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आखिर कानून के शिकंजे में स्वयंभू संत रामपाल

करीब चौदह दिनों तक कानून के शासन का मखौल उड़ाते रहे रामपाल को हरियाणा पुलिस ने आखिरकार गिरफ्तार कर लिया।

आखिर कानून के शिकंजे में स्वयंभू संत रामपाल
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करीब चौदह दिनों तक कानून के शासन का मखौल उड़ाते रहे रामपाल को हरियाणा पुलिस ने आखिरकार गिरफ्तार कर लिया, वह भी बिना एक गोली चलाए। हालांकि पूरे ऑपरेशन में छह लोगों की जान अवश्य गई है पर प्रशासन का कहना है कि उसकी कार्रवाई में वे मौतें नहीं हुई हैं। हरियाणा पुलिस की इस कामयाब ऑपरेशन की पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने भी तारीफ की है।
इसके बाद जो लोग हरियाणा पुलिस, प्रशासन और सरकार की नीति को लचर और गलत बता रहे थे, उन्हें जवाब जरूर मिला होगा। रामपाल की गिरफ्तारी पुलिस और प्रशासन के लिए कितनी बड़ी चुनौती बनी थी इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस ऑपरेशन में हरियाणा पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स और सीआरपीएफ के करीब 45 हजार जवान लगाए गए थे।
दरअसल, रामपाल की गिरफ्तारी इस लिहाज से चुनौती बनी हुई थी, क्योंकि वह देश भर से आए अपने सर्मथकों, जिसमें महिलाएं और छोटे-छोटे बच्चे भी बड़ी संख्या में थे, को अपनी ढाल के रूप में इस्तेमाल कर रहा था। ऐसे सर्मथकों की संख्या करीब 40 हजार के आसपास आंकी गई। पुलिस कार्रवाई के बाद आर्शम से बाहर आए लोगों ने यह स्वीकारा भी है कि रामपाल और उसके कट्टर सर्मथक उन्हें डरा-धमका कर आर्शम में रहने के लिए मजबूर किए हुए थे। यह एक तरह से बंधक बनाने के समान ही है। पुलिस कार्रवाई के पूर्व हमने देखा भी कि किस कदर सैकड़ों महिलाएं और बच्चे आर्शम के मुख्यद्वार पर रामपाल की गिरफ्तारी का विरोध कर रहे थे। इसके अलावा रामपाल अपनी सुरक्षा के लिए हथियारबद्ध रक्षक भी बड़ी संख्या में तैयार कर रखा था। जो सभी तरह के हथियार चलाने में सक्षम बताये जा रहे हैं। पुलिस को शुरुआती जांच में आर्शम से पेट्रोल बम, हथियार और हिंसा फैलाने वाली दूसरी सामग्रिया मिली हैं। जब पुलिस हाईकोर्ट के निर्देश पर रामपाल को गिरफ्तार करने गई तो देखा गया था कि उसके रक्षक छत पर हथियार से लैस तैनात थे। और वहीं से जवानों पर पत्थर, पेट्रोल बम और गोली चला रहे थे।
यही वजह थी कि हरियाणा पुलिस को संयम बरतना पड़ रहा था। जहां हजारों की संख्या में लोग हों। खासकर जहां आस्था के नाम पर ऐसा जमावड़ा हो वहां इस तरह की कोई कार्रवाई आसान भी नहीं होती। क्योंकि बड़ी मात्रा में जानमाल की क्षति की संभावना होती है। बरवाला आर्शम में जो हालात पैदा हुए, उसके लिए पूरी तरह रामपाल का रवैया जिम्मेदार था। रामपाल बार-बार अदालत के आदेश की अनदेखी कर रहा था। 2010 से अब तक अलग-अलग मामलों में करीब तीन दर्जन से अधिक बार अदालत की अवमानना कर चुका है। गत पांच से 17 नवंबर के बीच तीन बार पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में अपनी बीमारी का बहाना बनाकर पेश नहीं हुआ। अदालत के कड़े रुख के बाद पुलिस के पास उसकी गिरफ्तारी ही प्रमुख रास्ता बचा था, लेकिन निदरेष लोगों की भारी भीड़ देखते हुए काफी सतर्कता से इस अभियान को अंजाम दिया गया। इसके लिए हरियाणा सरकार और पुलिस की कूटनीति और रणनीति की तारीफ होनी चाहिए। अब हाईकोर्ट ने पुलिस को समूचे आर्शम की जांच के आदेश दिए हैं।
आने वाले कुछ दिनों में यह बात स्पष्ट हो जाएगी कि आस्था और धर्म के नाम पर वहां कौन-कौन सी अवैध गतिविधियां चलाई जा रही थीं। इस घटना से सबक लेते हुए देश में जहां भी धर्म या आस्था के नाम पर इस तरह के आर्शम बनाए गए हैं उनकी भी जांच पड़ताल की जानी चाहिए। जिससे उनकी भी सच्चाई लोगों के सामने आ सके। इससे समाज को भी सबक लेना चाहिए कि आस्था व धर्म के नाम पर जो लोग अंधविश्वास फैला रहे हैं, उन्हें पहचाने। आंख मूंदकर किसी के पीछे जाने से पहले जरा ठहर कर सोचें कि वह व्यक्ति ज्ञान के नाम पर उनकी मजबूरियों का फायदा तो नहीं उठा रहा है। देश में कानून का शासन है। कोई भी व्याक्ति कानून से ऊपर नहीं है, लेकिन रामपाल जिस तरह से व्यवहार कर रहा था उससे यही लगा कि वह खुद को संविधान व कानून से ऊपर मानता है। इस कार्रवाई से देश में यह संदेश जरूर गया होगा कि न्यायपालिका के सामने हर कोई समान है और उसके आदेश सभी के लिए मान्य होने चाहिए।
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