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टीम मोदी में अनुभव, युवा छवि व योग्यता को तरजीह

चुनावी राज्यों का खास ध्यान रखा गया। उत्तर प्रदेश, पंजाब, गुजरात, मणिपुर आदि चुनावी राज्यों का ध्यान रखा गया है। इसके साथ ही बिहार व महाराष्ट्र को संख्या संतुलन की दृष्टि से स्थान दिया गया है। अब मोदी कैबिनेट में 4 पूर्व मुख्यमंत्री हैं, 18 पूर्व राज्य मंत्री हैं, 39 पूर्व विधायक हैं। इनमें 23 ऐसे सांसद हैं, जो 3 से ज्यादा बार लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। 46 मंत्रियों को केंद्र सरकार के साथ काम करने का अनुभव है। 13 वकील, 6 डॉक्टर और 5 इंजीनियर हैं। 7 पूर्व सिविल सर्वेंट हैं। 43 शपथ लेने वालों में 31 उच्च शिक्षित हैं। इस नई टीम की एवरेज उम्र 58 साल है। इमें भी 14 मंत्री ऐसे होंगे, जिनकी उम्र 50 साल से भी कम है।

टीम मोदी में अनुभव, युवा छवि व योग्यता को तरजीह
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संपादकीय लेख

Haribhoomi Editorial : लंबे समय से मोदी मंत्रिमंडल विस्तार अटका हुआ था। करीब एक साल पहले ही पहला विस्तार होना था, लेकिन कोरोना के चलते रुका हुआ था। अब जब कोरोना की दूसरी लहर शांत हुई है, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी दूसरी पारी के पहले मंत्रिमंडल का विस्तार किया, जिसे मेगा विस्तार कहा जा सकता है। एक साथ 43 नेता मंत्री बनाए गए। इनमें 15 कैबिनेट मंत्री बनाए गए हैं, बाकी राज्य मंत्री हैं। पीएम ने अपने कैबिनेट में व्यापक फेरबदल किया है। नियम के मुताबिक पीएम अपने कैबिनेट में 81 मंत्री रख सकते हैं। इनमें से 53 मंत्री थे। 28 नए मंत्री बनने की गुंजाइश थी, लेकिन करीब 13 मंत्रियों का इस्तीफा दिला कर पीएम ने इसे व्यापक फेरबदल इवेंट बना दिया।

मंत्रिमंडल विस्तार व फेरबदल में अनुभव, योग्यता, क्षेत्रीय संतुलन, जातिगत गणित, उम्र आदि का खास ध्यान रखा गया है। पीएम की यह सबसे युवा कैबिनेट है। चुनावी राज्यों का खास ध्यान रखा गया। उत्तर प्रदेश, पंजाब, गुजरात, मणिपुर आदि चुनावी राज्यों का ध्यान रखा गया है। इसके साथ ही बिहार व महाराष्ट्र को संख्या संतुलन की दृष्टि से स्थान दिया गया है। अब मोदी कैबिनेट में 4 पूर्व मुख्यमंत्री हैं, 18 पूर्व राज्य मंत्री हैं, 39 पूर्व विधायक हैं। इनमें 23 ऐसे सांसद हैं, जो 3 से ज्यादा बार लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। 46 मंत्रियों को केंद्र सरकार के साथ काम करने का अनुभव है। 13 वकील, 6 डॉक्टर और 5 इंजीनियर हैं। 7 पूर्व सिविल सर्वेंट हैं। 43 शपथ लेने वालों में 31 उच्च शिक्षित हैं। इस नई टीम की एवरेज उम्र 58 साल है। इमें भी 14 मंत्री ऐसे होंगे, जिनकी उम्र 50 साल से भी कम है। पांच मंत्री अल्पसंख्यक समुदाय से हैं, जिनमें 1 मुस्लिम, 1 सिख, 1 क्रिश्चियन और 2 बौद्ध हैं। 27 मंत्री ओबीसी समुदाय से हैं। इनमें से 5 कैबिनेट मंत्री बनाए गए हैं। आठ अनुसूचित जनजाति से हैं।

ये अरुणाचल, झारखंड, छत्तीसगढ़, प. बंगाल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और असम से हैं। बारह अनुसूचित जाति से हैं। ये बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, प. बंगाल, कर्नाटक, राजस्थान और तमिलनाडु से हैं। इस विस्तार में उत्तर प्रदेश को तवज्जो दी गई है। अगले विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने यूपी में ओबीसी समुदाय और महादलितों पर विशेष ध्यान दे रही है। सपा के एम-वाई समीकरण व बसपा के अगड़े दलित वोट बैंक से इतर भाजपा सवर्ण, ओबीसी व महादलितों के सोशल इंजीनियरिंग पर आगे बढ़ते दिख रही है। इस विस्तार से ऐसा ही प्रतीत हो रहा है। भाजपा ने इस बार अपने मंत्रिमंडल में भी नारी शक्ति की भागीदारी बढ़ा दी है, 11 महिलाओं को मौका दिया है। मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार बनवाने में अहम भूमिका निभाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया को कैबिनेट मंत्री बना कर इनाम दिया गया है। असम के पूर्व सीएम सर्वानंद सोनोवाल, महाराष्ट्र के पूर्व सीएम नारायण राणे, सहयोगी दलों से जेडीयू अध्यक्ष आरसीपी सिंह, अपना दल की अनुप्रिया पटेल, एलजेपी के बागी धड़े से पशुपति कुमार पारस को भी नए मंत्रिमंडल में जगह दी है। वर्तमान सात राज्य मंत्री-अनुराग ठाकुर, जे. किशन रेड्डी, मनसुख मांडविया, किरण रिजिजु, आरके सिंह, हरदीप सिंह पुरी व पुरुषोत्तम रुपला कैबिनेट मंत्री के रूप में प्रोमोट किए गए हैं, तो रविशंकर प्रसाद व प्रकाश जावड़ेकर से इस्तीफा लेना चौंकाने वाला फैसला है। डा. हर्षवर्धन, अश्विनी चौबे की विदाई लगभग तय थी। शीर्ष मंत्रालय में कोई बदलाव नहीं है, मंत्रिमंडल के चेहरे में ताजगी है, लेकिन बड़ी बात इनके प्रदर्शन की होगी। नए मंत्री कैसा काम करेंगे, कितनी स्वतंत्रता से काम करेंगे, अर्थव्यवस्था, गवर्नेंस, डेवलपमेंट और चुनावी राज्यों में मोमेंटम बनाने में कितना खरा उतरेंगे, यह वक्त ही बताएगा।

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