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आपसी सहयोग के नए युग में भारत व ब्राजील

आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान को समूचे विश्व में अलग थलग करने की मुहिम भारत ने छेड़ी है।

आपसी सहयोग के नए युग में भारत व ब्राजील
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भारत को ब्राजील के रूप में एक और मजबूत सहयोगी मिला है, जो आतंकवाद के खिलाफ लड़ने और एनएसजी में सदस्यता के मुद्दे पर भारत का सर्मथन करता है। यह भारत के लिए काफी अहमियत रखता है। ब्रिक्स सम्मेलन के समापन के एक दिन बाद सोमवार को भारत और ब्राजील ने संयुक्त रूप से आतंकवाद के खिलाफ बिना भेदभाव लड़ने का संकल्प लिया। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति की सफलता मानी जा सकती है।
आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान को समूचे विश्व में आइसोलेट करने की जो मुहिम भारत ने छेड़ी है, उसमें ब्राजील जैसे सशक्त लोकतांत्रिक देश का साथ मिलना महत्वपूर्ण बात है। ब्राजील लैटिन अमेरिकी देश है, जो दक्षिण अमेरिका महादेश में बड़ी ताकत है। इस तरह देखा जाए तो भारत ने आबादी वाले सभी छह महादेशों-एशिया, यूरोप, उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया में आतंकवाद के मसले पर पाकिस्तान को अलग-थलग कर दिया।
पाक मीडिया ने भी माना है कि पाकिस्तान दुनिया में अलग-थलग पड़ने के कगार पर है। ब्राजील ने बिना भेदभाव आतंकवाद के खिलाफ जंग की बात कह कर बिना नाम लिए पाक को नसीहत ही दी है। क्योंकि पाकिस्तान भरत के खिलाफ आतंक के इस्तेमाल में अच्छे और बुरे का फर्क करता रहा है। पाक भारत को जख्म देने के लिए इस्तेमाल किए गए आतंकवाद को अच्छा मानता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति माइकल टेमर के बीच द्विपक्षीय वार्ता की खास बात यह भी रही कि ब्राजील ने एनएसजी में भारत की एंट्री का पुरजोर सर्मथन किया। 48 परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के समूह एनएसजी में प्रवेश के लिए भारत की राह में केवल चीन रोड़ा है। भारत इस कोशिश में है कि चीन का विरोध में भी खत्म हो जाए। चीन इसके लिए दूसरे दौर की वार्ता करने को राजी भी हुआ है।
भारत ने ब्राजील से कई द्विपक्षीय करार भी किए हैं। ड्रग रेग्युलेशन, कृषि अनुसंधान और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है। भारत और ब्राजील ने 16 जुलाई 2014 को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्रासीलिया यात्रा के दौरान तीन करार किए थे। उस समय दोनों देशों ने रक्षा, साइबर सुरक्षा और गैर परंपरागत ऊर्जा के क्षेत्र में समझौता किया था।
ब्राजील 1948 से ही भारत का सहयोगी देश है। 1971 के बाद दोनों के रिश्ते मजबूत होने शुरू हुए। 2007 से दोनों देश अपने द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा दे रहे हैं। आज दोनों देश विज्ञान, तकनीक, फार्मा, अंतरिक्ष, रक्षा, आंतरिक सुरक्षा, पर्यावरण, कृषि व डेयरी क्षेत्र में मिलकर काम कर रहे हैं। भारत की हरित क्रांति में ब्राजील का भी सहयोग रहा है। कृषि और दुग्ध उत्पादन क्षेत्र में भारत ब्राजील की विशेषज्ञता का लाभ ले रहा है।
चूंकि दोनों ही देशों की बुनियाद कृषि पर टिकी है, इसलिए दोनों का स्वाभाविक सहयोगी होना लाजिमी है। कई भारतीय कृषि व डेयरी संस्थानों के साथ ब्राजील शोध और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में मिलकर काम कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने ब्राजील के उद्यमियों को भारत में निवेश का न्योता देकर दोनों देशों के ट्रेड को और आगे बढ़ाने की पहल की है।
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