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पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास पर प्रधानमंत्री का जोर

पूर्वोत्तर राज्यों के पास प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक संपदा है लेकिन यहां के प्राकृतिक संसाधनों का भी सही उपयोग नहीं हुआ है।

पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास पर प्रधानमंत्री का जोर
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संबोधनों में एक बात हमेशा कहते रहे हैं कि देश का पूर्वोत्तर छोर हर लिहाज से कमजोर है। तथ्य भी इसकी पुष्टि करते हैं। ऐसा नहीं है कि वहां अवसर और संसाधनों का अभाव है, बल्कि इसकी वजह राजनीतिक, खासकर सरकारों की लंबे दौर की, उदासीनता रही है। इस भाग पर जितना ध्यान दिया जाना चाहिए था उतना नहीं दिया गया। यह इसी से साबित होता है कि यूपीए के दस साल के शासन में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस क्षेत्र का दौरा करने से बचते रहे। आज सामाजिक-आर्थिक विकास के कई मानकों पर पूर्वोत्तर राज्य शेष भारत के मुकाबले काफी पिछडेÞ दिखाई देते हैं। अभी भी बड़ा हिस्सा रेलवे की पहुंच से अछूता है। सड़क और हवाई यातायात का भी विकास जरूरत के अनुसार नहीं हो पाया है।
पूर्व की सरकारें वहां की विशेषताओं को ध्यान में रखकर रोजगार के साधन विकसित करने में असफल रहीं जिसके परिणामस्वरूप पूरा पूर्वोत्तर क्षेत्र भयानक पलायन का शिकार है। इन क्षेत्रों में न तो उत्कृष्ट विश्वविद्यालयों व अन्य संस्थानों की स्थापना की जा सकी, जिससे पूर्वोत्तर को शिक्षा के केंद्र में बदला जा सके और न ही कृषि के विकास पर ध्यान दिया जा सका, जबकि यहां हर्र्बल कृषि की असीम संभावनाएं मौजूद हैं।
पूर्वोत्तर राज्यों के पास प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक संपदा है, लेकिन यहां के प्राकृतिक संसाधनों का भी सही उपयोग नहीं हुआ है। इन्हीं सब कारणों से पूर्वोत्तर राज्य खुद को शेष भारत से कटा हुआ महसूस करते हैं। इसका दुष्परिणाम यह हुआ है कि असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा में उपद्रवियों को सिर उठाने का अवसर मिल गया। ये जब ना तब पूर्वोत्तर की धरती को लहूलुहान करते रहे हैं। आज आलम यह है कि देश की सुरक्षा के लिए भी ये गंभीर खतरा बन गए हैं। इन्हें खत्म करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा सेना को अतिरिक्त अधिकार तक देने पड़े हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पूर्वोत्तर राज्यों की चार दिवसीय यात्रा काफी मायने रखती है।
इस दौरान उन्होंने कई योजनाओं की आधारशिला रखने के साथ-साथ अपनी भावी योजनाओं की रूपरेखा भी प्रस्तुत की। उन्होंने मणिपुर की पहली पैसेंजर ट्रेन को हरीझंडी दिखाने के साथ ही करीब चौदह नई रेल लाइनें बिछाने, मणिपुर में ही कृषि विश्वविद्यालय और देश का पहला खेल विश्वविद्यालय बनाने, पूर्वोत्तर के छात्रों के लिए विशेष स्कॉलरशिप योजना का ऐलान भी किया। पूर्वोत्तर क्षेत्र में बिजली और बांग्लादेश के नागरिकों की घुसपैठ की समस्या को दूर करने का भी भरोसा दिलाया। इसके अलावा वे मणिपुर के संगाई महोत्सव और नागालैंड के हॉर्नबिल फेस्टिबल में शरीक होकर राज्यों की जनता से भावनात्मक रूप से भी जुड़ाव कायम करते दिखे।
इस अवसर पर वे नागा जवानों की तारीफ करना नहीं भूले। साथ ही पूरे क्षेत्र को नेचुरल इकोनॉमिक जोन बता वहां की जैव विविधता और मौसम की अच्छाइयों को उभारते भी दिखे। पूर्वोत्तर में पर्यटन की काफी संभावनाएं हैं। यहां कनेक्टिविटी और अन्य बुनियादी सुविधाएं जुटाने से पर्यटन बढ़ेगा, जो पूर्वोत्तर में बड़े बदलाव का वाहक बन सकता है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि नरेंद्र मोदी कहते ही नहीं, बल्कि करते भी हैं।
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