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भारत-अमेरिका संबंधों को मिला नया आयाम, बढ़ेंगा विश्व में कदम

भारत को अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश के सहयोग की काफी जरूरत है।

भारत-अमेरिका संबंधों को मिला नया आयाम, बढ़ेंगा विश्व में कदम

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का तीन दिवसीय दौरा कई मायनों में मील का पत्थर साबित हुआ है। इससे दोनों देशों के आपसी रिश्तों को नया आयाम तो मिला ही है, यह भी साफ हो गया है कि सबसे पुराना लोकतंत्र अमेरिका और सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत दुनिया की सूरत को बदलने की क्षमता रखते हैं। अपनी यात्रा के अंतिम दिन ओबामा ने इस बात का बखूबी जिक्र भी किया कि भारत और अमेरिका में काफी समानताएं हैं, दोनों की चुनौतियां भी एक जैसी हैं तो क्यों न हम साथ-साथ चलें। समय की मांग भी यही है।

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देखा जाए तो भारत आज जहां खड़ा है, इससे आगे बढ़ने के लिए अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश के सहयोग की काफी जरूरत है। वहीं अमेरिका को भी भारत जैसे देश की जरूरत है। यह इसलिए नहीं कि अमेरिका निर्यातक और भारत बड़ा बाजार है, बल्कि यह इसीलिए जरूरी है कि दोनों ऐसे देश हैं जहां सफल लोकतंत्र है, धार्मिक व भाषाई विविधता है, अभिव्यक्ति की आजादी है, समाज न्याय और समानता पर आधारित है। दोनों देशों में एक सशक्त संविधान है जिससे शासन व्यवस्था संचालित होती है। इससे भी अच्छी बात यह है की हर कोईअपनी मेहनत और लगन से निचले स्तर से शिखर पर पहुंच सकता है। भारत में इसके उदाहरण आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं, तो अमेरिका में राष्ट्रपति बराक ओबामा। दोनों सामान्य परिवार से आते हैं। रविवार को जब ओबामा भारत आए तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रोटोकॉल तोड़कर हवाईअड्डे पर उनके स्वागत के लिए जाना और गले लगाना इस बात का संकेत है कि भारत भी अमेरिका का हर कदम पर स्वागत करने को तैयार है।

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यह पहला अवसर था जब कोई अमेरिकी राष्ट्रपति हमारे गणतंत्र दिवस समारोह का मुख्य अतिथि बना। ओबामा पूरे समारोह के दौरान करीब दो घंटे तक खुले आसमान के नीचे रहे और भारतीय लोकतंत्र की ताकत तथा सांस्कृतिक विविधता को करीब से देखते रहे। इससे पहले भी राष्ट्राध्यक्ष भारत आते रहे हैं, लेकिन वे पूंजी निवेश, कारोबार की ही बातें करते रहे हैं। पहली बार ओबामा ने अपने संबोधनों के जरिए भारत से जुड़ने और दिल को छूने की कोशिश की है। उन्होंने यहां के मूल्यों, भाषाई-जातिगत-धार्मिक-क्षेत्रीय विविधता, गरीबी, संघर्ष का इस तरह जिक्र किया जैसे लगा कि उन्होंने भारत को आत्मसात कर लिया है। यह दोनों देशों के बदलते रिश्तों की दास्तान ही है।

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हैदराबाद हाउस में शिखर वार्ता में इसकी झलक भी दिखी। ऐतिहासिक असैन्य परमाणु करार पर छह वर्षों से जमी धूल साफ हो गई। भारत में परमाणु ऊर्जाका रास्ता साफ हो गया है। अमेरिका अजमेर, विशाखापत्तनम और इलाहाबाद को स्मार्ट सिटी के तौर पर विकसित करने में मदद करेगा। हमें नईतकनीक भी देगा। दोनों देश मिलकर रक्षा उत्पादन और रक्षा अनुसंधान करेंगे। ओबामा ने भारत के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यता के लिए पूरजोर समर्थन किया है। ओबामा-मोदी के बीच गहरी दोस्ती भी दुनिया के सामने आई है। कुल मिलाकर बराक ओबामा की यह यात्रा भारत-अमेरिकी रिश्तों की ऐसी बुनियाद तैयार कर दी है जिस पर आने वाले दिनों में दोस्ती की नई इबारत लिखी जा सकेगी।

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