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आम आदमी पार्टी के प्रति इतनी सख्ती क्यों

संपादकीय

आम आदमी पार्टी के प्रति इतनी सख्ती क्यों
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भारत एक लोकतांत्रिक देश है। यहां कदम-कदम पर सामाजिक, राजनीतिक और भौगोलिक विविधताएं देखी जा सकती हैं। एक लोकतांत्रिक देश में ही भिन्न विचारों वाले लोग सामंजस्यपूर्णक एक समाज के रूप में अस्तित्व बनाये रखते हैं। कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। संसद ने भी इस संबंध में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर रखा है। बावजूद इसके आम आदमी पार्टी के नेता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण कश्मीर में सेना की तैनाती पर वहां की जनता की राय लेने की खातिर जनमत संग्रह कराने और उस आधार पर फैसला लेने की बात करते हैं तो इसके नकारात्मक पहलुओं पर उनकी आलोचना की जानी चाहिए।हालांकि उनकी आलोचना हुई भी, देश की दो बड़ी पार्टियों कांग्रेस और भाजपा ने उनके इस बयान का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया और उन्हें आगाह किया कि इससे अलगाववादियों को शह मिलेगी।
दरअसल, कश्मीर में हालात ऐसे नहीं हैं कि वहां से सेना हटाई जा सके। पड़ोसी मुल्क में बैठीं कट्टरपंथी जमातें यही तो चाहती हैं। खुद आम आदमी पार्टी ने भी उनके बयान से किनारा कर लिया है, परंतु इसी आधार पर पार्टी के कौशांबी स्थित दफ्तर पर कुछ संगठनों ने जिस तरह से पत्थरबाजी और तोड़फोड़ जैसी हिंसक कार्रवाई की हैं, वह अलोकतांत्रिक कदम है। यदि प्रशांत भूषण ने बयान दे ही दिया तो कोई बड़ा गुनाह नहीं किया है।
ऐसा नहीं है कि इस देश में किसी ने पहली बार ऐसा बयान दिया है। यदि किसी को आपत्ति है तो शब्दों से आलोचना करनी चाहिए न कि किसी के दफ्तर में हमले किये जायें और तोड़फोड़ की जाये। किसी ने उन्हें उपद्रव फैलाने और कानून हाथ में लाने की छूट नहीं दी है। इन दिनों आम आदमी पार्टी की दिल्ली में सरकार या उनके नेताओं के प्रति राजनीतिक दल और मीडिया का एक वर्ग भी थोड़ी जल्दीबाजी में प्रतीत होता है। जिस तरह से उनके हर फैसलों की आलोचना की जा रही है, उन्हें कठघरे में खड़ा किया जा रहे है वह उचित नहीं है।
अभी दिल्ली में दस दिन सरकार बने हुआ है। उससे आसमान से तारे तोड़ लाने की उम्मीद क्यों की जा रही है? ऐसा क्यों कहा जा रहा है जो काम साठ वर्षों में नहीं हो पाये वह आप एक दिन में कर दे। एक मीडिया संस्थान स्टिंग ऑपरेशन कर रहा है कि केजरीवाल के आने के बाद भी दिल्ली सरकार के विभागों में भ्रष्टाचार जारी है। मुख्यमंत्री को कठघरे में खड़ा किया जा रहा है कि वह भ्रष्टाचार रोकने में नाकाम हो गये हैं।
आप सरकार के पास कोई जादू की छड़ी नहीं है कि आते ही बस एक झटके में सारी समस्याएं दूर हो जायेंगी। हम सब जानते हैं कि ये एक दिन में खत्म होने वाली नहीं हैं। अकेले अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी यह नहीं कर पायेगी। हम सभी को सजग होकर एकजुट होना होगा। समस्याओं के निवारण के लिए मजबूत तंत्र को खड़ा करने में वक्त लगता है। हमें थोड़ा इंतजार करना चाहिए। किसी भी सरकार की क्षमताओं को आंकने के लिए कम से कम उसे छह माह का समय तो देना ही चाहिए। आप पार्टी पर हद से ज्यादा सख्ती नहीं दिखाई जानी चाहिए। जिन लोगों ने भी आप के दफ्तर पर हमला बोला है,तोड़फोड़ की है, उनकी पहचान कर सख्त सजा दी जानी चाहिए।

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