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ऐतिहासिक जनादेश के बाद की चुनौतियां, ''आप'' की हुई शानदार जीत

इस जनादेश के बाद साफ हो गया है कि जनता ने ''आप'' माफ कर दिया है।

ऐतिहासिक जनादेश के बाद की चुनौतियां,
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दिल्ली विधानसभा के चुनाव परिणाम को ऐतिहासिक घटनाक्रम के रूप में याद रखा जाएगा। देश में विधानसभा चुनावों में इतने बड़े जनादेश के उदाहरण बहुत कम ही देखने को मिले हैं। दिल्ली विधानसभा के सत्तर सीटों में से 67 सीट किसी एक पार्टी कीझोली में जाना इस बात का संकेत है कि लोगों ने आम आदमी पार्टी पर आंख मूंदकर भरोसा किया है। भारतीय लोकतंत्र अब करवट बदल रहा है। साथ ही यह देश में पारंपरिक राजनीति को एक आईना भी दिखा रहा है। करीब दो साल पूर्व अस्तित्व में आई आम आदमी पार्टी (आप) वह करिश्मा कर कई जो जमे जमाए दल नहीं कर पाए हैं। पंद्रह वर्षों तक दिल्ली की सत्ता में रही कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली है। उसके पचास से ज्यादा उम्मीदवारों की तो जमानत जब्त हो गई है। दिल्ली विधानसभा के नतीजे भारतीय जनता पार्टीके लिए भी सबक लेकर आए हैं। वह निश्चित रूप से प्रदेश की जनता का मूड भांपने में चूक गई। इसमें आप के लिए भी ढेरों संदेश छिपे हैं।

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यह सिर्फ जनादेश ही नहीं है, बल्कि जनता का भरोसा है। जिस पर खरा उतरने और बनाए रखने की जिम्मेदारी आप के कंधों पर है। अब उसका यह दायित्व बनता है कि दिल्ली की जनता से उसने चुनावों में जितने भी वादे किए हैं, उसे पूरा करे। अब उसकी असली चुनौती यहीं से शुरू होती है। इस बार आप किसी तरह का बहाना नहीं बना सकती, क्योंकि दिल्ली की जनता ने उसे ऐतिहासिक जनादेश दिया है। अब उसे दिल्ली में बनने वाली आप की सरकार से सवाल पूछने और हिसाब मांगने का पूरा अधिकार है। अण्णा हजारे के आंदोलन से निकली आप 2013 में हुए चुनाव में दूसरी बड़ी पार्टीबनी थी, हालांकि उसके बाद भी वह सरकार बनाने में कामयाब रही थी, लेकिन 49 दिन में ही अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। बाद में उन्होंने इसे अपनी राजनीतिक भूल बतायी थी और दिल्ली की जनता से इस भूल के लिए माफी भी मांगी।

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अब इस जनादेश के बाद साफ हो गया है कि जनता ने उन्हें माफ कर दिया है। लोगों को उम्मीद है कि वे इस तरह की गलती दोबारा नहीं करेंगे। दिल्ली की जनता यह भी आशा करेगी कि वे एक सुलझे हुए नेता की तरह सरकार चलाएंगे, दिल्ली में विकास के कार्य को आगे बढ़ाएंगे और सुशासन लाएंगे। दरअसल, पिछली बार केंद्र सरकार से कई बार टकराव के हालात पैदा हो गए थे, जिससे लगा था कि प्रदेश में संवैधानिक संकट पैदा हो जाएगा। दिल्ली देश की राजधानी है। इसे मिनी इंडिया भी कहा जाता है, क्योंकि सभी राज्यों के लोग यहां रहते हैं। यहां की हर खबर पर दुनिया की नजरें टिकी होती हैं। इसे पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त नहीं है। दूसरे राज्यों की तुलना में इसके अधिकार कम हैं। कई फैसलों के लिए केंद्र सरकार पर निर्भर रहना होता है। ऐसे में दिल्ली में बनने वाली आप की सरकार को केंद्र के प्रति सहयोगात्मक रुख रखना होगा। यह बेहतर है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीत के बाद अरविंद केजरीवाल को फोन कर बधाई दी है और दिल्ली के विकास के लिए सभी तरह के सहयोग देने की बात कही है। इस प्रकार से केंद्र सरकार ने सकारात्मक कदम उठाया है। उम्मीद है कि आप पिछली वाली गलतियां नहीं दोहराएगी और दिल्ली की बेहतरी पर पूरा ध्यान केंद्रित करेगी।

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