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चिंतनः कीर्ति की अनुशासनहीनता पर पार्टी का सही फैसला

अरुण जेटली न केवल देश के वित्तमंत्री हैं बल्कि मोदी सरकार के सबसे काबिल मंत्रियों में से एक हैं।

चिंतनः कीर्ति की अनुशासनहीनता पर पार्टी का सही फैसला
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सांसद कीर्ति आजाद को पार्टी के प्रति उनके अनुशासनहीनता और गैरजिम्मेदार आचरण की सजा मिली है। भारतीय जनता पार्टी में रहते हुए वे स्वयं अपनी ही पार्टी की किरकिरी करवा रहे थे और विपक्षी दलों को शीर्ष नेतृत्व को नीचा दिखाने का अवसर मुहैया करा रहे थे।
तथाकथित डीडीसीए घोटाले के मामले में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और दूसरे वरिष्ठ नेताओं की चेतावनी के बाद भी उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र में अपनी ही सरकार को असहज करने के प्रयास किए। यही नहीं संसद के भीतर भी उन्होंने वित्तमंत्री अरुण जेटली से जिस प्रकार से जवाब-तलबी करने की कोशिश की उससे साफ हो गया था कि वे पार्टी द्वारा तय की गई र्मयादा की सारी सीमाएं लांघ रहे हैं।
डीडीसीए के अंदर अनियमितता का जो कुछ भी मुद्दा उठ रहा है, वह अपनी जगह है, लेकिन ऐसे समय जब पूरा विपक्ष संसद नहीं चलने दे रहा था। एक तरफ कांग्रेस व दूसरे दल संसद की कार्यवाही को बाधित करने के लिए हर रोज नए-नए मुद्दे तलाश रहे थे।
वहीं दूसरी तरफ कीर्ति आजाद हों या शत्रुघ्न सिन्हा हों या भाजपा के कुछ दूसरे असंतुष्ट नेता, वे सभी अपने ही दल के खिलाफ बयानबाजी कर आम आदमी पार्टी या कांग्रेस को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमले करने का और अस्त्र प्रदान कर दिए।
अरुण जेटली न केवल देश के वित्तमंत्री हैं बल्कि मोदी सरकार के सबसे काबिल मंत्रियों में से एक हैं। इस समय उन्हीं के ऊपर देश की अर्थव्यवस्था को तेज गति देने की जिम्मेदारी है। देखा जाए तो पिछले एक डेढ़ साल में जब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था मंदी का शिकार रही भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ रेट सात फीसदी से ऊपर दर्ज की गई।
मंदी के कारण अमेरिका, चीन, रूस और जापान आदि देशों की अर्थव्यवस्थाएं ढलान पर दिख रही हैं जबकि भारत तनकर खड़ा है। मोदी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के कारण तमाम अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं कहने लगी हैं कि आने वाले दिनों में भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था को दिशा देगा।
दुर्भाग्य है कि कई विपक्षी दल नहीं चाहते हैं कि केंद्र सरकार अपने उद्देश्यों में सफल हो। यही वजह है कि वे मोदी सरकार को किसी न किसी मुद्दे पर घेर कर बदनाम करने की निरंतर कोशिश में हैं। उन्हें इस बात का एहसास है कि अगले एक दो साल के भीतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरों का प्रतिफल जमीन पर उतरना शुरू हो जाएगा।
आने वाले दिनों में बड़ी मात्रा में विदेशी निवेश भारत में आएगा जिसके संकेत अभी से दिखने लगे हैं और फिर केंद्र सरकार के सुधारवादी कदमों के बाद अर्थव्यवस्था तेज गति से बढ़ेगी। देश में बड़े पैमाने पर रोजगार उत्पन्न होंगे। बेरोजगारों को काम मिलेगा।
ऐसे में मोदी सरकार की लोकप्रियता और बढ़ेगी। इसीलिए तय रणनीति के तहत विपक्ष एक-एक कर केंद्र सरकार के उन मंत्रियों पर आरोप जड़ रहा है जो इस समय उसके आधार स्तंभ का काम कर रहे हैं। इन हालातों में यदि पार्टी का ही कोई सांसद विपक्ष के हाथों में हथियार सौंप दे और उन्हें हमले करने का अवसर दे तो उसे सही रास्ता दिखाना जरूरी है। और भारतीय जनता पार्टी ने सांसद कीर्ति आजाद को सस्पेंड कर यही किया है।
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