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उम्मीद जगाता शुरुआती एक महीने का कामकाज

मोदी सरकार ने आधुनिकीकरण की बाट जोह रहे रक्षा क्षेत्र की जरूरतों को भी पूरा करने की तरफ कदम बढ़ाया है।

उम्मीद जगाता शुरुआती एक महीने का कामकाज
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केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार ने एक महीने पूरे कर लिए हैं। इतने कम समय में किसी सरकार के कामकाज का आकलन नहीं किया जाना चाहिए बल्कि समीक्षा के लिए छह माह का समय उपयुक्त माना जाता रहा है। हालांकि कुछ विवादों को छोड़ दें तो कुल मिलाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली राजग सरकार की शुरुआत अच्छी है। और उम्मीद जगाती है। शपथ-ग्रहण के बाद पहले ही दिन मोदी दक्षेस देशों के राष्ट्रप्रमुखों से मिले, एक दूसरे की चिंताओं को साझा किया, जिसमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भी शामिल हुए थे। प्रधानमंत्री के रूप में अपनी पहली विदेश यात्रा में भूटान जाना भी बहुत मायने रखता है, वहीं विदेश मंत्री भी इन दिनों पहले विदेश दौरे पर बांग्लादेश में हैं।
नई सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि पड़ोसियों से रिश्ते को मजबूत कर उन्हें नई दिशा देना उसकी प्राथमिकता होगी। यहां मोदी सरकार ने एक सफल विदेश नीति का परिचय दिया है। प्रधानमंत्री ने मंत्रिमंडल में शामिल सभी मंत्रियों को स्पष्ट हिदायत दी है कि वे पर्सनल असिस्टेंट या पर्सनल सेकेट्ररी के रूप में अपने रिश्तेदारों को ना रखें। साथ ही सरकार की ओर से जो ठेके जारी होते हैं उनमें भी उनका कोईरिश्तेदार दिखाई नहीं देना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने सभी विभागों के सचिवों के साथ बैठक कर सीधे आदेश दिए कि वे मजबूती से निर्णय लें। यदि वे सही मंशा के साथ देशहित में फैसला लेते हैं तो सरकार उनके साथ होगी। उन्हें कोईशिकायत हो तो उनको सीधे फोन करें या ई-मेल लिखें। इस तरह उन्होंने नौकरशाही में छाई निराशा को दूर करने के प्रयास किए। वहीं जहां देशहित में कड़े फैसले लेने की जरूरत आई वहां उन्होंने फैसले लिए जैसे रेल किराये में बढ़ोतरी। कई लोग आरोप लगा रहे हैं कि सरकार महंगाईके लिए कुछ नहीं कर रही है। जबकि नरेंद्र मोदी ने अब तक इस मुद्दे के उचित समाधान के लिए संबंधित विभागों के मंत्रियों के साथ तीन बैठकें कर चुके हैं।
यह सच है कि महंगाई रोकना सिर्फ केंद्र सरकार के बस में नहीं है। जब तक राज्य सरकारें जमाखारों, मुनाफाखोरों और कालाबाजारियों से सख्ती से नहीं निपटेंगी तब तक महंगाई की मार से आम आदमी को बचाना संभव नहीं है। इस दौरान कुछ विवाद भी जुड़े हैं, जैसे निहाल चंद का मामला हो या स्मृति ईरानी की शैक्षिक सूचनाओं की या अनुच्छेद-370 पर चर्चा संबंधी जितेंद्र सिंह का बयान, जिन्हें विपक्ष ने हवा देने की कोशिश की है लेकिन जहां तक स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सवाल है, वे 18 घंटे से ज्यादा काम कर रहे हैं और सिस्टम में व्याप्त खामियों को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती सात जुलाई से शुरू हो रहे बजट सत्र को लेकर है। बजट भी ऐसा होना चाहिए जिसमेंदेश को यह साफ-साफ दिखाई दे कि मोदी सरकार की दिशा वही रहने वाली है जैसा कि उन्होंने लोगों से वादा किया है।
मोदी सरकार ने आधुनिकीकरण की बाट जोह रहे रक्षा क्षेत्र की जरूरतों को भी पूरा करने की तरफ कदम बढ़ाया है। रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने खुद कहा है कि सेना में साजोसामान की कमी न होने पाए इसके लिए सरकार तेजी से फैसले लेगी। मोदी सरकार की शुरुआत उम्मीद जगाती है। अब अगले कुछ माह ही बताएंगे कि इसने देश से जो वादे किए हैं उन्हें पूरा करने की दिशा में तेजी से फैसले ले रही है या नहीं। बहरहाल, किसी भी नई सरकार को परफॉर्मेंस करने के लिए कम से कम छह महीने का समय तो दिया ही जाना चाहिए।
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