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हरियाणा बजट पर शंभू भद्रा की टिप्पणी : घोषणाओं का क्रियान्वयन चुनौती

बजट में आत्मनिर्भर हरियाणा का संकल्प है। बुजुर्गों की पेंशन में वृद्धि, 9वीं से 12वीं तक मुफ्त शिक्षा, आयुष्मान योजना का दायरा बढ़ाना, 20 हजार सस्ते मकान, किसानों के लिए दो नई योजनाएं, एक लाख निर्धनतम परिवारों के लिए अंत्योदय उत्थान अभियान, पुलिस पर ध्यान जैसी घोषणाएं इस बजट में की गई हैं। ग्राम दर्शन योजना से पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास है। बजटीय आवंटन सराहनीय है, लेकिन योजनाओं के लिए रोडमैप का अभाव है। सरकार अगर इस ओर ध्यान दे तो बजट से तेजी से ग्रोथ होगा। बजट घोषणाओं को अमलीजामा पहनना सरकार की असल चुनौती होगी।

हरियाणा बजट पर शंभू भद्रा की टिप्पणी : घोषणाओं का क्रियान्वयन चुनौती
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शंभू भद्रा

बजट किसी भी सरकार की हो, उसमें हमेशा इरादे नेक होते हैं, घोषणाओं से जनता को लुभाने की कोशिश होती है। असली परीक्षा तो घोषणाओं के क्रियान्वयन में होती है। हरियाणा की भाजपा-जजपा गठबंधन की सरकार ने भी अपने नए बजट में यही कोशिश की है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल वित्त मंत्री के रूप में नई छाप छोड़ने की कोशिश की है। अंत्योदय विजन के साथ हरियाणा को आत्मनिर्भर बनाने की बुनियाद इस बार के बजट में दिख रही है। कोरोना से पस्त राज्य की सरकार के लिए जनता में सुनहरे भविष्य की उम्मीद जगाना बड़ी चुनौती थी, वित्त वर्ष 2021-22 के बजट में मनोहर सरकार इस चुनौती का सामना करती दिख रही है। सरकार ने गांवों के बुनियादी ढांचे में सुधार और पंचायतों के राजस्व सृजन पर ध्यान दिया है तो शहरों की दशा में भी परिवर्तन लाने का संकल्प दिखाया है। बजट में बिजली पर मामूली सेस को छोड़कर नया कर नहीं लगा कर प्रदेशवासियों को राहत दी है। देखने वाली बात यह है कि सरकार के सामने जो चुनौतियां हैं, उनसे पार पाने की दिशा में कितना प्रयास किया गया है।

कोविड काल में वर्ष 2020 के दौरान सरकार को 12 हजार करोड़ के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ा। इसके बावजूद अब वित्त वर्ष 2021-22 के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 13 फीसदी अधिक राशि के बजट का प्रस्ताव किया है। यह साहसी कदम है। पिछला बजट 1,42,378 करोड़ रुपये का था, इस बार का बजट 1,55,645 करोड़ रुपये का है। सरकार को नए वित्त वर्ष में 3.87 फीसदी राजकोषीय घाटा का अनुमान है। पिछले वित्त वर्ष में सरकार का राजकोषीय घाटा 2.90 फीसदी रहा था। करीब डेढ़ लाख करोड़ के बजटीय प्रावधान वाले राज्य के लिए 3.87 फीसदी राजकोषीय घाटा का अनुमान बहुत ज्यादा है। इतने बड़े घाटे के साथ विकास योजनाओं को आगे ले जाना बड़ी चुनौती होगी। बजट में आत्मनिर्भर हरियाणा का संकल्प है। बुजुर्गों की पेंशन में वृद्धि, 9वीं से 12वीं तक मुफ्त शिक्षा, आयुष्मान योजना का दायरा बढ़ाना, 20 हजार सस्ते मकान, किसानों के लिए दो नई योजनाएं, पंचकूला व हिसार को स्मार्ट सिटी बनाने, एक लाख निर्धनतम परिवारों के लिए अंत्योदय उत्थान अभियान, पुलिस पर ध्यान जैसी घोषणाएं इस बजट में की गई हैं। ग्राम दर्शन योजना से पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास है।

आंकड़ों में देखा जाय तो हरियाणा समृद्ध राज्यों में शुमार है। प्रति व्यक्ति आय में भी राज्य बहुत आगे है, लेकिन इसी के साथ राज्य में बेरोजगारी दर भी देश की तुलना में सबसे अधिक है। गत दिसंबर के आंकड़े के मुताबिक हरियाणा में 32 फीसदी तो कुछेक अलग एजेंसियों के मुताबिक 28 फीसदी बेरोजगारी दर है। सरकारी आंकड़े के हिसाब से बेरोजगारी दर करीब 26 फीसदी है। सही आंकड़े जो भी हो, लेकिन सूबे में बेरोजगारी बड़ी समस्या है। सरकारी क्षेत्र में दिनोंदिन नौकरियां घटती जा रही हैं, ऐसे में बेरोजगार युवाओं के निए नए रोजागार का सृजन करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। मनोहर सरकार ने निजी क्षेत्र में स्थानीय युवाओं के लिए 75 फीसदी आरक्षण का दांव अवश्य खेला है, लेकिन निजी क्षेत्र इस पर कितना अमल करेंगे, यह देखने वाली बात होगी, क्योंकि इस फैसले पर फिक्की, सीआईआई समेत अन्य उद्योग संगठनों ने नाखुशी जताई है। इस हिसाब से मनोहर सरकार के इस बजट में रोजगार सृजन को लेकर व्यापक रोडमैप दिखना चाहिए था। पर ऐसा नहीं है।

मनोहर सरकार ने कोविड के साये वाले अपने इस बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि व संबद्ध क्षेत्र, सिंचाई, इन्फ्रास्ट्रक्चर (सड़क, रेल व एयरपोर्ट), सामाजिक कल्याण, पुलिस प्रशासन, सैन्य, पेयजल, ग्रामीण व शहरी विकास, बिजली आदि पर खास ध्यान दिया है। इन सभी क्षेत्र के लिए बजटीय आवंटन में वृद्धि की गई है। यह स्वागत योग्य है, पर चुनौतियां इन आवंटनों को योजनाओं के रूप में जमीन पर उतारने की है। एसवाईएल पर 100 करोड़ के आवंटन की घोषणा हर बजट में हो रही है, पर इस दिशा में कोई प्रगति नहीं है। ऐसे ही सरकारी अस्पतालों के इन्फ्रास्ट्रक्चर में तेजी से सुधार नहीं होते। कोविड काल में अस्पतालों में संसाधनों की कमी की पोल खुली। जबकि सरकार पिछले कई बजट से हर जिला में मेडिकल कालेज खोलने, सिविल अस्पतालों में बेड बढ़ाने, जांच उपकरण, वेंटिलेटर आदि को लेकर घोषणाएं करती रही हैं, लेकिन कोविड काल में सबने देखा कि सरकारी अस्पताल किस तरह खस्ता स्थिति में है। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी का नतीजा है कि मरीजों का बोझ चंडीगढ़ व रोहतक के पीजीआई पर है। इस बार मनोहर सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 7731 करोड़ के बजट का आवंटन किया है, लेकिन कोविड के बाद की स्थिति को देखते हुए बजटीय आवंटन कम है। इसे 15 हजार करोड़ रुपये तक किया जा सकता था। स्वास्थ्य क्षेत्र में रोजगार सृजन की भी अपार क्षमता है और राजस्व सृजन की भी। सरकार को स्वास्थ्य को रियायत सेवा बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए, मुफ्त बस गरीबों तक सीमित रखना चाहिए। इससे स्वास्थ्य सेवा को आत्मनिर्भर बनाना आसान होगा।

शिक्षा क्षेत्र में चाहे उच्च शिक्षा हो या माध्यमिक व प्राथमिक, सभी मेनपावर, बेसिक सुविधाओं से जूझ रहे हैं। इस बार अच्छी बात है कि सरकार ने 18 हजार करोड़ से अधिक का आवंटन शिक्षा क्षेत्र के लिए किया है। यह अब तक का सबसे बड़ा आवंटन है। हालांकि इसका बड़ा हिस्सा वेतन पर जाएगा, फिर भी सरकार की मंशा सुधार की लग रही है। रोजगार सृजन के लिए जरूरी है कि शिक्षा के पूरे पैटर्न को बदला जाय। अक्षर के ज्ञान से बाहर निकल कर स्किल एजुकेशन को पांचवीं के बाद से शिक्षा का केंद्र बनाना चाहिए। आज डिजिटल सेक्टर में स्किल्ड वर्कफोर्स की भारी मांग है, इसलिए हमें अपने माध्यमिक एजुकेशन को पूरी तरह स्किल्ड बेस्ड बनाना चाहिए। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी, इंटरनेट ऑफ थाउट, केटरिंग, स्मार्ट प्लंबिंग, बायोटेक्नोलॉजी, एग्रीकल्चर आदि को माध्यमिक शिक्षा का पाठ्यक्रम बनाना चाहिए। आवंटन बढ़ने का फायदा शिक्षा सुधार में दिखना चाहिए। किसान आंदोलन के साये में आए बजट में सरकार ने पिछले साल से 21 फीसदी अधिक राशि कृषि क्षेत्र के लिए दी गई है। यह अच्छा है पर सरकार कृषि सेक्टर में सहकारी खेती, राजमार्ग के किनारे एग्री मार्ट, शीत भंडारण, परंपरागत खेती में बदलाव जैसी घोषणाएं बजट में कर सकती थी। इससे सही मायने में कृषि क्षेत्र की कायापलट होती। इस क्षेत्र में रोजगार की बड़ी क्षमता है।

बजटीय आवंटन सराहनीय है, लेकिन योजनाओं के लिए रोडमैप का अभाव है। सरकार अगर इस ओर ध्यान दे तो बजट से तेजी से ग्रोथ होगा। बजट घोषणाओं को अमलीजामा पहनना सरकार की असल चुनौती होगी।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

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