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चीन की बौखलाहट, भारत में बढ़ाने लगा अपने कदम

भारत और चीन के मध्य सरहदी विवाद को लेकर वर्ष 1962 में जबरदस्त जंग हुई।

चीन की बौखलाहट, भारत में बढ़ाने लगा अपने कदम

विगत पचपन वर्षों से भारत और चीन में कभी दोस्ती और कभी दुश्मनी का दौर प्राय: अस्तित्व में रहा है। आजकल फिर भारत-चीन सरहद की पर तनातनी का दौर चल रहा है।

सिक्किम प्रांत में स्थित नाथूला पास के निकट दोनों देशों की फौजें तनातनी के साथ फिर से आमने सामने हैं। चीन की एक फौजी टुकड़ी द्वारा कैलाश मानसरोवर यात्रियों के एक जत्थे को आगे बढ़ने से रोक दिया गया।

अत: कैलाश मानसरोवर की तीर्थयात्रा अनिश्चित काल के लिए स्थगित हो गई। मंगलवार दिनांक 27 जून को चीन सरकार ने कहा कि नाथूला मार्ग को कैलाश मानसरोवर के तीर्थयात्रियों के लिए तब तक नहीं खोला जाएगा,

जब तक कि भारत-चीन सरहद पर विवादित कुछ मुद्दों को सुलझा नहीं लिया जाता। इसके पश्चात, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुख्य समाचार पत्र पीपुल्स डेली द्वारा एक लेख प्रकाशित किया गया,

जिसमें कहा गया कि भारतीय हुकूमत को अमेरिकी सरकार के छलावेपूर्ण जाल में कदापि फंसना नहीं चाहिए। अमेरिका और भारत के निरंतर प्रगाढ़ होते जाते कूटनीतक और रणनीतिक संबध से चीन की हुकूमत अत्यंत बौखलाई हुई और इस संदर्भ में सरहद पर अचानक उत्पन्न हुए सैन्य तनाव को समझा जा सकता है,

जिससे कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। अब इस विवादित सरहदी इलाके में चीन की लालफौज एक सड़क का निर्माण करने में जुटी हुई है, जिसका निर्माण रोकने की कोशिश भारतीय फौज ने की।

भारत का दावा है कि सड़क का निर्माण विवादित क्षेत्र में नहीं किया जा सकता है। यह तथ्य सर्वविदित है कि अभी तक भारत और चीन के मध्य दोनों राष्ट्रों द्वारा समान रूप से स्वीकार्य किसी स्थायी सरहद का निर्धारण अभी तक नहीं हुआ है, अत: वास्तविक नियंत्रण रेखा को ही सरहद माना जाता रहा है।

दोनों देशों के मध्य सरहद का विवाद तो उस वक्त प्रारंभ हुआ था, जब चीन द्वारा अनधिकृत तौर पर तिब्बत पर आधिपत्य स्थापित कर लिया गया तथा भारत ने तिब्बत के शासक दलाई लामा को भारत में शरण प्रदान कर दी।

भारत और चीन के मध्य सरहदी विवाद को लेकर वर्ष 1962 में जबरदस्त जंग हुई। 1962 की जंग में चीन की लालफौज ने भारत के लद्दाख क्षेत्र में 38 हजार स्कायर किलोमीटर आक्साईचीन इलाके पर कब्जा कर लिया, जो आज भी बरकरार है।

वर्ष 2003 तक चीनी हुकूमत सिक्किम को एक राष्ट्र कहती रही, जिसका राजा चोग्याल चीन को अपना अधिपति स्वीकार किया, किंतु जब 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री वाजपेयी ने चीन की कूटनीतिक यात्रा की तो चीन ने सिक्किम को भारत का अभिन्न अंग स्वीकार किया।

भारत-चीन सरहद पर वर्तमान तनातनी की पृष्ठभूमि में साऊथ चाइना सागर में चीन द्वारा स्थापित अनधिकृत आधिपत्य को भारत और वियतनाम द्वारा संयुक्त ललकार भी है, जहां दोनों देश द्वारा संयुक्त तौर पर तेल की खोज की जा रही है।

जापान, अमेरिका, आस्ट्रेलिया और भारत के संभावित रणनीतिक गठजोड़ से भी चीनी हुकूमत बेहद बौखलाई गई है, जोकि साउथ चाइना सागर में चीन को प्रबल चुनौती पेश करेगा।

भारत के विरुद्ध हर तरह से चीनी हुकूमत अब पाक के साथ खड़ी नजर आ रही है। आगामी वक्त में भारत को पाक और चीन की संयुक्त शक्ति से निपटना ही होगा। भारत चीन से सरहद विवाद बातचीत से निपटाना चाहता है, किंतु चीन की हाल की हरकतें कुछ और ही बयान कर रही हैं।

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