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पाक को कड़ा संदेश अब और बर्दाश्त नहीं

भारतीय सेना ने पीओके में घुसकर करीब 40 आतंकवादियों और पाक सेना के जवानों को मौत के घाट उतारा।

पाक को कड़ा संदेश अब और बर्दाश्त नहीं
भरतीय सेना पीओके में पहली बार सजिर्कल स्ट्राइक को सफलतापूर्वक अंजाम देकर जबर्दस्त पराक्रम दिखाया है। निश्चित ही सेना के इस शौर्य से देशवासियों का सिर गर्व से ऊंचा हुआ है। आज समूचा देश अपनी सेना पर फख्र महसूस कर रहा है। हमारी सेना ने पीओके में घुसकर कई आतंकी शिविरों को नेस्तनाबूद करते हुए चालीस के करीब आतंकवादियों और पाक सेना के जवानों को मौत के घाट उतारकर इस कुटिल पड़ोसी देश को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि उसके धैर्य को कमजोरी समझने की भूल कतई नहीं करे।
जब से उड़ी की वारदात हुई है, तभी से पाकिस्तानी हुक्मरान लगातार गलतबयानी पर उतरे हुए थे। वहां के रक्षामंत्री धमकियां दे रहे थे कि भारत ने सीमा पार करने की कोशिश की तो अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए हम परमाणु हथियारों का उपयोग करने से नहीं चूकेंगे। भारतीय सेना ने उसके घर में घुसकर आतंकियों को सबक सिखाया है। पाक रक्षा मंत्री की उस धमकी क्या हुआ? क्या कारगिल युद्ध के समय पाक के पास परमाणु हथियार नहीं थे।
अगर इतना ही हौंसला उनके पास था तो तब यह हिमाकत क्यों नहीं कर सके? दरअसल, पाक ने गैर जिम्मेदारी की सारी हदें लांघ डाली हैं। न वह भारत के साथ अतीत में हुए किसी भी समझौते का पालन करने को तैयार है। न अंतरराष्ट्रीय बिरादरी द्वारा दी जा रही हिदायतों को सुन रहा है। न भारत की तरफ से समय-समय पर बढ़ाए गए दोस्ती के प्रयासों का सम्मान करने को तैयार है।
नरेन्द्र मोदी सरकार ने तो अपने शपथ ग्रहण समारोह से ही पाकिस्तान सहित तमाम पड़ोसी देशों की तरफ मित्रता का हाथ बढ़ाना शुरू कर दिया था। भारत पाकिस्तान व दूसरे पड़ोसी देशों के साथ शांति, सदभावना और विश्वास का माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्धता दिखा रहा था। जब-जब भी इस तरह की पहलें की गईं, तब तब सीमा पार से कुछ ऐसी नापाक हरकतें की गईं, जिनसे वार्ता हर बार पटरी से उतरती दिखाई देने लगी।
जब जब भी नए सिरे से बातचीत शुरू करने और विश्वास बहाली के प्रयास शुरू किए गए, तब कई बार तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को विपक्षी दलों की आलोचना का सामना तक करना पड़ा। तमाम तरह की औपचारिकताओं और प्रोटोकॉल को परे रखते हुए मोदी काबुल से नई दिल्ली लौटते समय लाहौर में नवाज शरीफ के पास रुके तो भी विपक्ष ने उनकी आलोचना की परन्तु अमेरिका से लेकर तमाम देशों ने मोदी सरकार की इस पहल की मुक्तकंठ से सराहना की। लगा कि दोनों देशों के बीच भरोसा बहाल करने की दिशा में ठोस पहल हो रही है परन्तु भारत सरकार की यह पहल वहां की सेना, आईएसआई और चरमपंथी जमातों को बहुत नागवार गुजरी।
इसके एक सप्ताह के भीतर पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमला किया गया। नतीजतन वार्ता एक बार फिर बेपटरी हो गई। उड़ी में अठारह सैनिकों की हत्या की घटना तो इसी महीने की है, जिसने भारत के सब्र के बांध को तोड़कर रख दिया। संयुक्त राष्ट्र संघ में नवाज शरीफ ने जिस तरह आतंकवादियों का महिमामंडन किया, उससे पूरी तरह साफ हो गया कि वे पाक सेना की कठपुतली से ज्यादा कुछ नहीं हैं।
इसी के बाद भारत सरकार कड़ा रुख अख्तियार करने को मजबूर हो गई। पाकिस्तान को विश्व बिरादरी के सामने पूरी तरह बेनकाब करने, उसे आतंकवादियों को पनाह देने, आतंक का निर्यात करने वाले देश के रूप में निरुपित करने की मुहिम शुरू की गई। बलूचिस्तान, गिलगित, पीओके और सिंध में पाक किस तरह मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहा है, भारत ने पहली बार दुनिया के सामने इसका खुलासा किया।
उड़ी में सैनिकों की शहादत का बदला लेने और पाक को उसकी हदें और हैसियत समझाने के लिए भारतीय सेना ने वह किया, जो कभी नहीं किया था। सरहदें पार करके पीओके के भीतर तीन किलोमीटर घुसकर आतंकियों के कई शिविरों को ध्वस्त कर दिया। पाकिस्तान के लिए भारत की ओर से संदेश साफ है कि बहुत हो चुका। अब और बर्दाश्त नहीं करेंगे।
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