Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

भारत में फुटबॉल को नई दिशा मिलने की उम्मीद

बाईचुंग भूटिया ने कहा है कि इंडियन सुपर लीग भारतीय फुटबॉल के लिए वो काम कर सकती है जिसका यह खेल हकदार है।

भारत में फुटबॉल को नई दिशा मिलने की उम्मीद
X

नई दिल्ली. इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) के रूप में भारत में फुटबॉल एक नई करवट लेता प्रतीत हो रहा है। यह आईपीएल की तर्ज पर देश में आयोजित होने वाली फ्रेंचाइजी आधारित पहली पेशेवर फुटबॉल लीग है। इस लीग में आठ टीमें हिस्सा ले रही हैं और अगले तीन महीने तक साठ से अधिक मैच खेले जाएंगे। प्रत्येक मैच में छह विदेशी और पांच घरेलू खिलाड़ी शामिल होंगे। इससे न केवल जमीनी स्तर पर फुटबॉल का विकास होगा, बल्कि हमारे खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल का अनुभव भी प्राप्त होगा। क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई खिलाड़ी जैसे-फ्रांस के दिग्गज निकोलस अनेलका, स्वीडन के फ्रेड्रिक लुंगबर्ग और इटली के डेल पियेरो इसमें भाग ले रहे हैं।

इन खिलाड़ियों के पास काफी अनुभव है। घरेलू खिलाड़ियों को इनसे काफी कुछ सीखने को मिलेगा। वहीं इस लीग से उन घरेलू युवा खिलाड़ियों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा जो मौके के अभाव में अपनी चमक खो देते हैं। लिहाजा यह सिर्फ मनोरंजन और एक खेल प्रतिस्पर्धा न होकर भारतीय फुटबॉल के अच्छे भविष्य का आधार बन सकता है। देश में फुटबॉल का इतिहास सवा सौ साल पुराना है, परंतु आज भारत फुटबॉल की दुनिया में बहुत पीछे है।

आजादी के बाद करीब एक दशक से कुछ ज्यादा दिनों तक देश में फुटबॉल की लोकप्रियता क्रिकेट और हॉकी से कहीं ज्यादा थी। एक दौर में ओलंपिक तक में भारतीय खिलाड़ी बिना बूट के ही खेलते थे और अच्छा प्रदर्शन करते थे।1951 में हुए पहले एशियन गेम्स में फुटबॉल का स्वर्ण पदक भारत ने जीता था और 1956 में मेलबर्न ओलंपिक में सेमीफाइनल तक पहुंचा था, लेकिन भारत अपनी वह स्थिति लंबे दिनों तक बरकरार नहीं रख सका और लगातार फिसलता गया। आज आलम यह है कि ओलंपिक और विश्वकप तो बहुत दूर की बात है

भारतीय फुटबॉल एशिया में भी शीर्ष दस में नहीं आता है। फीफा रैंकिंग में फिसल कर भारत अब 158वें स्थान पर पहुंच गया है। वहीं भारत से कम आबादी वाले कई देश जैसे कोस्टारिका, पुर्तगाल, घाना, कैमरून और क्रोएशिया अपनी बेहतर रणनीति के जरिए रैंकिंग में ऊंचाई पर पहुंच गए। देश में फुटबॉल की यह दुर्दशा करने में फुटबॉल फेडरेशन में भ्रष्टाचार, ओछी राजनीति और सत्ता लोभ का अहम हाथ रहा है। वहीं वक्त के साथ नहीं चलने के कारण भी हम पिछड़ते गए। आज भी फेडरेशन के पास फुटबॉल को आगे बढ़ाने के लिए कोई ठोस योजना नहीं है।

बाईचुंग भूटिया ने कहा है कि इंडियन सुपर लीग भारतीय फुटबॉल के लिए वो काम कर सकती है जिसका यह खेल हकदार है। हमने इस तरह की पहल इससे पूर्व कभी नहीं देखी। यह एक ऐसा विचार है जो भारत में इस खेल की जरूरत है। उम्मीद है कि आईएसएल से युवाओं को प्रेरणा लेने और उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धात्मक फुटबॉल खेलने का अवसर मिलेगा। हालांकि देश में फुटबॉल की बेहतरी के लिए इसके अलावा भी बहुत कुछ करने की जरूरत है। भारत में स्कूली स्तर पर फुटबॉल अब भी काफी खेला जाता है। उनमें से प्रतिभावान युवाओं की पहचान कर उन्हें आगे बढ़ाने के लिए उचित वातावरण और विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान करने की जरूरत है।

खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि और हमें फॉलो करें ट्विटर पर-

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story
Top