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बदहाल रेलवे को पटरी पर लाने की कवायद

लोगों के लिए नई सुविधाओं के साथ ही पुरानी सुविधाओं को बेहतर बनाए जाने की भी घोषणा की गई है।

बदहाल रेलवे को पटरी पर लाने की कवायद
केंद्रीय रेलमंत्री सदानंद गौड़ा ने अपने पहले रेल बजट में भारतीय रेल की तस्वीर का पूरा ब्योरा देश के समक्ष रखा है। उन्होंने स्पष्ट करने का प्रयास किया है कि उन्हें विरासत में कैसी रेल मिली है और उसकी माली हालत क्या है? साथ ही उसे फिर से पटरी पर लाने और आम आदमी के लिए सुविधाओं का विस्तार करने के साथ-साथ सुरक्षा सुनिश्चित करने का खाका भी रखा है। मसलन रेल बजट में मुख्य जोर सुरक्षा, योजनाओं का समय पर निष्पादन, यात्री सुविधाओं (खाना, सफाई, स्वच्छता और शौचालय), वित्तीय अनुशासन, संसाधान जुटाने, सूचना तकनीक का प्रयोग और पारदर्शिता व बेहतर कार्यप्रणाली पर है।
रेलमंत्री ने रेलवे को भारतीय अर्थव्यवस्था की आत्मा कहा है। देखा जाए तो यह तमाम बाधाओं के बाद भी यह पूरे देश को जोड़ती है। यह ऑस्ट्रेलिया जितनी आबादी के बराबर रोजाना यात्रियों को ढोती है। अभी हालत यह हैकि रेलवे को एक रुपया कमाने के लिए 94 पैसा खर्चकरना पड़ता है। यही वजह हैकि हर साल भारत सरकार इसके घाटे को पूरा करने के लिए करोड़ों रुपये सब्सिडी के रूप में देती है। पिछले 9 साल में 99 योजनाओं का ऐलान किया गया, लेकिन सिर्फ एक योजना पर काम हो रहा है। कुछ तो 30 साल से लंबित हैं। कुल 359 लंबित परियोजनाओं को पूरा करने के लिए 1.82 लाख करोड़ रुपए चाहिए लेकिन इसके लिए संसाधन कहां से आएंगे। लिहाजा रेल मंत्री ने रेलवे परिचालन को छोड़कर अन्य क्षेत्रों में विदेशी निवेश लाने का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही पीपीपी के जरिए भी रेलवे के विकास पर जोर देने की बात कही है।
रेलवे को विश्वस्तरीय बनाने के लिए भारत में भी बुलेट ट्रेन की नींव बजट में रख दी है। देश में पहली बुलेट ट्रेन मुंबई-अहमदाबाद के बीच चलाने और नौ रूटों पर हाईस्पीड ट्रेनें चलाने का प्रस्ताव है। इसमें कोई दो राय नहीं कि आज देश को हाईस्पीड ट्रेन की जरूरत है। हालांकि कई लोग यह भी कह रहे हैं कि सरकार को पहले रेलवे की बुनियादी समस्याओं को दूर करनी चाहिए। उसके बाद ही इस पर आगे बढ़ा जाए तो बेहतर होगा। इस बार बजट में किसी तरह का किराया नहीं बढ़ा है। दरअसल, सरकार ने बजट से पूर्व ही यात्री और माल भाड़े में भारी बढ़ोतरी कर दी थी, लिहाजा बजट में इसमें वृद्धि की उम्मीद कम थी। यात्रियों की रेलवे से एक शिकायत रहती हैकि किराए बढ़ रहे हैं पर उस अनुपात में सुविधाएं नदारद हैं। मोदी सरकार के पहले रेल बजट में उम्मीद के मुताबिक यात्री सुविधाओं पर काफी जोर दिया गया है।
लोगों के लिए नई सुविधाओं के साथ ही पुरानी सुविधाओं को बेहतर बनाए जाने की भी घोषणा की गई है। जैसे ट्रेनों में ब्रांडेड कंपनियों का खाना चरणबद्ध तरीके से शुरू करने, रेडी टू फूड योजना लाने की तैयारी, आरओ का साफ पानी मुहैया कराने, स्टेशनों को साफ-सुथरा बनाने के लिए निजी सेक्टर को मौका देने, टिकट बुकिंग सुविधा का विस्तार करने के प्रस्ताव का स्वागत होना चाहिए। रेलवे में सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा रहा है। चलती ट्रेन में चोरी की घटनाएं और हर हफ्ते हो रहे ट्रेन हादसे यात्रियों के लिए चिंता का सबब बने हुए हैं। इसके लिए रेल मंत्री ने बजट में 21 हजार आरपीएफ जवानों की भर्ती और ट्रेनों को कई आधुनिक तकनीक से लैस करने की घोषणा की है। कुल मिलाकर रेलवे को फिर से पटरी पर लाने की बजट में एक कोशिश दिखती है। हालांकि रेलमंत्री इन घोषणाओं को कैसे और कितनी तेजी से अमल में लाते हैं इस पर भी बहुत कुछ निर्भर करेगा।
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