Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

कश्मीर पर पाक ने फिर जाहिर की नापाक मंशा

पाकिस्तान की विदेश नीति का निर्धारण सेना ही करती है।

कश्मीर पर पाक ने फिर जाहिर की नापाक मंशा
X

राष्टमंडल संसदीय एसोसिएशन (सीपीए) की बैठक में जम्मू-कश्मीर विधानसभा अध्यक्ष को नहीं बुलाए जाने का निर्णय कर पाकिस्तान ने अपनी नापाक मंशा जाहिर कर दी है। वह कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर से हवा देने की कोशिश कर रहा है। इससे स्पष्ट हो जाता हैकि गत माह रूस के शहर उफा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बीच हुई बातचीत में दोनों देशों में फिर से वार्ताशुरू करने की सहमति पाकिस्तान की सेना, आईएसआई और कट्टरपंथी जमातों को रास नहीं आई।

इसके चलते इसी महीने दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की नई दिल्ली में प्रस्तावित बैठक से ठीक पहले इस्लामाबाद के नए-नए पैंतरे सामने आ रहे हैं। कभी वह अपने वादों से मुकर रहा है, तो कभी कह रहा हैकि बिना कश्मीर के मुद्दे को वह भारत से वार्तानहीं करेगा, तो कभी आतंकवादियों की घुसपैठ करा भारत में हमले करवा रहा है, तो कभी सीमा पर संघर्ष विराम का उल्लंघन कर निदरेष भारतीय नागरिकों की जान ले रहा है। पिछले छह दशक से वह कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने की नाकाम कोशिश कर रहा है।

अभी तक उसे इसमें सफलता नहीं मिली है, लेकिन वह अपनी फितरत से बाज नहीं आ रहा है। इस बार तो उसने अंतरराष्ट्रीय शिष्टाचार को भी ताक पर रख दिया है। वह अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं पर अपनी विदेश नीति नहीं थोप सकता। इधर भारत ने भी कड़ा रुख दिखाते हुए साफ कर दिया है कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा अध्यक्ष को नहीं बुलाया गया, तो वह इस सम्मेलन का बहिष्कार करेगा। दरअसल, 30 सितंबर से आठ अक्टूबर तक पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। ऊपर से पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सरताज अजिज कुतर्क दे रहे हैं कि जम्मू-कश्मीर विवादित क्षेत्र है, लिहाजा विधानसभा के अध्यक्ष को बैठक में शामिल होने का न्योता नहीं दिया है।

उन्हें याद रखना चाहिए कि 2007 में इस्लामाबाद में आयोजित हुए तीसरे एशिया और भारत क्षेत्रीय राष्ट्रमंडल संसदीय संघ सम्मेलन में पाकिस्तान की सीपीए शाखा ने जम्मू-कश्मीर को आमंत्रित किया था और राज्य के तीन प्रतिनिधि शामिल भी हुए थे। सीपीए की स्थापना 1911 में हुई थी। इसका मुख्यालय लंदन में है। इसके 53 सदस्य देश हैं। हर साल सीपीए की बैठक होती है। पाक को नहीं भूलना चाहिए कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। ऐसे में उसे भारत की संप्रभुता को चुनौती देने वाले कदमों से बाज आना चाहिए। भारत को उकसाने वाली जिस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं उससे साफ हो गया हैकि वहां तीन शक्तियां काम करती हैं। पहली, वहां की चुनी हुई सरकार है। दूसरी, सेना व आईएसआई है।

पाकिस्तान की विदेश नीति का निर्धारण सेना ही करती है। उसकी र्मजी के बिना नवाज शरीफ एक कदम भी नहीं बढ़ सकते। तीसरी शक्ति वहां की कट्टरपंथी जमातें हैं। दोनों देशों में वार्ता का माहौल बनने से सेना व कट्टरपंथी कश्मीर का राग अलापने लगे हैं और जिसके बाद पाक सरकार भी दबाव में आ गई है। जाहिर है, पाकिस्तान के अंदर जब तक यह समस्या रहेगी, भारत के साथ रिश्ते सामान्य होने की संभावना पर आशंका के बादल मंडराते रहेंगे।

खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि, हमें फॉलो करें ट्विटर और पिंटरेस्‍ट पर-

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story
Top