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चिंतन: महिलाओं को आत्मनिर्भर व सशक्त बनाना जरूरी

आज भी परंपरा, रिवाज, संस्कृति, आडंबर के नाम पर लगभग सभी समुदायों की औरतों पर तरह-तरह की पाबंदियां व बेड़ियां हैं।

चिंतन: महिलाओं को आत्मनिर्भर व सशक्त बनाना जरूरी
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हर क्षेत्र में कामयाबी की दस्तक के बावजूद महिलाओं की 'स्वतंत्र पहचान' अभी भी दुनिया भर में एक बड़ा सवाल है। बेशक हम अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाएं, लेकिन समूचे विश्व में औरतों की सामाजिक और आर्थिक आजादी अभी अधूरी है। लगातार संघर्ष के बाद दुनिया के अधिकांश देशों में महिलाओं को वोट देने व चुनाव लड़ने के राजनीतिक अधिकार जरूर मिले हैं, लेकिन उनकी सामाजिक, सांस्कृतिक व आर्थिक स्थिति में बहुत बदलाव नहीं आए हैं। खाड़ी, मध्य एशिया और अफ्रीकी क्षेत्र के कुछेक देशों में तो आज भी महिलाओं को वोट देने व चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं है। यह विडंबना उस दौर में है, जब महिलाएं अंतरिक्ष की यात्राएं कर रही हैं। आज भी परंपरा, रिवाज, संस्कृति, आडंबर के नाम पर लगभग सभी समुदायों की औरतों पर तरह-तरह की पाबंदियां व बेड़ियां हैं और उनका शोषण होता है। यूरोपीय, अमेरिकी देशों में महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक स्थिति बाकी दुनिया की अपेक्षा थोड़ी बेहतर है। एशिया और अफ्रीका में महिलाएं बहुत पीछे हैं। इसकी वजह मानी जा रही है कि विश्व के जिन देशों में सरकारों ने महिलाओं की शिक्षा पर अधिक ध्यान दिया, वहां उनकी स्थिति बेहतर है। भारत में महिलाओं को बराबरी का संवैधानिक व कानूनी अधिकार है, जिसमें उन्हें वोट देने चुनाव लड़ने और संपत्ति में हक है, लेकिन उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति बहुत ही खराब है। आज जब हम अंतराष्ट्रीय महिला दिवस मना रहे हैं, तब देश में महिलाओं की स्थिति पर गौर करते हैं, तो पाते हैं कि हमारा समाज पुरुष प्रधान है। बेटों को हर तरह की आजादी है, जबकि बेटियों पर कई तरह की बंदिशें हैं। उनके कपड़े पहनने, उठने-बैठने, मोबाइल-नेट यूज, घर से बाहर निकलने जैसी चीजों पर पहरे हैं। उनके लिए तरह-तरह के बेतुके फतवे व फरमान जारी होते रहते हैं। उनकी शिक्षा व स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान नहीं है। बेटियों को पैदा होने से ही रोकने की कोशिश होती है। दहेज प्रथा, घरेलू हिंसा व यौन उत्पीड़न की शिकार होती हैं। उन्हें कभी डायन तो कभी चुड़ैल कह कर मारा-पीटा जाता है। हमारे यहां महिलाएं घर से लेकर वर्क प्लेस व बाजार तक सुरक्षित नहीं हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के मुताबिक महिलाओं के खिलाफ सबसे अधिक यौन हिंसा के मामले होते हैं, देश में जबकि कानूनों की भरमार है। दूसरी तरफ जिन बेटियों को प्रतिभा साबित करने का अवसर मिल रहा है, वे हर क्षेत्र में सफलता की बुलंदियों की इबारत लिख रही हैं। साहित्य, विज्ञान, राजनीति, खेल, फिल्म, प्रशासन सभी क्षेत्र में महिलाओं ने मुकाम हासिल किया है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा भी है कि महिलाओं को घर और वर्क प्लेस पर पसंद का काम करने का मौका मिलना चाहिए। प्रणब ने महिला आरक्षण बिल जल्द पास करने की अपील की है। सरकार ने इस पर सहमति बनाने की बात कही है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने औरतों के खिलाफ अपराध रोकने के लिए नेशनल इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम बनाने का ऐलान किया है। लेकिन समाज और सरकार के स्तर पर महिलाओं को सशक्त व आत्मनिर्भर बनाने और मौके देने की जरूरत है।
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