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शीर्ष नौकरशाही को मोदी सरकार का सख्त संदेश

केंद्र सरकार ने उनके कामकाज के घंटों में भी बढ़ोतरी की है।

शीर्ष नौकरशाही को मोदी सरकार का सख्त संदेश
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सारधा चिटफंड घोटाले के आरोपी पूर्व केंद्रीय मंत्री मतंग सिंह की गिरफ्तारी में अडंगा लगाने पर केंद्रीय गृह सचिव अनिल गोस्वामी को केंद्र की मोदी सरकार ने तत्काल प्रभाव से हटाकर नौकरशाहों और कर्मचारियों को साफ संकेत दे दिए हैं कि वह भ्रष्टाचार को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं करेगी। दरअसल, गोस्वामी ने मतंग सिंह की गिरफ्तारी टालने के लिए सीबीआई के अधिकारियों को फोन किया था। उन्होंने इस बात को स्वयं गृहमंत्री राजनाथ सिंह के समक्ष स्वीकार भी ली। उसके बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति वाली मोदी सरकार द्वारा सारधा चिटफंड घोटाले की जांच में अपने वरिष्ठ अधिकारी की अड़गेबाजी को गंभीरता से लेना स्वाभाविक था।

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सारधा चिटफंड घोटाले के तार पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम तक जुड़े हैं। इसमें लाखों गरीबों की गाढ़ी कमाई का कुछ लोगों ने जमकर अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया है। इसकी वजह से पश्चिम बंगाल की राजनीति में भूचाल आया है। तृणमूल कांग्रेस के कई बड़े नेता इसमें आरोपी बने हैं। साथ ही उनके कई सांसदों की गिरफ्तारी भी हुई है। बहरहाल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता संभालने के साथ ही साफ कर दिया था कि शासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और शुचिता लाना उनकी प्राथमिकता रहेगी। इसके लिए उन्होंने अपने मंत्रियों सहित नौकरशाहों और कर्मचारियों तक के लिए कार्यप्रणाली का निर्धारण किया है।

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मंत्रियों और पार्टी के सांसदों को जहां हिदायती दी गई कि वे अपने पीए या पीएस के रूप में परिवार या रिश्तेदार के सदस्य को न रखें, सरकारी ठेकों को खुद या अपने रिश्तेदार की कंपनी को न दें और अपनी संपत्ति को नियमित अंतराल पर सार्वजनिक करें। नौकरशाहों के संबंध में मोदी सरकार ने उनकी सेवा से संबंधित नियमावली में संशोधन कर कई नए मानक जोड़े हैं। उनमें कहा गया है कि सरकारी कर्मचारी और अधिकारी राजनीति से परे रह कर नैतिक मापदंड स्थापित करें। और वे सत्यनिष्ठा, ईमानदारी, कर्त्तव्य में निष्पक्षता और खास तौर पर कमजोर वर्गों के लिए काम करें, आम लोगों के साथ शालीनता से पेश आएं और लोगों से अच्छा व्यवहार करें। ऐसा नौकरशाही को आम लोगों के प्रति अधिक से अधिक जवाबदेह बनाने की प्रक्रिया के तहत किया गया है।

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केंद्र सरकार ने उनके कामकाज के घंटों में भी बढ़ोतरी की है। वहीं सभी अधिकारियों को अपनी संपत्ति की घोषणा करना भी अनिवार्य बनाया गया है। निचले स्तर के कर्मचारियों को भी जवाबदेह बनाने के लिए केंद्र के तमाम मंत्रालयों और विभागों में बायोमीट्रिक अटेंडेंस सिस्टम लगाई गई। इससे उनकी उपस्थिति में वृद्धि आई है। और कर्मचारी देर तक दफ्तर में रह रहे हैं। इसका उद्देश्य शासन में पारदर्शिता लाना और अधिकारियों के कार्य व व्यवहार में बदलाव लाना है। इसमें कोईदो राय नहीं कि नौकरशाही अपने उद्देश्यों से भटक गई है। यूपीए सरकार के कार्यकाल में नौकरशाहों के मनमाने रवैये की खबरें आती रहती थीं। नौकरशाह और सरकारी कर्मचारी किस हद तक भ्रष्टाचार में लिप्त हैं यह भी किसी से छिपा नहीं है। ये अपने पावर का गलत इस्तेमाल न करें, लिहाजा इन पर लगाम लगाने की सख्त जरूरत है। अनिल गोस्वामी पर सख्त रुख अपना कर मोदी सरकार ने साफ कर दिया है कि उसका भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस सिर्फ दिखावा नहीं है।

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