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बच्चों के लिए टीका और नेजल वैक्सीन से उम्मीदें

अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने 12 से 15 साल के बच्चों के लिए फाइजर-बायोएनटेक की कोरोना वैक्सीन को इजाजत दी है। अब तक यह वैक्सीन 16 साल से ज्यादा उम्र वालों को लगाई जा रही थी। इससे पहले कनाडा बच्चों की इस पहली वैक्सीन को इजाजत दे चुका है। ऐसा करने वाला दुनिया का वह पहला देश है।

बच्चों के लिए टीका और नेजल वैक्सीन से उम्मीदें
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संपादकीय लेख

Haribhoomi Editorial : बच्चों के लिए भी कोरोना की भारतीय वैक्सीन की ट्रायल सुकून देने वाली खबर है। सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन की सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स कमेटी (एसईसी) ने 2 से 18 साल उम्र वालों पर भारत बायोटेक की कोवैक्सिन के सेकेंड और थर्ड ट्रायल की मंजूरी दी है। यह ट्रायल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली, एम्स पटना और मेडिट्रिना इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज नागपुर में 525 विषयों पर किया जाएगा। अभी ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीजीसीआई) से अनुमति मिलने का इंतजार है। 24 फरवरी को हुई बैठक में प्रस्ताव पर विचार-विमर्श किया गया था और भारत बायोटेक को रिवाइज्ड क्लिनिकल ट्रायल प्रोटोकॉल पेश करने का निर्देश दिया गया था। कनाडा और अमेरिका के बाद भारत तीसरा देश होगा जहां 2 से 18 साल के एज ग्रुप के लिए भी कोरोना की स्वदेशी वैक्सीन तैयार हो जाएगी।

गत सोमवार को ही अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने 12 से 15 साल के बच्चों के लिए फाइजर-बायोएनटेक की कोरोना वैक्सीन को इजाजत दी है। अब तक यह वैक्सीन 16 साल से ज्यादा उम्र वालों को लगाई जा रही थी। इससे पहले कनाडा बच्चों की इस पहली वैक्सीन को इजाजत दे चुका है। ऐसा करने वाला दुनिया का वह पहला देश है। भारत ने एक साथ दो स्वदेशी वैक्सीन का निर्माण व उत्पादन कर विश्व में अपनी धाक जमाई थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारतीय वैक्सीन की सराहना की है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के सहयोग से भारत बायोटेक द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित कोवैक्सीन टीके का उपयोग देश में वैक्सीनेशन प्रोग्राम के लिए 18+ के लिए किया जा रहा है। ऑक्सफोर्ड व सीरम इंस्टीट्यूट की वैक्सीन कोविशील्ड भी भारत के 18+ टीकाकरण अभियान में शामिल है। हाल में ही सरकार नें रूसी वैक्सीन स्पूतनिक-4 को भारत में इस्तेमाल की मंजूरी दी है।

केंद्र सरकार का प्रयास है कि देश में टीकाकरण का अभियान तेजी से चले, ताकि कोरोना पर जल्द से जल्द काबू पाया जा सके। भारत को कम से कम अपनी 70 फीसदी का वैक्सीनेशन करना होगा, तभी हर्ड इम्यूनिटी बनेगा। देश में अब तक 17.51 करोड़ लोगों को ही वैक्सीन लगी है, लक्ष्य बड़ा है और वैक्सीन आपूर्ति में कमी की बात सामने आने लगी है। कंपनियां जरूरत के मुताबिक न ही वैक्सीन का उत्पादन कर पा रही हैं और न ही आपूर्ति। ऐसे में लक्ष्य हासिल करना कठिन होगा। इस बीच, भारत में अब नेजल वैक्सीन पर भी विचार होने लगा है, इससे तेजी से वैक्सीनेशन हो सकेगा।

नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वीके. पॉल के अनुसार, 'नेजल वैक्सीन अगर सफल हो जाती है तो यह हमारे लिए एक 'गेम चेंजर' साबित हो सकती है, क्योंकि इसे आप खुद भी ले सकते हैं।' अप्रैल में ही हैदराबाद स्थित भारत बॉयोटेक कंपनी की इंट्रानेजल वैक्सीन, बीबीवी154 के पहले चरण के परीक्षण की मंजूरी मिल चुकी है। अभी तक 175 लोगों को ट्रायल के तौर पर नेजल वैक्सीन दी जा चुकी है। कोविड-19 के अधिकांश मामलों में यह पाया गया है कि कोरोना वायरस म्यूकोसा के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है और म्यूकोसल मेमब्रेन में मौजूद कोशिकाओं और अणुओं को इन्फेक्टेड करता है। अगर हम नाक के माध्यम से वैक्सीन देंगे तो यह प्रभावी हो सकती है। इसीलिए दुनिया भर में नेजल यानी नाक के जरिए भी वैक्सीन को देने के विकल्प के बारे में सोचा जा रहा है। बच्चों के लिए टीका व नेजल वैक्सीन आने से कोरोना से मुक्ति पाने में मदद मिलेगी।

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