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कानून की गिरफ्त में दिल्ली के कानून मंत्री, AAP और पुलिस आमने-सामने

दिल्ली सरकार में कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर की दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तारी से नए विवाद ने जन्म ले लिया है।

कानून की गिरफ्त में दिल्ली के कानून मंत्री, AAP और पुलिस आमने-सामने
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दिल्ली में ऐतिहासिक जीत हासिल करने के बाद सत्ता में आई आम आदमी पार्टीकी सरकार जिस तरह हर रोज किसी न किसी विवाद में घिरती जा रही है, उससे सबसे ज्यादा नुकसान प्रदेश की जनता का हो रहा है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को याद रखना चाहिए कि मतदाता आप की सरकार विरोधियों से बेवजह टकराव पैदा करने के लिए नहीं बनाई है, बल्कि सुशासन स्थापित करने के लिए बनाई है। आज दिल्ली सरकार के काम काज की चर्चा कम, लेकिन उसके केंद्र सरकार व उपराज्यपाल से लड़ाई झगड़े की चर्चा अधिक हो रही है। इस बीच दिल्ली सरकार में कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर की दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तारी से नए विवाद ने जन्म ले लिया है। उन पर स्नातक और एलएलबी ही फर्जी डिग्री हासिल करने का आरोप है।

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विधानसभा चुनाव के दौरान ही यह मामला सामने आया था। बाद में यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट में गया, जहां इसकी सुनवाई चल रही है। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों से नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। इसके बाद बिहार के भागलपुर के तिलका मांझी विश्वविद्यालय, जहां से जितेंद्र सिंह तोमर ने एलएलबी की डिग्री हासिल की है, ने बताया है कि उनके रिकॉर्ड में ऐसे किसी छात्र का नाम नहीं है। बताया जा रहा है कि ऐसी ही बात उत्तर प्रदेश स्थिति डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, जहां से उन्होंने स्नातक की डिग्री हासिल की है, ने भी कही है। हालांकि कानून मंत्री जरूर यह दावा कर रहे हैं कि उनकी सभी डिग्री सही हैं और समय आने पर इसे दिखा देंगे, लेकिन चार माह बीतने के बाद भी डिग्री सार्वजनिक नहीं होने से शक गहरा रहा है। उनके दावे का आधार उस कॉलेज का हलफनामा है, जहां से उन्होंने एलएलबी की पढ़ाई की है। यह कॉलेज तिलका मांझी विश्वविद्यालय से संबंधित है। इस आधार पर उन्होंने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी विश्वास में ले लिया है। एक तरफ विश्वविद्यालय कह रहा है कि डिग्री फर्जी है तो दूसरी तरफ कॉलेज इसे सही बता रहा है। अब सच क्या है, हाईकोर्ट से ही साफ होगा। दिल्ली की बार काउंसिल भी तोमर की एलएलबी की डिग्री की जांच कर रही है। दिल्ली पुलिस उसमें सहयोग कर रही है।

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पुलिस का कहना है कि जांच में तोमर के खिलाफ गंभीर तथ्य सामने आए हैं। उसकी जांच में दोनों डिग्रियां फर्जी पाई गई हैं। यही वजह हैकि बार काउंसिल द्वारा गंभीर धाराओं में केस दर्ज कराने के बाद पूछताछ के लिए उन्हें गिरफ्तार किया गया। इसे आप के नेता साजिश बता रहे हैं। जबकि दिल्ली पुलिस ने कहा है कि कार्रवाई कानून के दायरे में हुई है। हालांकि कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब मामला अदालत में है तब गिरफ्तारी की जरूरत क्यों आ पड़ी। बेहतर होता कि वह सारे तथ्य अदालत के संज्ञान में लाती। हालांकि पुलिस का तर्क है कि कोर्ट ने उसे ऐसा करने से मना नहीं किया है, लिहाजा वह अपना काम कर रही है। ऐसे में सवाल है कि अरविंद केजरीवाल जोखिम क्यों उठा रहे हैं? उन्हें डिग्री विवाद उठने के दौरान ही तोमर से कह देना चाहिए था कि जब तक अदालत से पाक साफ नहीं हो जाते तब तक आप पद छोड़ दीजिए। यह बेहतर कदम साबित होता। वैसे भी सत्ता में आने के पहले केजरीवाल और उनकी टीम कांग्रेस और उसकी सरकार पर सिर्फ आरोपों के आधार पर पद छोड़ने की मांग करते नहीं थकते थे। ऐसे में वे दोहरी नीति क्यों अपनाए हुए हैं। जितेंद्र सिंह तोमर का यह मामला आम आदमी पार्टी और दिल्ली पुलिस की विश्वसनीयता को तय करने के मुहाने पर पहुंच गया है।

फर्जी डिग्री: AAP सरकार के कानून मंत्री गिरफ्तार, पुलिस जांच में नहीं कर रहे थे सहयोग

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