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अलका आर्य का लेख : नव वर्ष में सबको नल से मिले जल

जल जीवन मिशन अब जन आंदोलन के रूप में चलाया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के ‘सबका साथ, सब का विकास, सब का विश्वास, सब का प्रयास ’ विजन के सिंद्धांत का पालन करते हुए इस मिशन का आदर्श वाक्य है कि ‘कोई भी छूटे नहीं’ और मुल्क में हर ग्रामीण परिवार को नल के पानी का कनेक्शन दिया जाए। सिर्फ पानी ही उपलब्ध नहीं कराया जाए बल्कि पानी की गुणवत्ता पर निगरानी रखने की भी व्यवस्था की गई है। फील्ड टेस्ट किट का इस्तेमाल करके पानी की गुणवत्ता का परीक्षण करने क लिए 8.5 लाख से अधिक महिला स्ंवयसेवकों को प्रशिक्षित किया गया है। जल जीवन मिशन का लक्ष्य 2024 तक मुल्क के हर ग्रामीण घर में नल से शुद्व पेय जल पहुंचाना है।

अलका आर्य का लेख : नव वर्ष में सबको नल से मिले जल
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अलका आर्य

अलका आर्य

पानी की समस्या को अक्सर एक सामाजिक समस्या के तौर पर देखा जाता है, जिसके स्वास्थ्य पर तात्कालिक व दूरगामी प्रभाव की पुष्टि कई अध्ययन भी करते हैं। मुल्क में पानी की कमी की समस्या एक गंभीर संकट है और इसके समाधान के लिए भारत सरकार न केवल मुल्क के भीतर बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी इस मुद्दे को उठाने के लिए पहल करती नजर आ रही है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2019 को जल जीवन मिशन (जे.जे.एम) की घोषणा की थी, इस मिशन के तहत मुल्क के सभी ग्रामीण घरों में यानी 19.22 करोड़ घरों में 2024 तक नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, मगर साथ ही साथ जल-स्त्रोतों की निरंतरता बनाए रखना भी इसका अनिवार्य हिस्सा है। इसके अंतगर्त वर्षाजल संचयन और जल संरक्षण के जरिए जल-स्त्रोतों के पुनर्भरण को सुनिश्चित किया जाता है तथा ग्रेवाॅटर प्रबंधन के द्वारा गंदले पानी का पुनरुपयोग किया जाता है। नव वर्ष 2022 सरकार की प्राथमिकता है कि सबको नल से जल मिले।

वर्ष 2019 में मिशन की शुरुआत में मुल्क के 19.22 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से केवल 3.23 करोड़ (17 फीसदी) के पास नल जल की आपूर्ति थी। कोविड-19 महामारी और उसके कारण लगने वाले लाॅकडाउन का असर तकरीबन हरेक गतिविधि पर पड़ा। जल जीवन मिशन का कार्य भी कुछ हद तक प्रभावित हुआ, लेकिन प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद इस मिशन के तहत बीते 28 महीनों में 5.44 करोड़ से अधिक ग्रामीण घरों में नल से जल आपूर्ति शुरू हो चुकी है। आंकड़े महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि आंकड़े सुधार करने के साथ-साथ कार्यक्रमों के प्रदर्शन को आंकने का एक मौका मुहैया कराते हैं। बहरहाल जे.जे.एम के आंकड़ों बावत अपर सचिव व जल जीवन मिशन के निदेशक भरत लाल के अनुसार-वर्तमान में 8.67 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल जल उपलब्ध कराया गया है। ध्यान देने वाली बात यह है कि मुल्क के तीन राज्य तेलंगाना, हरियाणा व गोवा और तीन केंद्र शसित प्रदेशों अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दादरा और नगर हवेली और दमन दीव, पुडुचेरी के सभी ग्रामीण घरों में नल जल की आपूर्ति की गई है शेष राज्यों व केंद्रशसित प्रदेशों में भी कार्य प्रगति पर है।'

वैसे भारत के मानचित्र पर ग्रामीण इलाकों के घरों में नल जल आपूर्ति को लेकर निगाह डालें तो 15 अगस्त 2019 की स्थिति व 30 नवंबर 2021 की स्थिति के फर्क को रंगों के जरिए समझा जा सकता है। इस दिशा में हो रही प्रगति साफ पता चलती है, लेकिन फिर भी चिंता बनी हुई है। घरेलू नल कनेक्शन प्रदान करने के मामले में विभिन्न राज्यों की 30 नवंबर 2021 तक तुलनात्मक स्थिति बोलती है कि मुल्क का सबसे बड़ा राज्य जिसकी आबादी करीब 23 करोड़ है, वह जल जीवन मिशन में सबसे पीछे है। यहां ग्रामीण घरों में नल जल आपूर्ति का आंकड़ा दस प्रतिशत से थोड़ा ही ऊपर है। छत्तीसगढ़, प.बंगाल, झारखंड उत्तरप्रदेश से थोड़ा बेहतर प्रदर्शन करते दिखाए गए हैं। राजस्थान में यह आंकड़ा 30 प्रतिशत को छू गया है। उत्तरप्रदेश, छत्तीसगढ़, प.बंगाल, झारखंड और राजस्थान को लाल रंग में दर्शाया गया है। बेशक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी 16 नवंबर को उत्तरप्रदेश में 'पूर्वाचंल एक्सप्रेस वे' के उदघाटन के मौके पर कहा कि सिर्फ दो साल ही में यूपी सरकार ने करीब-करीब 30 लाख ग्रामीण परिवारों को नल से जल पहुंचा दिया है,और इस वर्ष लाखों बहनों को अपने घर पर ही शुद्व पेयजल देने के लिए डबल इंजन की सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।'

19 नवंबर को ही प्रधानमंत्री ने उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में महोबा में एक कार्यक्रम में राज्य के इस सूखे इलाके में पानी की कमी की चिंता पर वहां की जनता को यह आश्वासन दिया 'यहां की माताओं-बहनों की सबसे बड़ी मुश्किल को दूर करने के लिए, बुंदेलखंड में जल जीवन मिशन के तहत भी तेजी से काम हो रहा है। बुंदेलखंड और साथ-साथ विंध्यांचल में, पाइप से हर घर में पानी पहुंचे, इसके लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।' संभवतः इस अभियान के सकारात्मक नतीजे आने वाले कुछ महीनों में नजर आएं। गुजरात, बिहार और हिमाचल प्रदेश करीब 90 फीसदी लक्ष्य को छूने वाले राज्य हैं। पंजाब इनसे आगे खड़ा नजर आता है। पंजाब ने 90 फीसदी ग्रामीण घरों में नल जल आपूर्ति कर दी है। पंजाब का पड़ोसी हरियाणा 100 फीसदी नल जल आपूर्ति के साथ पंजाब से आगे निकल गया है। वैसे जल जीवन मिशन जैसे सामाजिक आंदोलन के तहत बच्चों के स्वास्थ्य और उनकी देखभाल पर ध्यान केंद्रित करते हुए स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों मे नल से शुद्व जल की आपूर्ति को प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जा रहा है। इसके तहत अब तक 8.33 लाख यानी 81.33 प्रतिशत स्कूलों और 8.76 लाख यानी 78.48 प्रतिशत आंगनबाड़ी केंद्रों में नल से जल की व्यवस्था कर दी गई है, जिसमें शौचालयों में नल से जल की सुविधा भी शमिल है। यूनिसेफ इंडिया के वाॅश के प्रमुख निकोलस ओस्बर्ट का मानना है कि जल जीवन मिशन विशेष तौर पर दूषित जल से होने वाली बाल मौतों को कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है। इसमें बच्चों व महिलाओं की जिंदगी को बेहतर बनाने की संभावना है।

जल जीवन मिशन अब जन आंदोलन के रूप में चलाया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के 'सबका साथ, सब का विकास, सब का विश्वास, सब का प्रयास ' विजन के सिंद्धांत का पालन करते हुए इस मिशन का आदर्श वाक्य है कि 'कोई भी छूटे नहीं' और मुल्क में हर ग्रामीण परिवार को नल के पानी का कनेक्शन दिया जाए। सिर्फ पानी ही उपलब्ध नहीं कराया जाए बल्कि पानी की गुणवत्ता पर निगरानी रखने की भी व्यवस्था की गई है। फील्ड टेस्ट किट का इस्तेमाल करके पानी की गुणवत्ता का परीक्षण करने क लिए 8.5 लाख से अधिक महिला स्ंवयसेवकों को प्रशिक्षित किया गया है। वे नमूने इकट्ठे कर पानी की गुणवत्ता का परीक्षण करते हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आपूर्ति किया जा रहा जल निर्धारित मानकों के अनुसार है या नहीं। आज, मुल्क में 2,000 से अधिक जल परीक्षण प्रयोगशालाए हैं जो पानी की गुणवत्ता का परीक्षण करने के लिए मामूली कीमत पर जनता के लिए उपलब्ध हैं। जल जीवन मिशन के तहत सरकार का लक्ष्य 2024 तक मुल्क के हर ग्रामीण घर में नल से शुद्व पेय जल पहुंचाना है। मुल्क के सुदूर-दुर्गम गांवों तक नल पेय जल पहुंचाने के लिए नवीनतम प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। हाल ही में लेह के जिला प्रशासन ने जिले के ऊंचे पर्वतीय दुर्गम और सुदूर से सुदूर इलाकों में स्थित गांवों में जल जीवन मिशन के कार्यों के वास्ते इस्तेमाल होने वाले पानी के पाइपों और अन्य सामग्री को पहुंचाने के लिए हेलीकाॅप्टर की मदद ली। जैसे-जैसे जल जीवन मिशन की रफ्तार और तेज होगी, वैसे-वैसे इस मिशन का आदर्श वाक्य' कोई भी छूटे नहीं 'चरितार्थ होने के करीब पहुंचता नजर आएगा।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

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