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संपादकीय लेख : देउबा के पीएम बनने से नेपाल से सुधरेंगे भारत के संबंध

नेपाल में सत्ता परिवर्तन भारत और नेपाल के रिश्तों को और प्रगाढ़ करेगा। नेपाल के सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष 74 वर्षीय शेर बहादुर देउबा अपने देश के प्रधानमंत्री बने हैं। देउबा भारत के साथ बेहतर रिश्तों के हिमायती रहे हैं। नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने संविधान के अनुच्छेद 76 (5) के तहत उन्हें प्रधानमंत्री नियुक्त किया। यह पांचवीं बार है जब देउबा ने नेपाल के प्रधानमंत्री के तौर पर सत्ता में वापसी की है। उनकी नियुक्ति नेपाली उच्चतम न्यायालय की ओर से एक दिन पहले सोमवार को दिए गए फैसले के बाद हुई है।

संपादकीय लेख : देउबा के पीएम बनने से नेपाल से सुधरेंगे भारत के संबंध
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संपादकीय लेख

Haribhoomi Editorial : नेपाल में सत्ता परिवर्तन भारत और नेपाल के रिश्तों को और प्रगाढ़ करेगा। नेपाल के सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष 74 वर्षीय शेर बहादुर देउबा अपने देश के प्रधानमंत्री बने हैं। देउबा भारत के साथ बेहतर रिश्तों के हिमायती रहे हैं। नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने संविधान के अनुच्छेद 76 (5) के तहत उन्हें प्रधानमंत्री नियुक्त किया। यह पांचवीं बार है जब देउबा ने नेपाल के प्रधानमंत्री के तौर पर सत्ता में वापसी की है। उनकी नियुक्ति नेपाली उच्चतम न्यायालय की ओर से एक दिन पहले सोमवार को दिए गए फैसले के बाद हुई है। नेपाल के उच्चतम न्यायालय ने प्रधानमंत्री ओली के 21 मई के संसद की प्रतिनिधि सभा को भंग करने के फैसले को रद कर दिया था और देउबा को प्रधानमंत्री नियुक्त करने का आदेश दिया था। प्रधान न्यायाधीश चोलेंद्र शमशेर राणा के नेतृत्व वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा था कि प्रधानमंत्री के पद पर ओली का दावा असंवैधानिक है। कोर्ट ने भंग पड़ी संसद को बहाल करने को भी कहा था। नेपाली राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने तत्कालीन पीएम केपी शर्मा ओली की सिफारिश पर 22 मई को संसद भंग कर दी थी। नेपाली संसद पिछले 5 महीने में दूसरी बार भंग की गई थी। उन्होंने 12 और 19 नवंबर को चुनाव कराने का ऐलान किया था।

राष्ट्रपति के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 30 से ज्यादा याचिकाएं लगाई गई थीं। विपक्षी पार्टियों की तरफ से दायर याचिका में संसद को बहाल करने और नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा को प्रधानमंत्री बनाने की मांग की गई थी। नेपाल में पिछले साल दिसंबर से सियासी संकट बना हुआ है। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी में कलह की वजह से सरकार नहीं चल पाई थी। इससे पूर्व देउबा चार बार-पहली बार सितंबर 1995-मार्च 1997, दूसरी बार जुलाई 2001-अक्टूबर 2002, तीसरी बार जून 2004-फरवरी 2005 और चौथी बार जून 2017-फरवरी 2018 तक-नेपाल के प्रधानमंत्री रह चुके हैं। देउबा को 30 दिनों के अंदर सदन में विश्वास मत हासिल करना होगा। वर्तमान संसद में दलों की जो स्थिति है, उसमें देउबा के लिए बहुमत साबित करना कठिन नहीं होगा। देउबा नेपाल में अब तक विपक्ष में रही पार्टियों के गठबंधन की सरकार बनाएंगे। इस गठबंधन में नेपाली कांग्रेस, सीपीएन (माओवादी), सीपीएन-यूएमएल माधव कुमार नेपाल-झालानाथ खनाल गुट, जनता समाजवादी पार्टी का उपेंद्र यादव गुट और राष्ट्रीय जनमोर्चा शामिल हैं।

केपी ओली को हटाने की प्रक्रिया लंबे समय से चल रही थी। ओली के खिलाफ पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड लगातार मोर्चा खोले हुए थे। चीन के इशारों पर केपी ओली के फैसलों से नेपाल का काफी नुकसान हो रहा था, ड्रैगन सीमा की तरफ से नेपाल की पांच से अधिक चौकियों पर कथित रूप से चीन ने अवैध कब्जा कर लिया है, इससे नेपाली आवाम में ओली के खिलाफ गुस्सा है। चीन लंबे समय से वामपंथी दलों की सत्ता के जरिये भारत विरोधी अभियान में जुटा हुआ है। पहले प्रचंड भी चीनी प्रभाव में थे, पर जब से उनकी आंख खुली वे भारत के करीब आ गए। ओली के चीनी प्रभाव में होने का असर था कि नेपाल भारत के साथ सीमा पर उलझता चला गया, जबकि भारत और नेपाल के सदियों से मधुर संबंध रहे हैं। यहां तक कि भारत ने नेपाल जाने के लिए वीजा-पासपोर्ट प्रावधान खत्म कर रखा है। चीन की महत्वाकांक्षी विस्तारवादी नीतियों के चलते नेपाल को एहसास हो गया कि उससे दोस्ती उसे अपने भूभाग गंवाने के रूप में महंगा पड़ेगा। 2017 में प्रधानमंत्री बनने के बाद देउबा दिल्ली आकर पीएम नरेंद्र मोदी से मिले थे, व रिश्ते बेहतर करने की पहल की थी। देउबा भारत के साथ आर्थिक रिश्तों से लेकर मधेशियों के मामले में नरम रवैया दिखाते रहे हैं। भारत के बिना नेपाल की लाइफलाइन मुश्किल है, नेपाल भारत का मित्र देश है, उम्मीद की जानी चाहिए कि नेपाल भारत से पहले जैसे रिश्ते निभाएगा।

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