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चिंतन: चाबहार डील से पाक व चीन को कूटनीतिक मात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेजी से मौके का फायदा उठाते हुए ईरान के साथ चाबहार पोर्ट डील कर भारत की मध्य एशिया और यूरोप तक सीधी पहुंच को सुनिश्चित कर दिया।

चिंतन: चाबहार डील से पाक व चीन को कूटनीतिक मात

भारत ने ईरान के साथ चाबहार पोर्ट डील फाइनल कर पाकिस्तान और चीन को एक साथ तगड़ी कूटनीतिक मात दी है। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के समय ही 2003 में भारत और ईरान के बीच चाबहार पोर्ट पर करार की बात हुई थी, लेकिन ईरान पर उसके परमाणु कार्यक्रम के चलते ग्लोबल बैन लग जाने के चलते करार परवान नहीं चढ़ पाया। अब जब यह बैन हटा है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेजी से मौके का फायदा उठाते हुए ईरान के साथ चाबहार पोर्ट डील कर भारत की मध्य एशिया और यूरोप तक सीधी पहुंच को सुनिश्चित कर दिया।

पहले भारत कोशिश कर रहा था कि पाकिस्तान लाहौर से ईरान तक अपने रेलमार्ग का इस्तेमाल करने की अनुमति दे दे। पीएम मोदी सरकार ने इस दिशा में तेज पहल की। दरअसल भारत से लाहौर तक पहले से ही रेलमार्ग है और पाकिस्तान अगर अनुमति देता तो ईरान तक भारत की रेल पहुंच हो जाती, लेकिन चीन की गोद में बैठा पाकिस्तान ने मोदी सरकार की कोशिशों पर ध्यान नहीं दिया। इसके बाद भारत ने प्लान-बी के तहत मुंबई के जवाहर लाल नेहरू पोर्ट और गुजरात के कांडला पोर्ट से ईरान के चाबहार पोर्ट तक के जलमार्ग पर तेजी से काम करना शुरू किया। कांडला एवं चाबहार बंदरगाह के बीच दूरी नई दिल्ली से मुंबई के बीच की दूरी से भी कम है। भारत के लिए यह रूट किफायती भी है।

चाबहार के रास्ते व्यापार करने से भारत की लागत में 30 फीसदी तक कटौती होगी। अब भारत को बिना पाकिस्तान का सहारा लिए अफगानिस्तान, रूस और यूरोप तक सीधी पहुंच बनाने में मदद मिलेगी। चाबहार डील से पहले तक भारत की रूस समेत यूरोप, पश्चिम व मध्य एशिया व अफगानिस्तान तक सीधी पहुंच नहीं थी, जबकि भारत और पाकिस्तान के खराब संबंध का फायदा उठाकर चीन पाक के ग्वादर पोर्ट (बंदरगाह) का इस्तेमाल कर मध्य एशिया व यूरोप तक अपना व्यापार कर रहा था। चीन का ही कूटनीतिक प्रयास था कि पाकिस्तान लाहौर-ईरान रूट का इस्तेमाल भारत को नहीं करने दे।

चीन ईरान से भी दोस्ता गांठ रहा था। कुछ सप्ताह पहले ही चीनी राष्ट्रपति शी चिनपिंग ने ईरान की यात्रा की थी। इस यात्रा का मकसद भारत और ईरान की नजदीकी को रोकना था। लेकिन ईरान का भारत के साथ सदियों पुराना कला, सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध है। भारतीय चावल ईरान को बेहद पसंद है। इसलिए ईरान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को न्योता दिया। 15 वर्षों में ईरान जाने वाले पहले पीएम हैं मोदी। ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने भारतीय पीएम का गर्मजोशी से स्वागत किया। मोदी ईरान यात्रा मध्य एशिया में कूटनीतिक रूप से भी अहम है।

पीएम हाल ही में सऊदी अरब भी गए थे। पिछले साल यूएई गए थे। ये तीनों ही देश मुस्लिम देशों में भी अहम स्थान रखते हैं और व्यापारिक नजरिये भी महत्वपूर्ण है। सऊदी अरब के पाक से अच्छे रिश्ते रहे हैं, ऐसे में भारत और अरब देशों की नजदीकी भारतीय कूटनीति की जीत है। ईरान शिया बहुल देश होने के चलते भी भारत के बहुत करीब है। आतंकवाद, साइबर अपराध और कट्टरपंथ के खिलाफ भी भारत को ईरान के रूप में मजबूत साथी मिला है।

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