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चिंतन: मंदी के आगोश में चीन ऐसे में चमकेगा भारत

पिछले कुछ महीनों से चीन की अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल का माहौल बना हुआ है। वर्तमान में चीन मंदी की चपेट में है।

चिंतन: मंदी के आगोश में चीन ऐसे में चमकेगा भारत
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बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के संवेदी सूचकांक सेंसेक्स में बृहस्पतिवार को 555 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी निवेशकों की बिकवाली के दबाव में 172 अंक टूट गया। वहीं डॉलर के मुकाबले रुपया और कमजोर हो कर करीब 66.93 के स्तर पर गिर गया। दरअसल, चीनी बाजार में आए तूफान से भारत और अमेरिका सहित दुनिया के सभी प्रमुख बाजार प्रभावित हुए हैं। पिछले कुछ महीनों से चीन की अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल का माहौल बना हुआ है। वर्तमान में चीन मंदी की चपेट में है। इससे निकलने का वह हरसंभव प्रयास कर रहा है, लेकिन सफलता नहीं मिल रही है। गत दिनों उसने अपनी अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए अपनी मुद्रा युआन का अवमूल्यन किया था। उसे उम्मीद थी कि उसके इस कदम से निर्यात बढ़ेगा और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में सुस्ती खत्म हो जाएगी। दरअसल, चीन की अर्थव्यवस्था निर्यात आधारित है। वैश्विक मंदी के कारण दुनिया में मांग कम होने के चलते उसके उत्पादन में गिरावट आई है। गत दिनों चीन में मैन्युफैक्चरिंग के आंकड़े जारी हुए जो कि उम्मीद से बहुत कम थे, उसके बाद चीनी बाजार में सात फीसदी की भारी गिरावट दर्ज हुई। हालांकि उसने बाजार को संभालने के लिए कई कदम उठाए हैं, उसके बावजूद हालात नहीं संभल रहे हैं। इस तरह दुनिया के बड़े बाजारों में आई गिरावट के बाद विदेशी निवेशकों में डर बैठ गया है जिसकी वजह से वे भारत सहित तमाम विकासशील देशों से पैसा निकाल रहे हैं। हालांकि विश्व बैंक की मानें तो भारतीय अर्थव्यवस्था दूसरे देशों की तुलना में मजबूत है, लिहाजा इस वैश्विक उतार-चढ़ाव का इस पर अस्थाई असर होगा। आंकड़े भी इसकी गवाही दे रहे हैं। यहां राजकोषीय घाटा और चालू खाता घाटा नियंत्रण में हैं। भारत के पास विदेशी मुद्रा का बड़ा भंडार है। कच्चे तेल की कीमत करीब 12 साल के सबसे निचले स्तर पर है। अभी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 33 डॉलर प्रति बैरल है। महंगाई भी नियंत्रण में है। विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दूसरे प्रमुख विकासशील देशों के विपरीत निवेशकों की मजबूत धारणा और तेल की कीमतों में आई गिरावट से वास्तविक आय पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभाव के कारण भारत में वृद्धि दर तेज बनी रहेगी। पिछले वर्ष वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता के दौर में भी भारत की मुद्रा और शेयर बाजार ने काफी हद तक लचीलापन दिखाया है। भारतीय रिर्जव बैंक ने नए सिरे से विदेशी मुद्रा भंडार बनाया है, वहीं एफडीआई प्रवाह बना रहा है। भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में दूसरी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का आकलन है कि वैश्विक मंदी के बावजूद यह दुनिया में सबसे तेजी से विकास कर रहा है। ऐसे में चीनी मंदी का भारतीय अर्थव्यवस्था पर बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ने की उम्मीद कम है। हालांकि विश्व बैंक ने कहा है कि इन वैश्विक चुनौतियों का डटकर सामना करने के लिए भारत को कई सुधारवादी कदम उठाते रहना चाहिए। आज वस्तु व सेवा कर और भूमि अधिग्रहण बिल को कानून का रूप देना जरूरी हो गया है। इसके अभाव में दीर्घकाल में चीन की मंदी का भारत पर कुछ असर होने की आशंका है। मसलन मेक इन इंडिया कार्यक्रम और निजी निवेश प्रभावित हो सकते हैं।
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