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योगेश कुमार सोनी का लेख : जीवन पर भारी अंधविश्वास

अंधविश्वास को लेकर कितनी ही जागरूकता भरी बातें कर लें, लेकिन इस दंश से हम अब तक भी नही उभर पाए हैं। इस होली पर भी टोने-टोटके ने लोगों की जान ले ली। दिल्ली, मेरठ, पंचकुला व बंगाल में दर्जनभर लोग अंधविश्वास की बलि चढ़े। ऐसी खबरें डिजिटल युग को मुंह चिढ़ा रही हैं। इस पूरे प्रकरण की अहम बात यह है कि इसमें आर्थिक व मानसिक रूप से कमजोर ही नहीं बल्कि शिक्षित वर्ग भी इसका शिकार हो रहा है। कुछ दिनों पहले भी पुणे से एक मामला सामने आया था जहां आईसीयू मे इलाज करा रही एक महिला के लिए किसी डॉक्टर ने तांत्रिक को बुलाकर इलाज करवाया था। इस होली पर हुई घटनाओं में मानवता को शर्मसार कर दिया।

योगेश कुमार सोनी का लेख : जीवन पर भारी अंधविश्वास
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योगेश कुमार सोनी 

योगेश कुमार सोनी

हम अंधविश्वास को लेकर कितनी ही जागरूकता भरी बातें कर लें, लेकिन इस दंश से हम अब तक भी नही उभर पाए हैं। इस होली पर भी टोने-टोटके ने लोगों की जान ली। दिल्ली, मेरठ, पंचकूला व बंगाल में दर्जनभर लोग अंधविश्वास की बलि चढ़े। ऐसी खबरें डिजिटल युग को मुंह चिढ़ा रही हैं। इस पूरे प्रकरण की अहम बात यह है कि इसमें आर्थिक व मानसिक रूप से कमजोर ही नहीं बल्कि शिक्षित वर्ग भी इसका शिकार हो रहा है। अखबार में छोटी सी खबर व चैनलों में फटाफट वाले कार्यक्रम दिखाई जाने वाली ऐसी खबरों को प्रमुखता से न दिखाएं, लेकिन मानव जीवन की अप्राकृतिक हानि की ऐसी घटनाएं बेहद चिंताजनक है। पूरे देश में तांत्रिकों का मकड़जाल फैला हुआ है। कानूनी तौर पर यह धंधा पूर्ण रूप से अवैध है, लेकिन बावजूद इसके यह बड़े स्तर पर सक्रिय है। तांत्रिकों के जाल में ऐसी विचित्र घटनाओं के तमाम उदाहरण हैं। इस होली पर जो घटनाओं में एक ने मानवता को शर्मसार कर दिया,मेरठ में एक व्यक्ति की पत्नी मानिसक रूप से अस्वस्थ थी, इस बात से परेशान उस व्यक्ति ने अपनी पत्नी को तीन दिन के लिए किसी तांत्रिक के पास छोड़ दिया जहां उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ। पूरी घटना पुलिस को पता चली तो पति समेत सबको गिरफ्तार कर लिया गया व अंत में पता चला तो वह डिप्रेशन का शिकार थी।

बीते दिनों एक तीस वर्षीय युवक एक गड्ढे में पांच दिन की समाधि लेकर अपनी आस्था का प्रदर्शन कर रहा था, लेकिन जब उसे बाहर निकाला तो मृत निकला। बात स्वाभाविक भी है कि ऐसे में व्यक्ति की जान जाना तय है, लेकिन ऐसा वो पहले भी कई बार कर चुका था लेकिन समय सीमा कम होती थी। वह पहले वर्ष एक दिन, दूसरे वर्ष 2 दिन, तीसरे वर्ष तीन दिन और चौथे वर्ष चार दिन की समाधि ले चुका था। चारों बार बेहोशी की हालात में निकाला, किस्मत अच्छी थी तो वह बच जाता था, लेकिन इस बार उसने समय अवधि को बढ़ा दिया था और जब उसे बाहर निकाला। किस्मत ने इस बार साथ नहीं दिया। गांववासियों के अनुसार चार वर्षों से इस तरह से समाधि ले रहा था। पहली बार जब समाधि ले रहा था तो पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उसे समाधि लेने से मना किया फिर भी वह नहीं माना और उसने घटना को धार्मिक आस्था से जोड़ दिया था। उसने पुजारी और बाबाओं की प्रेरणा बताकर इसे धार्मिक आस्था का रंग दे दिया था जिस वजह से पुलिस भी कार्रवाई करने से पीछे हट गई थी। इस घटना के बाद महासमुंद जिले में जिला प्रशासन ने आत्महत्या रोकने नवजीवन कार्यक्रम चलाया भी चलाया था, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। जहां एक ओर हम डिजिटल युग की तरफ इतनी तेजी से बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ऐसी घटनाएं हमें इतनी शर्मसार कर रही हैं जिससे कई बार हमें यह लगता है कि हमारी तरक्की में कोई ओर नहीं हम ही बाधा बन रहे हैं।

ज्ञात हो कि कुछ समय पूर्व दिल्ली के बुराड़ी इलाके में एक ही परिवार के ग्यारह लोगों की रहस्यमयी मौत हो गई थी। मंजर इतना खतरनाक था कि उस घटना से पूरा देश हिल गया था। हमारे देश मे आज भी लोग टाेने-टोटके जैसी चीजों पर भरपूर विश्वास करते हैं। तांत्रिकों के व्यापार का स्तर बड़े पैमाने मे कार्यरत है। यदि आप किसी लाल बत्ती पर देखोगे तो तांत्रिकों के कार्ड आपको देने के लिए लोग आ जाते हैं। मनचाहा प्यार,काम-धंधे मे बाधा,बच्चे पैदा होने मे परेशानी को दूर करना,पड़ोसी को काबू करना आदि अन्य कई मूर्खताभरी भरी बातें उनके कार्ड पर लिखी होती हैं। परेशान लोग इन धूर्तों के चक्कर मे आ जाते हैं और स्वयं अपनी जिंदगी बर्बाद कर लेते हैं। ऐसी घटनाओं से रोजाना सैकड़ों लोग पीड़ित होते हैं।

कुछ दिनों पहले भी पुणे से एक मामला सामने आया था जहां आईसीयू मे इलाज करा रही एक महिला के लिए किसी डॉक्टर ने तांत्रिक को बुलाकर इलाज करवाया था। दो दिन तक उस तांत्रिक ने कई इलाज-उपचार किए,लेकिन उसकी मौत हो गई। ऐसी कई घटनाएं हैं आपको बताने के लिए लेकिन यह अहम इसलिए है क्योंकि इस प्रकरण मे डॉक्टर था जो निश्चित तौर पर पढ़ा-लिखा ही होगा। वो भी इन टोने-टोटकों की दुनिया मे बहुत विश्वास करता है। जरा आप खुद ही सोचिए कि यदि यह लोग तांत्रिकों, बाबाओं या मुल्ला-मौलवियों पर विश्वास करेगें तो आम आदमी का क्या होगा और लोग डॉक्टर के पास न जाकर केवल इस तरह के लोगों के पास ही जाएंगे। पहले ऐसे लोगों की संख्या कम थी और यह मिथ्या केवल अशिक्षित व आर्थिक तौर से कमजोर लोगों तक सीमित थी, लेकिन अब हर वर्ग का व्यक्ति इनका शिकार होने लगा।

यह बात लोगों को आज तक समझ नहीं आई कि तांत्रिक विद्या करने वाले लोग अपना भला तो कर नहीं पाए वो दूसरों का हल कैसे निकालेंगे। कई बार तो यह भी देखा गया है कि अपनी समस्याओं का हल निकालने के लिए लोग अपने बच्चों की बलि तक भी दे देते हैं। उत्तर प्रदेश के किसी इलाके मे एक दंपत्ति ने बेटे की चाह मे तांत्रिक के कहने से अपनी तीन बेटियों की बलि तक दे डाली थी। इसके सिवाय भी ऐसे कई दर्दनाक किस्से हैं जिससे कई परिवार व जिंदगियां बर्बाद हो गई। ऐसे धंधे हमारे देश मे पूर्ण रूप से गैर-कानूनी हैं बावजूद इसके यह खूब पनप रहे हैं। यह धंधा इतने खुलेआम किस आधार पर इतने बड़े स्तर पर चल रहा है? सवाल तो कई हैं, लेकिन यदि शासन-प्रशासन से इसके विषय में पूछा जाता है तो सब कुछ गोलमोल जबाव दिया जाता है।

आखिर इस तरह का काम करने से ऐसे लोग क्या साबित करना चाहते हैं, यदि आपको भक्ति में ही लीन होना है तो इसके तमाम सुगम रास्ते हैं। दरअसल कुछ लोग ढोंगियों के चक्कर में आकर अधूरा ज्ञान व अपनी आस्थाओं का शक्ति प्रदर्शन करने के चक्कर में अपनी जान दे देते हैं। आपको और हमें ऐसी घटनाओं को रोकना होगा और लोगों को समझाना होगा कि आस्था के नाम ऐसे किसी जान जाना दुर्भाग्यपूर्ण हैं। किसी भी धर्म में मानव की बलि का निषेध है व किसी भी धार्मिक पुस्तक में ऐसा कोई जिक्र नहीं है जहां किसी भी चीज को प्राप्त करने के लिए इंसान को मरना पड़ेगा। इस होली पर जिन घटनाओं को देखा व पढ़ा,उनको देखकर ऐसा लगा कि दुखी व्यक्ति अपना भला करने के लिए कुछ भी करने को तैयार है, लेकिन वह यह भूल जाता है कि अपनी या अपनों की जिंदगी खत्म करके वह ऐसा क्या प्राप्त कर लेगा जो उसके बाद सुखी रह पाएगा। हमें यह समझना पड़ेगा कि हर किसी के जीवन में चुनौतियां होती है जिसका सामना करना करना चाहिए।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

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