा संभवत: स्त्रियों को नियंत्रण में रखने के लिए विशेष रूप से बनाए गए थे। यानी, शुरुआत से ही स्त्रियों को नियंत्रित करने के नियम धर्म ज्यादा थे, विरोधाभासी सोच साथ चलती दिखती हैं। आज यह विरोधाभासी छवि बहुत ही विकृत, बर्बर और विकराल रूप ले चुकी है। आज भी देवी के रूप में स्त्री को पूजा जा रहा है, लेकिन उसके प्रति बर्बरता भी बढ़ती जा रही है। आदर्शों के साथ चले आ रहे इस विरोधाभास के उदाहरण परिवारों में ही देखे जा सकते हैं। पुरुष प्रधान भारतीय समाज में पुरुष मां, बहन के रिश्ते में स्त्री को सम्मान देता है तो उन पर अधिकार भी जमाता है। लेकिन खामियाजा हर तरह से स्त्री उठाती है।
नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, महिला सशक्तिकरण का सच -
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