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हरियाणा की राजनीति में नए युग की शुरुआत

एक नवंबर, 1966 को पंजाब से अलग कर हरियाणा राज्य का गठन हुआ था।

हरियाणा की राजनीति में नए युग की शुरुआत
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नई दिल्ली. रविवार को चंडीगढ़ का पंचकूला स्थित मेला ग्राउंड हरियाणा की बदलती राजनीति के ऐतिहासिक पल का गवाह बना, जब पहली बार भाजपा के मनोहर लाल खट्टर ने प्रदेश के दशवें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। यह हरियाणा की राजनीति में एक बड़ा बदलाव है। क्योंकि लंबे समय तक सत्ता के केंद्र में रही कांग्रेस और इंडियन नेशनल लोकदल जैसे क्षेत्रीय दलों को इस बार जनता ने दरकिनार कर दिया है। इस प्रकार कहा जा सकता हैकि हरियाणा की सियासत में नए युग की शुरुआत हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, प्रमुख केंद्रीय मंत्री और भाजपा व एनडीए का शीर्ष नेतृत्व साहित कई राज्यों के मुख्यमंत्री इस बनते इतिहास के साक्षी बने। इस अवसर पर पूरे पंचकूला में उत्सव जैसा माहौल था।

एक नवंबर, 1966 को पंजाब से अलग कर हरियाणा राज्य का गठन हुआ था। इस 90 विधानसभा सीटों वाले प्रदेश की सियासत में भाजपा कभी भी प्रमुख पार्टी नहीं बन सकी थी। जबकि हरियाणा के पड़ोस में स्थित करीब सभी राज्यों में इसकी सरकार रही है। पार्टी प्रदेश में क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन बनाकर ही हर बार चुनाव लड़ती रही। उस दौरान वह तीसरी-चौथी पार्टी ही बनी रही। 2009 में भाजपा सिर्फ चार सीटें ही जीत पाई थी, लेकिन इस बार इसने अकेले चुनाव लड़ा और अपने दम पर 47 सीटें लेकर बहुमत हासिल करने में सफल रही। पार्टी को यह सफलता तब मिली जब चुनावों से पहले इसने अपने मुख्यमंत्री पद के दावेदार का नाम भी घोषित नहीं किया था। हरियाणा के बाद भाजपा महाराष्ट्र में भी अगले कुछ दिनों में अपनी सरकार का गठन करने जा रही है।

लोकसभा चुनावों में ऐतिहासिक सफलता हासिल कर केंद्र की सत्ता में आने के बाद से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर वर्ग का भरोसा जीतने में लगे हैं। केंद्र में भाजपा की अगुआई में चल रही एनडीए सरकार के बेहतर कामकाज से लोगों का पार्टी में विश्वास बढ़ा है। वहीं जिन राज्यों में भाजपा की सरकार है, वे राज्य विकास की कसौटी पर भी खरे उतरे हैं। इससे भी लोगों का आकर्षण पार्टी की ओर बढ़ा है। जबकि कांग्रेस और दूसरे क्षेत्रीय दल अब भी जाति, धर्म, वंशवाद जैसे परंपरागत मुद्दों में उलझे हुए हैं। आज के मतदाता विकास चाहते हैं।

रोजगार चाहते हैं। भ्रष्टाचार मुक्त, पारदर्शी व जवाबदेह सरकार चाहते हैं। जनता नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली आज की भाजपा को यह सब देने में सक्षम देख रही है। हरियाणा में हुए बदलाव की एक बड़ी वजह यह भी है। क्योंकि किसी को उम्मीद नहीं थी कि भाजपा के लिए साढ़े चार दशक तक बंजर भूमि बने रहे हरियाणा के हर इलाके में इस तरह कमल का फूल खिल उठेगा। कांग्रेस और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के सुरक्षित गढ़ माने जाने वाले इलाकों से भी जिस तरह भाजपा के उम्मीदवार जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं, उसने राजनीतिक विश्लेषकों को भी आश्चर्य में डाल दिया है।

पूर्व में कांग्रेस के करीब दस वर्ष के शासन में विकास में भेदभाव और क्षेत्रवाद चरम पर रहा। हुड्डा सरकार कुछ ही लोगों के लिए काम करती प्रतीत हो रही थी। वहीं शासन में पारदर्शिता का अभाव साफ झलक रहा था। सरकार के मंत्रियों के बीच तालमेल न के बराबर था। जिससे विकास की धारा उल्टी बहने लगी थी। हुड्डा सरकार में भ्रष्टाचार एक बड़ी समस्या बनी हुई थी। उनके कार्यकाल में हुए जमीन के सौदे बड़ा चुनावी मुद्दा बन चुके हैं।

कुल मिलाकर जनता ने भाजपा के हाथों में राज्य की सत्ता सौंप कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी है। अब नए मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिमंडल की बारी है। देखना दिलचस्प होगाकि राज्य में हुआ यह ऐतिहासिक बदलाव केवल सत्ता परिवर्तन तक सीमित रहता है या व्यवस्था परिवर्तन का भी जरिया बनता है।

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