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लाल किले के प्राचीर से राष्ट्र निर्माण का आह्वान

पीएम मोदी ने लिखित भाषण की परंपरा तोड़ स्वाभाविक अंदाज में जनता से सीधा संवाद किया।

लाल किले के प्राचीर से राष्ट्र निर्माण का आह्वान
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लाल किले के प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले भाषण का पूरा देश इंतजार कर रहा था। उन्होंने लिखित भाषण की परंपरा तोड़ स्वाभाविक अंदाज में जनता से सीधा संवाद किया। खुद को प्रधानसेवक बता जनता से संवाद कायम करने की ऐसा जीवंत प्रयास सालों बाद दिखाई दिया। इस बार बुलेट प्रूफ बॉक्स भी नहीं था। दरअसल, संसदीय लोकतंत्र में प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठे शख्स का काम सिर्फ सरकारी फाइलों को निपटाना भर नहीं होता, बल्कि वह समूचे देश का एक अभिभावक भी होता है। देश की उम्मीदें उससे जुड़ी होती हैं। लिहाजा वह किस तरह संवाद कायम करता है, यह बहुत मायने रखता है क्योंकि इससे जनता और सरकार से एक रिश्ता जुड़ता है। दुर्भाग्य से पिछले कुछ समय से यह रिश्ता धुंधला पड़ गया था। प्रधानमंत्री ने लाल किले के प्राचीर से इसमें जान फूंकने का जोरदार प्रयास किया है। उन्होंने जनता, राज्य और विपक्ष से अपील की कि वे आगे आएं और देश को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने के लिए सरकार का हाथ मजबूत करें। यह भी शायद पहली बार देखने को मिला कि लाल किले से किसी प्रधानमंत्री ने सामाजिक जीवन से जुड़ी समस्याओं को उठाया। प्रधानमंत्री ने दो टूक कहा कि हम सिर्फ बेटियों को ही नसीहत देते हैं, बेटों को कुछ कहना जरूरी नहीं समझते। यदि मां-बाप अपने बेटों पर नजर रखने लगें तो रेप जैसी घटनाएं रुक सकती हैं। माओवाद और आतंकवाद के रास्ते पर भटके युवाओं से देश की मुख्यधारा में लौटने का आग्रह के साथ देश के विकास की खातिर जातिवाद और संप्रदायवाद से रहित समाज के निर्माण का संकल्प लेने को कहा। वहीं लिंग अनुपात के असंतुलन को रेखांकित करते हुए बेटियों को बचाने के लिए भावुक अपील भी की। प्रधानमंत्री ने दुनिया के सभी देशों को ‘कम मेक इन इंडिया’ (आइए भारत में बनाइए) का न्यौता देने के साथ ही भारतीय युवाओं से अपने हुनर का उपयोग कर भारत को निर्माण जगत की ताकत बनाने की भी अपील की। गरीबी मिटाने के लिए मिशन के तौर पर काम करने का ऐलान किया। हर घर में शौचालय की जरूरत पर बल देते हुए महिलाओं की पीड़ा को देश के सामने रखा। साथ ही कमजोर वगरें को ध्यान में रखकर देश के हर परिवार को बैंक खाता मुहैया कराने के लिए प्रधानमंत्री जन धन योजना, सांसद आदर्श ग्राम योजना (जिसमें सांसद अपने क्षेत्र के तीन से पांच हजार की आबादी वाले एक गांव को आदर्श गांव बनाएंगे), सभी क्षेत्रों को गंदगी मुक्त बनाने के लिए स्वच्छ भारत अभियान, हर विद्यालय में शौचालय और देश की बदली जरूरतों को पूरा करने के लिए योजना आयोग के स्थान पर एक नई संस्था बनाने की साहसिक घोषणा की। लाल किले से नरेंद्र मोदी ने जिस तरह संबोधित किया वैसे किसी प्रधानमंत्री ने किया होगा यह कहना कठिन है। यह विडंबना ही है कि मौजूदा दौर में राजनेताओं में जनता को प्रेरित करने और उन्हें जोड़ने की कोशिश शिथिल पड़ गई है, जबकि स्वाधीनता संग्राम के दौर के नेताओं की मौजूदगी तक ऐसा नहीं था। यही वजह है कि एक तरफ समाज सुधार की मुहिम कमजोर हुई तो दूसरी तरफ लोगों को अपने दायित्व का अहसास भी नहीं रहा। यह सुखद हैकि नरेंद्र मोदी ने ऐसे हालात को बदलने का प्रयास किया है। उन्होंने आम लोगों को उनके कर्त्तव्यों के बारे में स्मरण कराया। मोदी लाल किले के प्राचीर से एक ऐसे नेता के तौर पर उभरते दिखे जो परंपरागत राजनीति की सीमाओं से बाहर आ कुछ करना चाहते हैं। उनको सत्ता संभाले अभी तीन माह भी नहीं हुए हैं फिर भी अपने संबोधन से उन्होंने देश की उम्मीदों को पुन: जगाने का काम किया है।
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