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आतंक पर पाक के प्रति कठोर बनने की जरूरत

पाक को समझना चाहिए कि बार-बार युद्ध और आतंकवाद के घाव देने के बावजूद आज भारत विश्व में उभरती हुई आर्थिक महाशक्ति है।

आतंक पर पाक के प्रति कठोर बनने की जरूरत
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केरल के कोझिकोड से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान की आवाम से संवाद कर पाक हुक्मरानों की सोयी जमीर को जगाने की कोशिश की है। पीएम ने गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी व आर्थिक-सामाजिक पिछड़ेपन में जकड़े पाकिस्तान के शासकों को देश संवारने की सीधी चुनौती देकर लज्जित ही किया है। साथ ही पीएम ने पाकिस्तान को गरीबी-भूखमरी दूर करने के लिए ललकारा भी है और आतंकवाद के खिलाफ कड़े शब्दों में चेताया भी है। उन्होंने पाक को साफ संदेश दिया कि हम 18 जवानों की शहादत बेकार नहीं जाने देंगे और उरी हमले को कभी भूलेंगे नहीं।
जिस तरह आजादी के बाद से ही पाकिस्तान कश्मीर पर नजर गड़ाया हुआ है और इसे पाने के लिए भारत के खिलाफ आतंकवाद के इस्तेमाल को अपनी नीति बना ली है, उससे स्पष्ट है कि पाक सरकार सुधरने वाली नहीं है। मो. अली जिन्ना ने कौम के आधार पर जिस खुशहाली के लिए अलग पाकिस्तान बनाया था, आज उसी पाक की फौज ने अपनी हुकूमत और शान-ओ-शौकत व रुतबे के लिए समूचे देश को आतंकवाद और इस्लामिक कट्टरवाद की भट्ठी में झोंक दिया और पाकिस्तान के अधिकांश हिस्से को गरीबी, जहालत में जीने के लिए छोड़ दिया।
पंजाब प्रांत, लाहौर, कराची शहर व इस्लामाबाद को छोड़कर पाकिस्तान के अधिकांश हिस्सों में न ही विकास हुआ है और न ही लोग न्यूनतम मानवीय गरिमा के साथ जी पा रहे हैं। अपने हकों व अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे स्थानीय लोगों की आवाजों को पाक फौज बेरहमी से कुचलती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ठीक ही कहा कि पाक शासकों से बलूचिस्तान, क्वेटा, गिलगित-बाल्टिस्तान, सिंध, पख्तूनवा, खैबर, स्वात, पीओके संभल नहीं रहे हैं। इन्हीं इलाकों में पाक शासक के खिलाफ सबसे अधिक विद्रोह की चिंगारी भड़क रही है। इन्हीं क्षेत्रों में पाक पुलिस और पाक फौज अपने ही नागरिकों पर जुल्म ढाती हैं। यहीं अशांति है।
बार-बार शिकस्त खाने के बाद भी पाकिस्तान ने भारत से कुछ भी सबक नहीं लिया है। पाक को समझना चाहिए कि बार-बार युद्ध और आतंकवाद के घाव देने के बावजूद आज भारत विश्व में उभरती हुई आर्थिक महाशक्ति है, जबकि वह अलग-थलग पड़ा देश है। मोदी ने सही कहा कि भारत सॉफ्टवेयर का निर्यातक है, जबकि पाक टेरर का निर्यातक है। जिस कश्मीर के लिए पाक अपने आतंकवाद से कश्मीरियों के साथ हिंसा करता है, वे कश्मीरी अब समझने लगे हैं कि पाक उन्हें हिंसा व आतंक की गर्त में धकेल रहा है। भारत से दुश्मनी में पाक खुद आतंक की पनाहगार देश बन गया है।
32 से ज्यादा आतंकी व कट्टर इस्लामिक गुट पाक से ऑपरेट हो रहे हैं। ये गुट पाक के लिए जहरीले सांप की तरह हैं, जो उसे भी डंस रहे हैं। अपने टैक्सपेयरों का जितने पैसे पाक भारत के खिलाफ आतंकवाद पर पानी की तरह बहा रहा है, अगर वह उस पैसे को देश की गरीबी उन्मूलन पर खर्च करता तो आज वह खुशहाली की राह पर होता। वहां शांति होती। पर जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है, पहले वही उसमें गिरता है। पाक पर यह कहावत सटीक बैठती है। वह आतंकवाद की ज्वालामुखी बन चुका है, जिसमें पहले खुद स्वाहा हो रहा है। दरअसल, पाक एक विफल मुल्क बन चुका है, दुनिया में कोई उसे गंभीरता से नहीं ले रहा है।
कोई भी देश उसके साथ संबंध नहीं रखना चाहता। संयुक्त राष्ट्र में किसी भी देश ने पाकिस्तान के कश्मीर राग का सर्मथन नहीं किया। वह अलग-थलग पड़ गया। पीएम मोदी ने उरी हमले के बाद पाक को आइसोलेट करने की जो कूटनीति अपनाई है, वह रंग लाने लगी है। यूरोपीय यूनियन ने पाक को बलूचिस्तान मुद्दे पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी है। अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, र्जमनी, रूस ने पाक के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया है। सोमवार को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी यूएन में उरी हमले में हाथ होने को लेकर सबूतों के साथ दुनिया के सामने पाक की पोल खोलेंगी। अब भारत को आतंक पर पाकिस्तान के प्रति किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरतनी चाहिए।
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