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विपक्ष का सेना पर संदेह और पाक पर भरोसा

देश में पुनः बहस-मुबाहिसों का दौर बदस्तूर जारी है। गत रात को भी प्राइम-टाइम पर सर्जिकल स्ट्राइक की सर्जरी देखते हुए मन व्यथित हो गया तो सदाबहार पान गुमटी की और कदम बढ़ा लिए। पान वाले से पुरानी पहचान के चलते उसने पलक झपकते ही पान मेरे समक्ष प्रस्तुत भी कर दिया।

विपक्ष का सेना पर संदेह और पाक पर भरोसा

देश में पुनः बहस-मुबाहिसों का दौर बदस्तूर जारी है। गत रात को भी प्राइम-टाइम पर सर्जिकल स्ट्राइक की सर्जरी देखते हुए मन व्यथित हो गया तो सदाबहार पान गुमटी की और कदम बढ़ा लिए। पान वाले से पुरानी पहचान के चलते उसने पलक झपकते ही पान मेरे समक्ष प्रस्तुत भी कर दिया। गिलौरी अभी मुंह में पूरी तरह चक्कर भी नहीं लगा पाई थी कि मालवी जी का चित-परिचित हाथ मैंने अपने कांधे पर महसूस किया। उनका इस प्रकार पीछे से आ धमकना मेरे लिए सर्जिकल स्ट्राइक से कम नहीं था। मैंने कहा और सुनाइए आज महाराज को देरी कैसे हो गई आने में?

प्रवक्ताओं की तर्ज पर मेरी बात को अनसुना करते हुए वे बोले, विपक्ष हमले का हिसाब-किताब मांग रहा है और सरकार बात को टालते जा रही है। समाचार चैनल्स से प्राप्त ज्ञान कटोरे से एक चम्मच ज्ञान लपेटते हुए मैंने कहा हद कर रहे हैं। नेतागण भी अरे इन्हें अपनी सेना पर संदेह है और पाकिस्तान पर विश्वास है और उनकी छोड़िये आप ज्ञानी हो कर भी ऐसी बातें कर रहे हैं।

उनके लिए संबोधित किए ज्ञानी शब्द को पकड़ते हुए वे संयमित भाषा में बोले, देखिये सरकार पर प्रश्नचिन्ह लगा है। अब सबूत देना भी तो ज़रूरी है न, मैंने कुशल अय्यार की तरह कहा, पठानकोट के समय जब सबूत दिए तो आपके नेता बोले इन्हें सबूत देने की क्या ज़रुरत है। अब अटैक कर दिया तो यही नेता पाकिस्तान के सुर में सुर मिला कर सबूत देने की बातें कर रहे हैं, हुई की नहीं दोहरी बात।

वे आतंकवादियों की तर्ज पर आगे बढ़कर घुसपैठ करते हुए बोले, देखिये महाराज सबूतों का अपना महत्व है। राजा राम ने भी मां सीता से पवित्रता के सबूत मांगे थे और जनता-जनार्दन के दबाव से कहें या राजधर्म का अनुपालन कहें भगवन ने सबूत देने के लिए अग्निपरीक्षा ली भी थी। मैंने अपने पौराणिक ज्ञान को तर्कों के तराजू पर तोलने के बाद कहा, रघुकुल की बातें कलयुग में मत करिये।

आप और ये भी संज्ञान में रखिये कि प्रश्न पूछने वालों तथा परीक्षा लेने वाले भगवान को भी कितनी आलोचना सहनी पड़ी थी। मेरी बात से वे बैकफुट पर गए। परंतु स्प्रिंग की तरह उछल कर वापसी करते हुए बोले, आपका मतलब है कि सरकार जो कहे उसे आंख मूंद कर मान लिया जाए फिर ये प्रजातंत्र हुआ या राजशाही? मैंने कहा प्रजातंत्र ही है जो सेना की कार्यवाही के बारे में इतने सवाल किए जा रहे हैं।

भाईसाब यदि यही सवाल पड़ोसी देश में कर लिए जाते तो लाठियां भांज-भांज कर सवाल पूछने वालों की तशरीफ़ सुजा दी जाती। तशरीफ़ का जिक्र आते ही वे थोड़े संवेदनशील हो गए। पान का हिसाब उधारी रजिस्टर में लिखते हुए बोले, देशभक्त हूं इसलिए मानता हूं कि सेना कह रही है तो सही ही होगा वर्ना सरकार पर तो भरोसा बिलकुल भी नहीं है। मैंने सोचा कि सर्जिकल स्ट्राइक पर देश में यह हाल है यदि युद्ध हुआ तो सरकार दुश्मन को संभालेगी या अपनों को?

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