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बदलती राजनीति के गवाह हैं ये चुनाव परिणाम

झारखंड और जम्मू कश्मीर के चुनाव नतीजे बदल रही भारतीय राजनीति के गवाह हैं।

बदलती राजनीति के गवाह हैं ये चुनाव परिणाम

झारखंड और जम्मू कश्मीर के चुनाव नतीजे बदल रही भारतीय राजनीति के गवाह हैं। 81 विधानसभा सीटों वाले झारखंड में भाजपा अकेले दम पर सरकार बनाने की स्थिति में है जबकि 87 विधानसभा सीटों वाले जम्मू कश्मीर में वह दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। दोनों राज्य में सबसे ज्यादा वोट भाजपा को ही मिले हैं। इससे पूर्व जम्मू कश्मीर में भाजपा की कोई खास उपस्थिति नहीं थी। ऐसे में उसका उभार कई अर्थों में महत्वपूर्ण है। वहीं झारखंड के इतिहास में पहली बार किसी पार्टी को पूर्णबहुमत के आसार बने हैं।

दूसरी ओर जम्मू कश्मीर में गठबंधन की ही सरकार बनेगी। दरअसल, यहां मुफ्ती मोहम्मद सईद की पीडीपी बड़ी पार्टी बनी जरूर है परंतु वह सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत से काफी दूर है। इन परिणामों से एक बात और साफ है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता बरकरार है। इन दोनों राज्यों में कांग्रेस के तीसरे स्थान पर पहुंचना दर्शाता है कि पार्टी लगातार सिकुड़ती जा रही है। राहुल गांधी सशक्त नेतृत्व देने में सक्षम नहीं हैं। इसके अलावा दोनों राज्यों की जनता ने सत्तारूढ़ दलों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार थी, वहीं जम्मू कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार थी। साथ ही जिस तरह बड़े बड़े दिग्गजों को मुंह की खानी पड़ी है, उससे स्पष्ट हैकि जनता लोकलुभावने वादे नहीं बल्कि विकास चाहती है। वह वंशवाद और घिसेपिटे राजनीतिक विचारों से बाहर निकलना चाहती है। झारखंड में जनता परिवार के नाम पर एकजुट हुए जदयू और राजद को भी हार का सामना करना पड़ा। ऐसे में इस चुनाव ने जनता परिवार को भी अपनी रणनीति पर विचार करने का अवसर लाया है।

दरअसल, इन दोनों राज्यों में राजनीतिक परिस्थितियां दूसरे राज्यों से ज्यादा विकट हैं। झारखंड में नक्सलवाद एक बड़ी चुनौती है, तो जम्मू कश्मीर में आतंकवाद और अलगाववाद एक बड़ी समस्या रहे हैं। लोकतंत्र विरोधी ये ताकतें जनता को चुनाव प्रक्रिया का बहिष्कार करने के लिए उकसाती रही हैं। इन सबके बीच आतंकियों व नक्सलियों के हिंसक वारदातों के बावजूद भी लोगों ने मतदान में बढ़ चढ़कर भाग लिया। उन्होंने लोकतंत्र में आस्था जताते हुए बुलेट पर बैलेट को तरजीह दी। साफ है घाटी में अलगाववादी और झारखंड में नक्सलवादी अप्रासंगिक होते जा रहे हैं।

जाहिर है, जनता अब हिंसा नहीं बल्कि संवैधानिक प्रक्रिया के तहत विकास चाहती है। दोनों राज्यों में रिकॉर्ड मतदान की यही वजह है। जम्मू कश्मीर में नई सरकार को लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरना होगा। घाटी की जनता ने जिस तरह लोकतंत्र में आस्था जताई है, अब नई सरकार की जिम्मेदारी होगी कि वह उनके विश्वास पर खरा उतरे। दूसरी ओर झारखंड में जनता बार-बार होने वाली उठापठक से तंग आ चुकी थी।

चौदह सालों के दौरान राज्य ने नौ मुख्यमंत्री और तीन बार राष्टÑपति शासन देखा है। वहां की राजनीतिक अस्थिरता से राज्य का विकास प्रभावित हो रहा था। राज्य आज विकास के हर पैमाने पर निचले स्थान पर है। अब नई सरकार की जिम्मेदारी होगी कि वह राज्य को विकास की ऊंचाइयों पर ले जाए। कुल मिलाकर ये चुनाव परिणाम दिखा रहे हैं कि संवैधानिक व्यवस्था में जनता का भरोसा बढ़ता जा रहा है। यह भारतीय लोकतंत्र के लिए सुखद संकेत है।

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