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मुद्रास्फीति की बढ़ती दर मोदी के लिए बड़ी चुनौती

अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिये अगले एक-दो साल तक कुछ कड़े फैसले लेने होंगे।

मुद्रास्फीति की बढ़ती दर मोदी के लिए बड़ी चुनौती
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नई दिल्‍ली. मुद्रास्फीति (थोक) की दर पिछले तीन महीने के अपने सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गयी है। रेल मंत्री सदानंद गौड़ा ने बयान दिया है कि रेलवे यात्री भाड़े और माल ढुलाई के भाड़े की समीक्षा करने जा रहा है। पणजी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कह ही चुके हैं कि देश हित में कुछ कड़े फैसले लेने पड़ेंगे। जुलाई के दूसरे सप्ताह में वित्त मंत्री अरुण जेटली को इस साल का बजट पेश करना है। एक के बाद एक जिस तरह की खबरें आ रही हैं, उनसे आम नागरिकों में चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं कि यदि रेल का भाड़ा बढ़ा। महंगाई की दर बढ़ती गयी और कड़े फैसलों के नाम पर दी जाने वाली सब्सिड़ी खत्म कर दी गयी तो मोदी अच्छे दिन कैसे लाएंगे? मोदी ने पणजी में हाल ही में कहा है कि देश की वित्तीय स्थिति अच्छी नहीं है।

अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिये अगले एक-दो साल तक कुछ कड़े फैसले लेने होंगे। उन्होंने ट्वीट करते हुए देशवासियों से पूछा था कि अच्छे दिनों के लिए कड़े फैसले लेने में उनका साथ देंगे ना? अभी भाजपा के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार बनी ही है, इसलिये लोगों में किसी तरह का रोष अथवा नाराजगी देखने को नहीं मिल रही है परन्तु यदि महंगाई पर काबू नहीं पाया गया तो लोगों के सब्र का बांध टूटते ज्यादा देर नहीं लगेगी। सब जानते हैं कि लोगों ने कांग्रेस नीत सरकार को बाहर का रास्ता क्यों दिखाया है? पिछले पांच साल में बार-बार वादा करने के बावजूद तत्कालीन प्रधानमंत्री डा.मनमोहन सिंह महंगाई का तोड़ ढूंढने में नाकाम रहे।

दूसरे, एक के बाद एक भ्रष्टाचार और घोटालों की परतें खुलती रहीं। भ्रष्टाचार पर काबू पाने के लिये सक्षम लोकपाल बनाने की मांग की अनदेखी ही नहीं की गयी बल्कि इसकी मांग करने वाले समाजवादी नेताओं के दमन के हर संभव प्रयास किये गये। जब आम चुनाव का अवसर आया, तब लोगों ने मन बना लिया कि राहतों का सब्जबाग दिखाने वाली ऐसी सरकार को वे बर्दाश्त नहीं करेंगे। नरेन्द्र मोदी ऐसी शख्सियत रही हैं, जिन्होंने गुजरात के विकास मॉडल को सामने रखते हुए देशवासियों को यह भरोसा दिया कि यदि नीतियां, नीयत और नेतृत्व सही हो तो माहौल बदला जा सकता है। हरेक के लिए बेहतर भविष्य और विपुल संभावनाओं के द्वार खोले जा सकते हैं। आम आदमी सीधे-सीधे महंगाई की बात करता है। राजनीतिक समीक्षकों का भी यही मत है कि मोदी सरकार को महंगाई पर काबू पाना अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल करना होगा।

यदि कड़े फैसलों के नाम पर सरकार ने केरोसिन, डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस और खाद जैसी चीजों के दाम बढ़ने दिये। रेल किराये बढ़ाए गये तो महंगाई को नियंत्रित करना संभव नहीं होगा। जिस तरह अप्रैल के मुकाबले मई में मुद्रा स्फीति की दर बढ़ी, उससे लगता है कि सरकार जो चाह रही है, वह चरितार्थ होता हुआ नजर नहीं आ रहा है। निसंदेह मुद्रा स्फीति की बढ़ती दर मोदी सरकार की कड़ी परीक्षा सिद्ध हो सकती है। वित्त मंत्री के इस बयान की विपक्षी दलों ने आलोचना शुरू कर दी है कि जमाखोरी के चलते चीजों की कीमतें बढ़ रही हैं। विरोधी दलों का कहना है कि राजग सरकार अब महंगाई को नियंत्रित करके दिखाये।

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