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चिंतन: आतंकवाद में फर्क छोड़ कड़ी कार्रवाई करे पाक

2014 के दिसंबर में पेशावर के सैन्य स्कूल में टीटीपी ने ही मासूम छात्रों का कत्लेआम मचाया था।

चिंतन: आतंकवाद में फर्क छोड़ कड़ी कार्रवाई करे पाक
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आतंकियों ने पेशावर को एक बार फिर निशाना बनाया है। महज 13 महीने बाद यह दूसरा हमला हुआ है। इस बार भी आतंकियों ने शिक्षण संस्थान को ही निशाना बनाया है। उत्तरी-पश्चिमी पाक के चारसद्दा में बाचा खान यूनिवर्सिटी पर आतंकियों ने धावा बोला, जिसमें 30 से अधिक लोग मारे गए हैं। 70 से ज्यादा लोग घायल हैं। जब यहां हमला हुआ, उस समय 3000 छात्र और 600 मेहमान मौजूद थे। यहां बाचा खान की पुण्यतिथि मनाई जा रही थी। 1988 में उनका निधन हो गया था और वह ताउम्र उदार-गांधीवादी रहे। यूनिवर्सिटी पर हमले की पहले से ही आशंका थी, इसलिए यहां हाई अलर्ट भी था। फिर भी आतंकी हमला करने में कामयाब रहे। इस हमले की जिम्मेदारी भी आतंकी गुट तहरीके तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने ली है। इससे पहले 2014 के दिसंबर में पेशावर के सैन्य स्कूल में टीटीपी ने ही मासूम छात्रों का कत्लेआम मचाया था, तब 150 से ज्यादा लोग मारे गए थे, जिसमें ज्यादातर छात्र थे। पाक पीएम नवाज शरीफ ने इसे कायराना हमला करार दिया है और इसकी कड़ी निंदा की है। नवाज ने कहा है कि मासूमों-बेकसूरों के कातिलों का कोई मजहब नहीं होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस हमले की तीखी भर्त्सना की है। इधर हाल के आतंकी घटनाओं को देखें तो साफ जाहिर होता है कि अब सभी देशों को एकजुट होकर आतंकवाद के खिलाफ हल्ला बोलना चाहिए। अभी इंडोनेशिया में आतंकी हमला हुआ, आईएस ने जिम्मेदारी ली। इस्लामिक स्टेट ने सीरिया में 300 लोगों को हलाक कर दिया। छिटपुट आतंकी घटनाएं तो दुनिया के विभिन्न हिस्सों में रोज हो रही हैं। अभी पठानकोट में हुए आतंकी हमले में पाक के आतंकी गुटों के सबूत मिले। भारत ने पाक को सबूत भी दिए और पाकिस्तान सरकार ने उस पर कार्रवाई भी शुरू की है, लेकिन केवल इसी से काम नहीं चलने वाला है। पाकिस्तान के लिए ज्यादा चिंता की बात इसलिए है, क्योंकि यहां कई खूंखार आतंकी गुट मौजूद हैं, उसे संरक्षण मिल रहा है और उसे प्रशिक्षण भी मिल रहा है। इसलिए पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ आर या पार सरीखे बड़े कदम उठाने चाहिए। हो सके तो उसे अपने खुफिया संगठन आईएसआई का ही पुनर्गठन करना चाहिए, क्योंकि इस पर आतंकवाद को पोषित करने के आरोप लगते रहे हैं। पाकिस्तान सरकार को अपने आवाम में मौजूद कट्टर तत्वों के सफाए की भी जरूरत है। और सबसे बड़ी बात कि पाकिस्तान को सोच और नीति के स्तर पर अच्छा आतंकवाद और बुरा आतंकवाद के फर्क को तत्काल खत्म करना होगा और यह भी सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी आतंकी गुट, आतंकी और दूसरे देश के दुश्मन पाकिस्तान की धरती का इस्तेमाल नहीं कर पाए। पाक के आतंकी गुट जिस तरह भारत और अफगानिस्तान में आतंकी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं, यह पाकिस्तान सरकार के सामने है। आज भी मुंबई हमले के गुनहगार पाक में खुलेआम घूम रहा है। भारत में सीरियल बम धमाकों के दोषी दाऊद इब्राहिम को पाक ने ही शरण दे रखा है। पठानकोट हमले के दोषियों पर ठोस कार्रवाई के साथ पाकिस्तान सरकार को इस्लामी कट्टर आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई शुरू करनी चाहिए।
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