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ग्लास्गो में भारतीयों से उम्दा प्रदर्शन की उम्मीद

इस बार भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों के 14 खेलों में लगभग 215 खिलाड़ियों को उतारा है।

ग्लास्गो में भारतीयों से उम्दा प्रदर्शन की उम्मीद
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नई दिल्‍ली. स्कॉटलैंड की राजधानी ग्लास्गो में बुधवार को 20वें राष्ट्रमंडल खेलों का आगाज हो गया। ब्राजील में फुटबॉल वर्ल्ड कप का जश्न खत्म होने के बाद अब अगले ग्यारह दिनों तक ओलंपिक और एशियाई खेलों के बाद दुनिया की तीसरी बड़ी इस खेल स्पर्धा पर देश-दुनिया की निगाहें टिकी होंगी। इस बार भारतीय दल भारी उम्मीदों के साथ वहां गया है। सुविधाओं और तैयारियों में कमी की कुछ शिकायत के बावजूद भारतीयों को पिछले प्रदर्शन को दोहराने की संभावना है। भारत नई दिल्ली में हुए पिछले आयोजन में 101 (38 स्वर्ण, 27 रजत और 36 कांस्य) पदकों के साथ ऑस्ट्रेलिया के बाद दूसरा सबसे सफल देश रहा था। उसके तुरंत बाद भारत ने 2010 ग्वांग्झू एशियाई खेलों में भी रिकॉर्ड प्रदर्शन करते हुए 65 पदक जीते थे। फिर दो साल बाद लंदन ओलंपिक में तो भारत ने रिकॉर्ड छह पदक जीते।

लगातार सुधरे प्रदर्शन का यही कारनामा भारत ग्लास्गो में भी दिखाना चाहेगा। लिहाजा देशवासियों को अपने सभी खिलाड़ियों से काफी उम्मीदें हैं। पिछले राष्ट्रमंडल खेलों में तो भारतीय दल को अपनी धरती, घरेलू माहौल और दर्शकों का समर्थन प्राप्त था, लेकिन इस बार उनके लिए विदेशी धरती पर वही कारनामा दोहराने का दबाव जरूर रहेगा। इस बार भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों के 14 खेलों में लगभग 215 खिलाड़ियों को उतारा है, और देश को पदक की सर्वाधिक आस निशानेबाजी, मुक्केबाजी, कुश्ती, बैडमिंटन और हॉकी प्रतिस्पर्धाओं से है। हालांकि पदक जीतने में हरियाणा राज्य अव्वल रहा है। देश के कुल दो प्रतिशत आबादी वाले राज्य ने 2010 के खेल में स्वर्ण समेत 37 पदक जीतकर इतिहास रचा था। देश को पद तालिका में दूसरे नंबर पर पहुंचाने में इस राज्य के खिलाड़ियों का अहम योगदान रहा।

इस बार भी हरियाणा के भाग ले रहे कुल 42 खिलाड़ियों (जिसमें 21 महिला खिलाड़ी हैं) से उम्दा प्रदर्शन की उम्मीद है। ग्लास्गो में अभिनव बिंद्र, गगन नारंग, विजय कुमार, पीवी सिंधू (पैर में चोट के कारण सायना नेहवाल बाहर हैं), सुशील कुमार, योगेश्वर दत्त, बिजेंदर सिंह, और कृष्णा पूनिया पर सबकी नजरें रहेंगी। राष्ट्रमंडल खेल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित किया जाने वाला मल्टी-स्पोर्ट्स इवेंट है। जिसका आयोजन प्रत्येक चार वर्ष पर राष्ट्रमंडल देशों के एथलीटों के लिए किया जाता है। राष्ट्रमंडल देशों में यूनाइटेड किंगडम और वो देश शामिल हैं जो पूर्व में ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा रहे हैं। राष्ट्रमंडल खेलों का मूल वाक्य मानवता, समानता, भाग्य है। ये मूल वाक्य राष्ट्रमंडल देशों में एकता बढ़ाने का संदेश देता है।

पहले राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन 1930 में कनाडा के हैमिल्टन में आयोजित किया गया था। जिसमें 11 देशों के 400 एथलीटों ने छह खेल स्पर्धाओं में हिस्सा लिया था। इस बार 71 देशों के 4500 एथलीट 17 खेलों के 261 स्पर्धाओं में हिस्सा लेंगे। 1978 में इन खेलों का नाम कॉमनवेल्थ गेम्स (राष्ट्रमंडल खेल) पड़ा। इससे पहले इसे ब्रिटिश एंपायर गेम्स के नाम से जाना जाता था। भारतवासियों के पदकों की आस भारतीय दल कितना पूरा कर पाते हैं, वह इस बात पर निर्भर करेगा कि वे ग्लास्गो के वातावरण से कितना हद तक तालमेल बैठा पाते हैं।

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