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सफलतम कप्तान धोनी का टेस्ट से संन्यास, बीसीसीआई ने किया ट्वीट

धोनी ने अपने टेस्ट कॅरियर की शुरुआत 2005 में श्रीलंका के विरुद्ध किया था।

सफलतम कप्तान धोनी का टेस्ट से संन्यास, बीसीसीआई ने किया ट्वीट

भारतीय क्रिकेट जगत के सबसे सफल कप्तान महेंद्र सिंह धोनी अब टेस्ट क्रिकेट नहीं खेलेंगे। धोनी ने अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया है। हालांकि वे एक दिवसीय और टी-20 मैच खेलते रहेंगे। बीसीसीआई ने ट्विट कर इसकी जानकारी दी है। इसके साथ ही भारतीय क्रिकेट टीम में फैब फोर युग का अंत हो गया है। अब टेस्ट क्रिकेट टीम की कमान युवा विराट कोहली के हाथों में आ गई है। भारतीय टीम आॅस्ट्रेलिया के दौरे पर है, जहां चार टेस्ट मैचों की शृंखली खेली जा रही है।

धोनी ने अपने टेस्ट कॅरियर की शुरुआत 2005 में श्रीलंका के विरुद्ध किया था। कुल खेले 90 में से 60 टेस्ट मैचों में उन्होंने कप्तानी की है। उनकी कप्तानी में भारतीय टीम को 27 मैचों में जीत व 18 में हार मिली और 15 मैच टाई रहे। उन्होंने कुल 144 टेस्ट पारियां खेली है। टेस्ट मैच में उन्होंने 38 के औसत से बल्लेबाजी करते हुए कुल 4876 रन बनाए हैं। उनका अधिकतम स्कोर 224 है। वहीं उन्होंने 256 कैच और 58 स्टंप आउट किए हैं। इसके साथ ही उन्होंने 6 शतक व 33 अर्द्धशतक भी लगाए हैं। वे एक बेहतरीन विकेटकीपर व बल्लेबाज हैं।

हालांकि भारतीय क्रिकेटजगत में धोनी का योगदान इससे कहीं बढ़कर है। कहा जा सकता हैकि उनकी कप्तानी में ही भारतीय क्रिकेट को अपना मुकाम हासिल हुआ है। सौरभ गांगुली ने भी भारतीय क्रिकेटटीम को काफी हद तक एकजुट करने में भूमिका निभाईथी, परंतु धोनी ने भारतीय क्रिकेट को वह सब दिलाया जिसका वह हकदार था। भारतीय क्रिकेट टीम इन्हीं की कप्तानी में टेस्ट और एक दिवसीय में दुनिया की नंबर एक टीम बनी।

2011 में विश्व कप, 2007 में टी-20 का विश्व कप और 2013 में चैंपियन ट्रॉफी भारत की झोली में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में ही आए। महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने कहा है कि उन्होंने अब तक जितने भी कप्तानों के साथ खेला है उनमें उन्हें सबसे बेहतर धोनी ही लगे हैं। धोनी की सबसे बड़ी विशेषता प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य नहीं खोना है। उन्हें अंत अंत तक मैच जीतने के लिए ही खेलने और रणनीति बनाने के लिए जाना जाता है। मैदान पर अपने साथी खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाना हो या उनके साथ मिलकर प्रतिद्वंद्वी टीम को मात देनी हो, सबमें वे आगे रहे हैं। टीम को किस तरह एकजुट रखते हुए बेहतर परिणाम हासिल करने हैं, वह धोनी की कप्तानी से सीखा जा सकता है।

हालांकि हाल के दिनों में उनके प्रदर्शन का स्तर कुछ गिरा था। क्रिकेट के जानकारों का यह भी कहना हैकि धोनी टेस्ट क्रिकेट की तुलना में एक दिवसीय में ज्यादा सफल हैं। अर्थात टेस्ट मैच में उनकी रणनीति कारगर नहीं हो पाती थी, खासकर विदेशों में खेले गए कई मैचों में भारत को बड़ी हार का सामना करना पड़ा। दरअसल, टेस्ट क्रिकेट का मिजाज कुछ अलग होता है। इसमें लंबी अवधि के मैच खेलने होते हैं। जिसमें कप्तान को लंबे समय तक एकाग्र रहना पड़ता है। थोड़ा-सा भी विचलन मैच गंवाने का कारण हो सकता है। हालांकि एक दिवसीय में उनकी कोई सानी नहीं है। उनके गेम प्लान और फिनिशिंग टच का हर कोई कायल है। ऐसे में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास का उनका फैसला सही है, परंतु टीम में उनकी कमी अवश्य खलेगी। अब वे एक दिवसीय व टी-20 पर ज्यादा फोकस कर सकेंगे। इससे उनकी बल्लेबाजी का स्तर भी सुधरेगा। अगले साल फरवरी में विश्व कप होने हैं। अब उनका अगल लक्ष्य यही होना चाहिए। फिलहाल शानदार टेस्ट कॅरियर के लिए उन्हें बधाई।

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