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भारतीय योग दर्शन की कायल हुई दुनिया

संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव का 177 सदस्य देशों ने सर्मथन किया था, जिसमें कई मुस्लिम देश भी शामिल हैं।

भारतीय योग दर्शन की कायल हुई दुनिया

पहले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को अभूतपूर्व सफलता मिली है। इस दिन को एक ऐतिहासिक अवसर के रूप में याद किया जाएगा। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के राजपथ पर जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित करीब 40 हजार लोगों ने एक साथ योग की विभिन्न मुद्राओं का अभ्यास किया, वहीं देश-विदेश के विभिन्न हिस्सों में भी अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध के मैदान सियाचिन में जवानों ने योग आसन किया। वहीं युद्धपोतों व हवाई जहाजों पर भी योग कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसके अलावा दुनिया के 192 देशों के दो सौ से भी अधिक शहरों में योग दिवस मनाया गया। यह दुनिया में योग का सबसे बड़ा आयोजन साबित हुआ है, जिससे साबित होता है कि भारतीय परंपरा से निकले योग दर्शन की ओर दुनिया खींची चली आ रही है। इसके प्रति आकर्षण की वजह भी है। दरअसल, आज के दौर में योग ही एक ऐसा दर्शन है, जिससे मानव अपनी सारी समस्याओं का निदान कर सकता है। हालांकि विश्व में योग के बारे में कई तरह की भ्रांतियां फैल गई हैं। उन्हें दूर करना भारत का कर्त्तव्य बनता है। योग सिर्फ आसान और मुद्राओं तक सीमित नहीं है। यह एक आदर्श जीवन शैली है, जो मानवीय उत्थान की ओर ले जाती है। योग और ध्यान न केवल हमारा स्वास्थ्य संवर्धन करते हैं बल्कि हमें आंतरिक और मानसिक बल भी प्रदान करते हैं। योग मस्तिष्क और शरीर, विचारों और क्रिया, संयम और पूर्णता, मानव और प्रकृति के बीच सद्भाव का समागम है, यह स्वास्थ्य और कल्याण के लिए समग्र पहल प्रदान करता है। यह लोगों को अपने आस-पास की जिंदगी के प्रति सजग बनाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर ठीक कहा हैकि योग जीवन को जीभर जी लेने की जड़ीबूटी है। यह मन, बुद्धि और आत्मा को संतुलित करता है, जिससे व्यक्ति के जीवन में प्रेम, शांति और एकता के भाव उत्पन्न होते हैं। इसलिए लोगों को योग को एक जीवन पद्धति की तरह स्वीकारना चाहिए। यह किसी धर्म व संप्रदाय का भी अंग नहीं है। लोग यदि योग को समझ लेंगे और उसे महसूस कर लेंगे तो दुनिया में खासा बदलाव आ जाएगा। बीते साल जिस तरह से 21 जून को हर वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र महासभा की ओर से मंजूरी दी गई थी। उससे देश की प्राचीन विद्या योग को वैश्विक मान्यता मिली थी। सबसे खुशी की बात ये भी थी कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव का 177 सदस्य देशों ने सर्मथन किया था, जिसमें कई मुस्लिम देश भी शामिल हैं। इससे पहले इतने भारी सर्मथन के साथ महासभा में कोई प्रस्ताव पारित नहीं हुआ था। इतना ही नहीं संयुक्त राष्ट्र में दूसरा रिकॉर्ड 90 दिन में किसी देश के प्रस्ताव को पेश करके उसे लागू कराने का भी बना था। संयुक्त राष्ट्र ने भी माना है कि योग स्वास्थ्य के लिए आवश्यक सभी जरूरी ऊर्जा प्रदान करता है। जब सारा विश्व इसकी ओर आकर्षित हो रहा है तब उम्मीद की जानी चाहिए कि भारत की प्राचीन परंपरा से निकला योग मानव कल्याण के रास्ते से भटकी हुई दुनिया को वापस उस पथ पर लाने में मददगार साबित होगा।

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