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भारत को स्वच्छ रखने का दायित्व निभाएं आमजन

गांधी जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया स्वच्छ भारत अभियान।

भारत को स्वच्छ रखने का दायित्व निभाएं आमजन
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नई दिल्ली. एक मनुष्य के रूप में यह तो सभी का सामाजिक दायित्व बनता है कि वह अपने परिवेश को साफ सुथरा रखे। कुछ सफाई कर्मचारियों के दम पर सरकारें देश को साफ सुथरा नहीं कर सकतीं। यानी सफाई का काम सिर्फ सरकार का नहीं है। यह काम आमजन का है। सभी देशवासियों को इसकी जिम्मेदारी उठानी होगी। सफाई के कार्य को अपने व्यवहार या आदत में उतारना होगा। इसकी शुरुआत सबसे पहले स्वयं से, परिवार से, मोहल्ले से, फिर गांव से कर सकते हैं। क्योंकि दुनिया के जो भी देश स्वच्छ दिखते हैं, उसका कारण यह है कि वहां के नागरिक गंदगी नहीं करते और न ही होने देते हैं।
गांधी जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया स्वच्छ भारत अभियान का उद्देश्य भी यही हैकि देशवासियों को सफाई के प्रति जागरूक किया जाए। अर्थात आमजन स्वयं ऐसा कार्य न करें जिससे गंदगी फैले और साथ ही जो लोग गंदगी फैला रहे हैं उन्हें रोकें भी। क्योंकि गंदगी कई समस्याएं पैदा करती है, जिससे गंदगी करने वाला प्रभावित तो होता ही है, दूसरे लोगों पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इससे तरह-तरह की गंभीर बीमारियां फैलने का खतरा रहता है। अभी गंदगी के कारण पैदा हुई बीमारियों के इलाज पर जीडीपी की एक बड़ी राशि खर्च करनी पड़ रही है। वहीं विदेशों में भी भारत की छवि एक गंदे देश की बनी हुई है। इससे पर्यटक भारत आने से कतराते हैं।
हालांकि कुछ लोग इस अभियान में राजनीति देख रहे हैं पर प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया है कि यह राजनीति से परे है। वैसे भी देश साफ रहेगा तो वह स्थिति सभी के लिए लाभदायी होगी। अब समाज को भी यह सोचने की जरूरत है कि आजादी के छह दशक बाद इस तरह की मुहिम की जरूरत ही क्यों पड़ी। ऐसा क्या हुआ कि हम अपने दायित्वों को भूल गए। जब यह दायित्व है तो फिर भारत मां को स्वच्छ रखने के लिए शपथ क्यों दिलानी पड़ रही है। दरअसल, जो चीज हमारी आदतों में शामिल नहीं होती उसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना कठिन होता है।
प्रधानमंत्री ने कहा भी कि मैं जानता हूं यह कठिन काम है, लेकिन हमारे पास 2019 तक का समय है। यदि लोग राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा से इस कार्य को करें तो यह आसान हो जाएगा और फिर पांच वर्ष बाद गांधी जी की 150वीं जयंती पर एक स्वच्छ भारत का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। घरों सहित सभी सार्वजनिक स्थलों की सफाई में जनभागीदारी बढ़ाने के साथ इस अभियान का एक उद्देश्य खुले में शौच के चलन को खत्म करना भी है। देश में अभी भी 60 फीसदी लोग खुले में शौच जाते हैं। इसके तहत सभी स्कूलों और घरों में शौचालय का निर्माण कराया जाएगा।
गांधी जी की पोती सुमित्रा गांधी कुलकर्णी ने इसे बेहद महत्वपूर्ण पहल बताया है। वहीं उनके परपौत्र तुषार गांधी ने कहा है कि ये स्वीकार करना होगा कि आजादी के बाद शायद पहली बार बापू की जयंती सार्थक रूप में मनाई जा रही है। कुल मिलाकर, केंद्र सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता दिखा दी है। अब हमारी बारी है कि हम सफाई के प्रति सजग हो जाएं, क्योंकि अगर देश के 125 करोड़ लोग ये तय कर लें कि वो गंदगी नहीं फैलाएंगे तो दुनिया की कौन सी ताकत है, जो हमारे शहर और गांवों को गंदा कह सके।
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