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चिंतन: ईरान पर प्रतिबंध हटना भारत के लिए भी अच्छा

प्रतिबंध के हटने से ईरान की 400 वस्तुओं को ग्लोबल बाजार मिलेगा।

चिंतन: ईरान पर प्रतिबंध हटना भारत के लिए भी अच्छा
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करीब 37 साल से आर्थिक प्रतिबंध का सामना कर रहे ईरान का अकेलापन खत्म होने से ग्लोबल ट्रेड में निश्चित रूप से नया आयाम जुड़ने वाला है। इस प्रतिबंध का हटना जितना अच्छा ईरान के लिए है, उतना ही अच्छा भारत, पश्चिम एशिया और शेष दुनिया के लिए भी है। ईरान कच्चे तेल और अन्य खनिज संपदा से भरपूर देश है। वह कच्चे तेल का जहां बड़ा निर्यातक है, वहीं खाद्यान्न का बड़ा आयातक भी है। इसके साथ ही ईरान के शक्तिशाली होने से पश्चिम एशिया में शक्ति संतुलन भी बना रहेगा। इस समय पश्चिम एशिया जिस तरह कट्टर इस्लामिक आतंकवाद से ग्रसित है, उसमें इसे रोकने की दिशा में मजबूत ईरान बड़ी भूमिका निभा सकता है। 1979 में सबसे पहले अमेरिका ने ईरान पर यूरेनियम संवर्धन और सैन्य परमाणु कार्यक्रम चलाने का आरोप लगा कर आर्थिक प्रतिबंध लगाया था। यूएस ने क्रमश: 1987, 1995, 2006 में और कड़ा प्रतिबंध लगा दिया। 2006 में यूएन (संयुक्त राष्ट्र संघ) और ईयू (यूरोपीय संघ) भी शामिल हो गए। 2010 में यूएस, यूएन व ईयू ने और भी सख्त बैन लगाकर एक तरह से ईरान की आर्थिक नाकेबंदी कर दी। ईरान का सौ अरब डालर भी सीज कर ली गई। यह सब केवल इस नाम पर कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम विश्व के लिए खतरा है। हालांकि गौर करने वाली बात है कि ईरान पर बैन लगाने वाले कई देश खुद परमाणु संपन्न हैं। जबकि ईरान शुरू से कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम असैन्य है, केवल ऊर्जा जरूरतों को पूरी करने के लिए है। फिर भी यूरोपीय और अमेरिकी देशों को ईरान पर कभी भरोसा नहीं हुआ। यूएस, यूूएन व ईयू के पर्यवेक्षक समय-समय पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम की जांच भी करते रहे, लेकिन उन्हें वहां कुछ भी नहीं मिला। बावजूद इसके ईरान पर प्रतिबंध कड़ा होता गया। पर अंतराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की निगरानी में जब यूएस, यूूएन व ईयू को पूर्ण विश्वास हो गया कि ईरान विश्व के विनाश के लिए कोई भी परमाणु कार्यक्रम नहीं चला रहा है, तब पिछले साल जुलाई में शक्तिशाली देशों- अमेरिका, रूस, फ्रांस, र्जमनी, चीन, ब्रिटेन और ईयू ने ईरान के साथ आर्थिक प्रतिबंध हटाने के लिए करार किया। जिसके मुताबिक ईरान को कुछ कदम उठाने थे और उसके बाद प्रतिबंध हटना था। वादे के मुताबिक ईरान ने अपने 12000 सेंट्रीफ्यूज, 98 फीसदी परमाणु ईंधन रूस भेजे, अरेक रिएक्टर को रीडिजाइन किया और प्लूटोनियम उत्पादन केंद्रों को बंद किया। उसके बाद अब 17 जनवरी को ईरान से सभी प्रकार के आर्थिक प्रतिबंधों को हटाया गया है। हालांकि अमेरिका ने अभी भी परमाणु को लेकर आंशिक प्रतिबंध जारी रखा है। प्रतिबंध के हटने से ईरान की 400 वस्तुओं को ग्लोबल बाजार मिलेगा। उसके 100 अरब डालर भी मिलेंगे। ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल का प्रवाह बढ़ जाएगा। इसका लाभ भारत को भी मिलेगा। भारतीय चावल और हस्तशिल्प को ईरान का बाजार मिलेगा। ईरान तक रेल लाइन ले जाने की भारत की योजना भी तेजी से परवान चढ़ेगी। लेकिन प्रतिबंध लगाने वालों के लिए यह गंभीरता से सोचे का वक्त जरूर है।
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