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सुर्खियों में बने रहना ही जिनका मकसद है

मीडिया में चर्चा में बने रहने के लिए केजरीवाल इस तरह के सस्ते हथकंडे अपना रहे हैं।

सुर्खियों में बने रहना ही जिनका मकसद है
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नई दिल्ली. दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। जेल वे अपनी मर्जी से गए हैं। यदि वे चाहते तो जमानत बांड, जो कि कानूनी प्रक्रिया का एक हिस्सा है, पर हस्ताक्षर कर जमानत ले सकते थे पर उन्होंने ऐसा नहीं किया। जाहिर है, इस तरह वे जानबूझकर देश के कानून से, कोर्ट से टकराव के हालात पैदा कर रहे हैं। यही नहीं वे इस मामले का पूरी तरह से राजनीतिकरण भी कर रहे हैं।
लगता है कि वे इसका सियासी लाभ लेना चाहते हैं। वहीं उनकी पार्टी गलत बयानी कर रही है कि नितिन गडकरी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने से अरविंद को जेल भेजा गया है जबकि गडकरी के खिलाफ कुछ नहीं हो रहा है। यह सही नहीं है। भारत का संविधान हर नागरिक को हक देता है कि वह अपने आत्मसम्मान, गरिमा की रक्षा कर सके। यदि कोई व्यक्ति उस पर बिना तथ्यों के गलत आरोप लगाता है तो वह उसके खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है। दरअसल, अरविंद केजरीवाल ने कुछ दिनों पहले देश के कथित महाभ्रष्ट लोगों की सूची जारी की थी, जिसमें नितिन गडकरी का भी नाम था।
इसी के विरोध में गडकरी ने केजरीवाल के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज किया है, जिसकी सुनवाईचल रही है। जाहिर है यह पूरी तरह कानूनी कार्रवाई है और अदालत के कार्यक्षेत्र में आता है, परंतु जिस तरह से इसे आम आदमी पार्टी राजनीतिक रंग दे रही है वह दुर्भाग्यपूर्ण है। करीब डेढ़ साल पहले जन्म हुई आम आदमी पार्टी को गत वर्ष दिसंबर में दिल्ली विधानसभा चुनावों में जिस तरह की ऐतिहासिक सफलता मिलीथी, पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल कुछ उसी तरह का चमत्कार 16वीं लोकसभा चुनावों में भी होने की उम्मीद कर रहे थे, परंतु वैसा हुआ नहीं।
दिल्ली में तो उसका सूफड़ा साफ हो गया। कई दिग्गजों की जमानत तक जब्त हो गई। खुद केजरीवाल चुनाव हार गए। वहीं चुनावों के दौरान भाजपा के नरेंद्र मोदी पर अरविंद केजरीवाल जिस तरह की अर्मयादित टिप्पणियां करते रहे, उसकी भी कड़ी आलोचना हुई है। नरेंद्र मोदी के खिलाफ बनारस से चुनाव भी उन्होंने सिर्फ इसीलिए लड़ा था कि उनका प्रचार हो सके। वे इस तरह के हथकंडों से केवल राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में बने रहना चाहते थे।
देखा जाए तो पिछले दो हफ्तों से भारतीय जनता पार्टी और नरेंद्र मोदी लगातार सुर्खियों में बने रहे हैं, लिहाजा मीडिया से एक तरीके से अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी गायब रही। लिहाजा फिर से मीडिया में चर्चा में बने रहने के लिए वे इस तरह के सस्ते हथकंडे अपना रहे हैं। और इस चक्कर में वे पूरी तरह से एक्सपोज हो गए हैं। अब उनकी हरकतों को जनता भी राजनीतिक स्टंटबाजी मानने लगी है। अरविंद को जब तिहाड़ जेल भेजा गया था तो पार्टी ने एसएमएस भेजकर कार्यकर्ताओं को वहां पहुंचने की गुहार लगाई थी पर मुश्किल से मुट्ठीभर लोग वहां पहुंचे जिन्हें पुलिस ने आसानी से हटा दिया। अब अरविंद केजरीवाल को भी मनन करना चाहिए कि वे अपनी राजनीति की धारा को किस ओर ले जाना चाहते हैं। उन्हें टकराव की राजनीति करनी है या सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना है।
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