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चिंतन: आतंरिक सुरक्षा को पुख्ता करने की पहल सराहनीय

जम्मू एवं कश्मीर में आरक्षी तथा चतुर्थ श्रेणी के पद पर 60 फीसदी लोगों की भर्ती सीमाई जिले से होगी।

चिंतन: आतंरिक सुरक्षा को पुख्ता करने की पहल सराहनीय
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देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौती बन रहे आतंकवाद और नक्सलवाद से निपटने के लिए 17 नई इंडियन रिर्जव बटालियन (आईआरबी) का गठन केंद्र सरकार का बड़ा फैसला है। चूंकि बाह्य के साथ-साथ आंतरिक सुरक्षा मोदी सरकार की प्राथमिकता में है, इसलिए आतंकवाद और नक्सल प्रभावित राज्यों में शांति व्यवस्था कायम करने के लिए केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
मोदी कैबिनेट ने 17 नई रिर्जव बटालियन बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इन 17 में से जम्मू-कश्मीर में पांच, छत्तीसगढ़ में चार, झारखंड में तीन, ओडिशा में तीन और महाराष्ट्र में दो बटालियनें बनाई जाएंगी। अब जम्मू-कश्मीर और दूसरे नक्सल प्रभावित राज्यों में किसी भी 'ऑपरेशन' की जिम्मेदारी इन्हीं बटालियन की होगी। हर बटालियन में 1000 जवान होते हैं, इस लिहाज से 17000 नए जवानों की भर्ती होगी। नई बटालियनों के लिए उम्र व शैक्षणिक योग्यता में छूट प्रदान कर स्थानीय युवकों की भर्ती की जाएगी।
जम्मू एवं कश्मीर में आरक्षी तथा चतुर्थ श्रेणी के पद पर 60 फीसदी लोगों की भर्ती सीमाई जिले से होगी। नक्सलवाद से पीड़ित राज्यों के लिए सुरक्षा संबंधी खर्च (एसआरई) योजना के तहत 75 फीसदी भर्ती बुरी तरह प्रभावित 27 जिलों से होगी। रिर्जव बटालियनों के गठन की योजना 1971 में शुरू की गई थी और इसके बाद से 153 बटालियनों के गठन को मंजूरी दी गई है जिनमें से 144 का गठन किया जा चुका है। नई बटालियनों के गठन की मांग लंबे समय से की जा रही थी।
खासकर नक्सल इलाके में ऑपरेशन के दौरान भारी संख्या में जवानों के मारे जाने के बाद अलग से नई बटालियन बनाने की मांग की जा रही थी। इस तरह के ऑपरेशन के लिए प्रशिक्षित जवानों की कमी महसूस की जा रही थी। इधर हाल के दिनों में जम्मू-कश्मीर में सीमा पार आतंकवाद की समस्या लगातार बढ़ी है और नक्सलियों ने भी काफी समस्या बढ़ाई है। बीते वर्ष हुए नक्सली हमलों में सुरक्षाबल के सैकड़ों जवान शहीद हो चुके हैं।
आज आठ राज्य-छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, झारखंड, बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश नक्सलवाद से सबसे अधिक प्रभावित हैं। आंध्र से लेकर बंगाल तक नक्सल प्रभावित क्षेत्र 'लाल गलियारा' के नाम से जाना जाता है। इस रूट पर कभी डेढ़ सौ जिले नक्सली चपेट में हैं। दरअसल जब तक देश में शांतिपूर्ण माहौल नहीं होगा, तब तक विकास को गति नहीं दी जा सकती है। निजी और विदेशी पूंजी निवेश भी शांत व सुरक्षित माहौल में ही होता है। अशांत क्षेत्रों में विकास योजनाओं का संचालन कठिन होता है।
जम्मू-कश्मीर वर्षों से अशांत है, यहां आतंकवाद के चलते हमेशा भय का माहौल बना रहता है। इस मायने में नई बटालियनों के गठन से जहां सुरक्षा बलों की ताकत बढ़ेगी, वहीं आतंकवाद व नक्सल प्रभावित क्षेत्र में विकास को भी गति मिलेगी। इसके साथ ही युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। आतंरिक सुरक्षा के क्षेत्र में सरकार की यह पहल सराहनीय है, लेकिन केवल इससे ही काम नहीं चलेगा। सरकार को प्राथमिकता के आधार पर लंबित 'पुलिस सुधार' पर भी ध्यान देना चाहिए।
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