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अट्ठाइस साल बाद लॉर्डस पर मिली जीत के मायने

कहा जाता है कि इंग्लैंड की टीम को दूसरे मैदान पर हराओ तो अंग्रेज झेल लेते हैं परंतु लॉर्डस पर हार मिलने पर उन्हें लगता हैकि उनका बड़ा अपमान हो गया।

अट्ठाइस साल बाद लॉर्डस पर मिली जीत के मायने
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नई दिल्‍ली. क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले लॉर्डस के मैदान पर महेंद्र सिंह धौनी की कप्तानी में युवाओं से सजी भारतीय क्रिकेट टीम ने 28 साल बाद टेस्ट मैच में जीत दर्ज कर एक तरह से इतिहास रच दिया है। भारत को लॉर्डस पर यह जीत एक पीढ़ी बाद नसीब हुई है। टीम इंडिया के बारे में सबसे दिलचस्प बात यह है कि महेंद्र सिंह धौनी और विराट कोहली को छोड़कर मौजूदा ग्यारह में से नौ भारतीय खिलाड़ियों ने पहले कभी लॉर्डस के मैदान पर मैच नहीं खेला था, इनमें से दस तो लॉर्डस में मिली पिछली जीत के वक्त पैदा तक नहीं हुए थे। इसीलिए ये जीत वाकई में ऐतिहासिक मानी जा सकती है। लॉर्डस के 82 साल के क्रिकेट इतिहास में टीम इंडिया की इस मैदान पर ये सिर्फ दूसरी जीत है।

इससे पहले 1986 में कपिल देव की अगुआई में टीम इंडिया ने लॉर्डस पर पहला टेस्ट मैच जीता था। हालांकि भारत की इस जीत में पांच खिलाड़ियों भुवनेश्वर, मुरली विजय, रविंद्र जडेजा, अजिंक्य रहाणे और इशांत शर्मा की अहम भूमिका रही है। पहली पारी में अजिंक्य रहाणे ने शतक और भुवनेश्वर नेअहम 36 रन बनाकर 6 विकेट भी लिए। फिर दूसरी पारी में मुरली विजय ने लड़खड़ाती बल्लेबाजी को थामते हुए बेहद अहम 95 रन जोड़े। साथ ही रविंद्र जडेजा और भुवनेश्वर ने अर्धशतक जमाकर भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचा दी। उसके बाद इशांत शर्मा अपने कॅरियर का सर्वर्शेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 74 रन देकर सात विकेट ले भारतीय क्रिकेट टीम को जीत दिला दी। दरअसल, 2011 में जो टीम इंग्लैंड के दौरे पर गई थी उसमें सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण सहित कई स्टार क्रिकेटर थे, लेकिन भारत उस टेस्ट सीरिज को 4-0 से हार गया था।

उसी के बाद हुए ऑस्ट्रेलिया दौरे में भी भारतीय टीम को करारी हार मिली थी। उसकी तुलना में धौनी की यह टीम बिल्कुल नई है। कई खिलाड़ियों को टेस्ट मैच में खेलने का अनुभव भी नहीं है। इसके बावजूद नॉटिंघम में खेले गए पहले टेस्ट मैच में भी टीम का प्रदर्शन अच्छा रहा। कहा जाता है कि इंग्लैंड की टीम को दूसरे मैदान पर हराओ तो अंग्रेज झेल लेते हैं परंतु लॉर्डस पर हार मिलने पर उन्हें लगता हैकि उनका बड़ा अपमान हो गया। इस जीत का महत्व भारत के नजरिए से इसलिए भी खास है। पिछले तीन साल से टीम विदेशों में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रही थी। भारतीय टीम ने विदेशी सरजमीं पर इससे पहले आखिरी जीत 2011 में वेस्टइंडीज के खिलाफ दर्ज की थी। उसके बाद विदेश में लगातार 15 टेस्ट मैच हारने के बाद यह जीत मिली है।

इससे निश्चित रूप से टीम का हौसला बढ़ेगा और आने वाले तीन मैचों में दिलचस्प मुकाबला दिखेगा। इंग्लैंड की टीम भी वापसी चाहेगी, क्योंकि कुक के प्रदर्शन और कप्तानी पर सवाल खड़े होने लगे हैं। बीते दोनों टेस्ट मैच में वे कुछ खास नहीं कर पाए हैं। उन पर खुद को साबित करने का भारी दबाव है। वहीं टीम इंडिया अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखना चाहेगी। निश्चित रूप से भारतीय क्रिकेट प्रशंसक चाहेंगे कि टीम इंडिया 2011 के शर्मनाक हार का बदला ले यानी अंग्रेजों को उनकी घर में हराकर हिसाब-किताब चुकता कर वापस लौटे।

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